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हरियाणा में ED ने ORRIS बिल्डर के ठिकानों पर छापेमारी, 500 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप
जांच एजेंसी ईडी के मुताबिक ओरिस इंफ्रा कंपनी सहित उसकी सहयोगी 2 अन्य कंपनियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में कई निवेशकों के दर्जनों मामले दर्ज कराए गए थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 500 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जीवाड़ा का खुलासा किया है. इस मामले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए दिल्ली एनसीआर में काफी चर्चित कंपनी ओरिस (ORRIS) इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी सहित उसकी कई सहयोगी कंपनियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन किया गया. ये सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को दिल्ली, हरियाणा के गुरुग्राम सहित नोएडा (Noida) में अंजाम दिया गया.
ED ने चलाया सर्च ऑपरेशन
जांच एजेंसी ईडी की गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने इस मामले में ग्रीन-वे इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और मेसर्स थ्री सी शेल्टर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के खिलाफ भी सर्च ऑपरेशन चलाया था. इस दौरान काफी सबूतों और दस्तावेजों सहित काफी इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस को खंगाले गए. जांच एजेंसी के द्वारा इन कंपनियों और उन कंपनियों से जुड़े कई मौजूदा सहित पूर्व निदेशकों के लोकेशन पर भी सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई की गई. दर्ज FIR के मुताबिक जांच एजेंसी के रडार पर प्रमुख तौर पर ये आरोपी हैं, जिसके खिलाफ सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. उनके नाम प्रमुख तौर पर इस प्रकार से हैं. विजय गुप्ता, अमित गुप्ता, सरदार निर्मल सिंह और अन्य.
आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज सैकड़ों शिकायतें
जांच एजेंसी ईडी के मुताबिक ओरिस इंफ्रा कंपनी सहित उसकी सहयोगी 2 अन्य कंपनियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में कई निवेशकों के दर्जनों मामले दर्ज कराए गए थे. इसके बाद में उन्हीं मामलों को जांच एजेंसी ईडी ने टेकओवर किया. मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामले को तफ्तीश किया जा रहा है. ईडी की गुरुग्राम जोनल ऑफिस के द्वारा इस मामले की तफ्तीश के दौरान कई आरोपियों का बयान दर्ज किया गया था. उसी के आधार पर तमाम सबूतों को इकट्ठा करने के बाद अब तफ्तीश का दायरा आगे बढ़ाया जा रहा है.
500 करोड़ का किया फर्जीवाड़ा
जांच एजेंसी के मुताबिक कंपनी के निदेशकों और अन्य अधिकारियों के द्वारा लोगों को आशियाना दिलाने के नाम पर करीब एक हजार करोड़ रुपये जमा किए गए. इसके बाद में करीब 500 रुपये उस संबंधित प्रोजेक्ट में खर्च करके बाकी के 500 करोड़ का फर्जीवाड़ा कर दिया गया, यानि लोगों के साथ फर्जीवाड़े करते हुए उन्हें समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया.
उसके बाद कंपनी के निदेशकों के द्वारा जमा कराए गए करोड़ों रुपये को किसी अन्य प्रोजेक्ट में निवेश कर दिया गया. इससे इन कंपनियों की दूसरी कंपनी में काफी मुनाफा हुआ लेकिन जिस प्रोजेक्ट के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए थे. उसके निवेशकों को चूना लगा दिया गया. जिसके बाद दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा हुए थे.
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