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ED की गिरफ्त में UCO बैंक के पूर्व चेयरमैन, लोन घोटाले में रिश्वत लेने का आरोप
UCO बैंक लोन घोटाले में सुबोध गोयल की गिरफ्तारी बताती है कि वित्तीय संस्थानों में पारदर्शिता और निगरानी की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यूको बैंक (UCO Bank) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सुबोध कुमार गोयल को एक बड़े बैंक लोन घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया है. उन्हें 16 मई को कोलकाता स्थित उनके आवास से पकड़ा गया. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई. 17 मई को उन्हें कोलकाता की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 21 मई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया.
छत्तीसगढ़ की कंपनी सीएसपीएल से जुड़ा मामला
यह मामला छत्तीसगढ़ स्थित एक कंपनी– सीएसपीएल (CSPL) से जुड़ा है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पहले ही इस कंपनी के खिलाफ एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी. जांच में सामने आया कि सीएसपीएल को यूको बैंक से ₹6,210.72 करोड़ का लोन मिला था, जिसे कथित तौर पर दूसरी जगह ट्रांसफर कर के अनुचित तरीके से उपयोग किया गया.
रिश्वत के रूप में मिला नकद, प्रॉपर्टी और महंगे गिफ्ट्स
ईडी का कहना है कि ये लोन उस वक्त मंजूर किए गए थे, जब सुबोध गोयल यूको बैंक के चेयरमैन थे. एजेंसी ने दावा किया है कि लोन मंज़ूरी के बदले गोयल को अवैध फायदे दिए गए, जिनमें नकद, जमीन-जायदाद, महंगे सामान और लग्ज़री होटल बुकिंग शामिल हैं. ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि ये रिश्वत शेल कंपनियों, उनके रिश्तेदारों और फ्रंट कंपनियों के माध्यम से भेजी गई, ताकि लेनदेन की असली पहचान छिपाई जा सके. कई संपत्तियों को गोयल, उनके परिजनों या उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर खरीदा गया.
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती
इस घोटाले में इससे पहले भी एक अहम गिरफ्तारी हो चुकी है. दिसंबर 2024 में ईडी ने सीएसपीएल के प्रमुख प्रमोटर संजय सुरेका को गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ फरवरी 2025 में चार्जशीट दाखिल की गई थी. जांच के दौरान सुरेका और उनकी कंपनी की लगभग ₹510 करोड़ की संपत्तियां भी दो अलग-अलग आदेशों के तहत जब्त की गईं.
जांच जारी, और भी खुलासे संभव
ईडी की जांच अभी जारी है और अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं. एजेंसी फिलहाल गोयल से पूछताछ कर रही है, ताकि लोन घोटाले से जुड़े अन्य लोगों और फंड ट्रेल का पता लगाया जा सके. यह मामला भारतीय बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की ज़रूरत को एक बार फिर से उजागर करता है.
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