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DSP से सीधे सिपाही: पद-प्रतिष्ठा के साथ-साथ पैसा भी गया, अब इतनी रह गई सैलरी

उत्तर प्रदेश से सामने आए एक मामले को लेकर बहस शुरू हो गई है. यहां एक DSP को डिमोट कर सिपाही बनाया गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

उत्तर प्रदेश में एक DSP को डिमोट कर सिपाही बनाने के फैसले पर बहस छिड़ गई है. कृपाशंकर कनौजिया (Kripa Shankar Kanaujiya) ने अपने पुलिस करियर की शुरुआत सिपाही से की ही थी. अब वह वापस उसी पोजीशन पर पहुंच गए हैं. गौर करने वाली बात ये है कि 59 वर्षीय कनौजिया अगले साल रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में डिप्‍टी एसपी लेवल के इस अफसर के खिलाफ इतनी सख्त सजा पर बहस शुरू हो गई है. चलिए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और कृपाशंकर कनौजिया को पद-प्रतिष्ठा के साथ-साथ कितना आर्थिक नुकसान हुआ है.  

ऐसे शुरू हुए बुरे दिन
यूपी पुलिस में DSP से सिपाही बने कृपाशंकर कनौजिया के खिलाफ उत्तर सरकार के सेवक (अनुशासन और अपील) नियम 1999 के तहत कार्रवाई की गई है. यह नियम किसी अधिकारी या कर्मचारी को डिमोट करके उसके पहले पद पर वापस भेजने की अनुमति देता है. कड़ी मेहनत और लगन से सिपाही से DSP के पद पर पहुंचने वाले कनौजिया के बुरे दिनों की शुरुआत करीब तीन साल पहले हुई थी. वह एक महिला सिपाही के साथ होटल में पकड़े गए थे. इसके बाद उनके खिलाफ जांच हुई और उन्हें दोषी पाया गया. दंड स्वरूप कनौजिया की वापस उनके पहले पद पर नियुक्ति हुई है.  

एक कॉल से खुला राज   
जुलाई 2021 में उन्‍नाव में तैनात कृपाशंकर कनौजिया ने अपने घर गोरखपुर जाने के लिए छुट्टी ली थी. वह उन्नाव से गोरखपुर के लिए निकले, लेकिन पहुंचे नहीं. उनका फोन लगातार बंद जा रहा था. इस पर कनौजिया की पत्नी ने उन्‍नाव के एसपी को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया. चूंकि मामला सीनियर पुलिस अधिकारी से जुड़ा था, इसलिए पूरा महकमा हरकत में आ गया. पुलिस ने कनौजिया के फोन को सर्विलांस पर डाला, जिससे उनकी लोकेशन पता चल सकी. वह कानपुर के माल रोड स्थित एक होटल में ठहरे हुए थे. जब पुलिस टीम वहां पहुंची तो कनौजिया को एक महिला सिपाही के साथ पाया. मीडिया में इस मामले के आने पर पुलिस विभाग की काफी किरकिरी हुई थी. इसके बाद आरोपी DSP के खिलाफ जांच बैठाई गई.

ऑर्डर के बाद से गायब 
नाराज यूपी सरकार ने समीक्षा के बाद कृपाशंकर कनौजिया को फिर से सिपाही बनाने की सिफारिश की. इसके बाद ADG प्रशासन ने डीएसपी कनौजिया को सिपाही बनाने का आदेश जारी कर दिया. उन्‍नाव के बीघापुर थाने में डीएसपी रहे कनौजिया अब पीएसी की 26वीं वाहिनी में सिपाही हैं. हालांकि, डिमोशन का आदेश जारी होने के बाद से वह गायब चल रहे हैं. इस संबंध में विभाग के मुंशी ने सिपाही कृपाशंकर कनौजिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है. कनौजिया 1986 में यूपी पुलिस के सिपाही पद पर भर्ती हुए थे. अपनी मेहनत और लगन से वह आगे बढ़ते रहे और DSP जैसा प्रतिष्ठा पद हासिल कर लिया, लेकिन एक गलती से वह अपना सबकुछ गंवा बैठे हैं.   

पहले मिलती थी इतनी सैलरी
कृपाशंकर कनौजिया को बड़ा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है. उनकी सैलरी एक ही झटके में काफी कम हो गई है. साथ ही उन्हें एक अधिकारी को मिलने वालीं सुविधाओं से भी हाथ धोना पड़ा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 7वें वेतन आयोग तहत यूपी में DSP का वेतन 53,100 रुपए से शुरू होकर 1,67,800 रुपए प्रति माह तक जाता है. वेतन अनुभव और विभाग के आधार पर कम ज्यादा हो सकता है. उदाहरण के तौर पर कुछ विशेषज्ञताओं, जैसे कि साइबर अपराध या आतंकवाद विरोधी विभाग में पोस्टेड DSP को अधिक वेतन मिल सकता है. 

अब मिलेगा महज इतना वेतन
उत्तर प्रदेश में DSP को सैलरी के अलावा कई अन्य भत्ते भी मिलते हैं. जैसे कि आवास भत्ता, यात्रा भत्ता, चिकित्सा भत्ता उर शिक्षा भत्ता. इसके साथ ही डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) को बिजली, टेलीफोन कनेक्शन, चार पहिया वाहन, गार्ड, निजी रसोइया और निजी सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराए जाते हैं. उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखंड में DSP की सबकुछ कट-कटाकर इन-हैंड सैलरी 73915 रुपए मिलती है. जबकि इसकी तुलना में सिपाही को काफी कम सैलरी मिलती है. उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल का मूल वेतन 21,700 रुपए होता है. इसमें HRA, TA, DA सहित कई प्रकार का भत्ता मिलाकर कॉन्स्टेबल की शुरुआती सैलरी 30 हजार से ज्यादा होती है. यानी 53,100 रुपए से 1,67,800 रुपए प्रति माह के बीच कमाने वाले कनौजिया को अब बहुत कम सैलरी मिलेगी.


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