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बॉलीवुड के नामी डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा को जुर्माने के साथ 3 महीने की सजा, जानिए क्या है पूरा मामला?
बॉलीवुड डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा को सात साल पुराने एक मामले में 3 महीने की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें करीब 3 लाख रुपये का जुर्माना भरने का भी आदेश भी दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सत्या, रंगीला’, ‘कंपनी’ और ‘भूत’ जैसी फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा को चेक बाउंस के एक मामले में 3 महीने की सजा के साथ शिकायतकर्ता 3.72 लाख रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है. इससे पहले ‘दामिनी’, ‘घायल’ और ‘घातक’ जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर राजकुमार संतोषी को भी चेक बाउंस के एक केस में 2 साल की सजा सुनाई गई थी, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एक ही मामले में दोनों डायरेक्टर को अलग-अलग सजा क्यों सुनाई गई है? तो चलिए जानते हैं इसे लेकर कानून क्या कहता है.
ये है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राम गोपाल वर्मा का चेक बाउंस केस करीब 7 साल पुराना है. ये चेक 2 लाख 38 हजार रुपये का था, लेकिन खाते में पर्याप्त अमाउंट नहीं होने के चलते ये चेक बाउंस हो गया. साल 2018 में ‘श्री’ नाम की एक फिल्म कंपनी ने रामू की कंपनी के खिलाफ ये मामला दर्ज कराया था. इस कंपनी के मालिक महेशचंद्र मिश्र हैं. बता दें, राम गोपाल वर्मा ने लंबे समय से कोई फिल्म नहीं बनाई है और कोविड के बाद से ही वह आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं. उन्हें अपना ऑफिस भी बेचना पड़ा है. चेक बाउंस मामले को लेकर जब मुंबई की अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट में परसों सुनवाई हुई, तब राम गोपाल वर्मा वहां उपस्थित नहीं हुए. इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ 3 महीने जेल की सजा सुनाई. अदालत ने उनकी गिरफ्तारी के लिए एक ‘नॉन-बेलेबल वारंट’ जारी किया है. वहीं, राम गोपाल वर्मा को शिकायतकर्ता को 3.72 लाख रुपये देने का भी आदेश सुनाया है. ये आदेश पालन नहीं करने पर उन्हें 3 महीने की सजा और हो सकती है. रामू को इस मामले में जून 2022 में 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत भी मिल गई थी.
राजकुमार संतोषी को हुई 2 साल की सजा
राम गोपाल वर्मा से पहले फिल्म डायरेक्टर राजकुमार संतोषी को जामनगर की एक अदालत चेक बाउंस के मामले में 2 साल जेल की सजा सुनाई थी. राजकुमार संतोषी ने गुजरात के उद्योगपति अशोक लाल को 10-10 लाख रुपये के 10 चेक जारी किए थे, जो एक के बाद एक 10 चेक बाउंस हुए थे. 1 करोड़ रुपये के पेमेंट वाले इस केस में अदालत ने उन्हें 2 साल की सजा सुनाई थी साथ ही दोगुनी रकम करीब 2 करोड़ रुपये चुकाने के लिए भी कहा था. हालांकि उन्हें बाद में इस मामले में बेल मिल गई थी.
चेक बाउंस मामले में क्या कहता है कानून?
भारत में चेक बाउंस को वादे का उल्लंघन माना जाता है. कानून की नजर में ये एक क्रिमिनल ऑफेंस है. देश में इसके लिए ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ की धारा-138 काम करती है. इसके हिसाब से चेक बाउंस होने पर आपको 2 साल तक जेल की सजा और जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है. अदालत चेक की राशि से डबल राशि का भुगतान करने के लिए भी कह सकती है. देश में चेक से पेमेंट को ‘लिखित वादा’ माना जाता है. चेक जारी करने वाले व्यक्ति के बैंक खाते में जब पर्याप्त राशि नहीं होती और तब बैंक उसका पेमेंट करने से मना कर देते हैं. तब उसे ‘चेक बाउंस’ होना कहा जाता है
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