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कानून को बिजनेस मत बनाइए, उसे प्रोफेशन रहने दीजिए : डॉ ललित भसीन
आज वकालत एक नए दौर से गुजर रही है. जहां आपको इतिहास का भी पता होना चाहिए और साहित्य का भी पता होना चाहिए. खूब पढ़ाई कीजिए. हर वक्त अपडेट रहिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
बिजनेस वर्ल्ड लीगल (BWLegal) के कार्यक्रम में पहुंचे सीनियर लॉयर डॉ ललित भसीन ने प्रोग्राम में पहुंचे यंग लॉयर को संबोधित करते हुए कहा कि हमें कानून को बिजनेस बनाने की जरूरत नहीं है, उसे सिर्फ प्रोफेशन रहने दीजिए. उन्होंने कहा कि आज हमारे पास कोई भी मामला आता है तो हम उसे सीधे कोर्ट में ले आते हैं. अगर हम उसमें दोनों पार्टियों के बीच में मामला सुलझा सकें तो ये बहुत अच्छा होगा. उन्होंने कहा कि आज देश की अलग-अलग अदालतों में करोड़ों मामले पेंडिंग है. उन्होंने सभी वकीलों को सलाह देते हुए कहा कि सिर्फ CRPC पढ़ लेना जरूरी नहीं है, बल्कि आपको दुनिया में क्या हो रहा है वो भी पता होना चाहिए.
सिर्फ CRPC पढ़ना पर्याप्त नहीं
पिछले कई दशक से वकालत के पेशे में काम कर रहे डॉ भसीन ने कहा कि अगर आपने कानून की डिग्री ले ली है और CRPC पढ़ ली है तो वो पर्याप्त नहीं है. जरूरी है कि आप अपनी जानकारियों को हर रोज बढ़ाएं. उन्होंने यंग लॉयर को सलाह देते हुए कहा कि सिर्फ हमारे देश में क्या हो रहा है ये जानने के बजाए जरूरी ये है कि हम ये भी जानें कि आज अमेरिका और सिंगापुर की अदालतों में क्या हो रहा है.
डॉ ललित भसीन ने बहुत ही बुनियादी बात बताते हुए कहा कि आपको हर रोज दो अंग्रेजी अखबार और एक फाइनेंशियल अखबार भी पढ़ना चाहिए. आपको देश की जानकारी के साथ-साथ आपको फाइनेंशियल सेक्टर की भी जानकारी होनी चाहिए. क्योंकि आज सभी सेक्टर की जानकारी होना बहुत जरूरी है.
आपके पास 10 केस हैं या 20 इससे कोई फर्क नहीं पढ़ता
उन्होंने आजकल के वकीलों के ट्रेंड के बारे मे बताते हुए कहा कि मौजूदा समय में मैंने बहुत से वकीलों को ये कहते हुए सुना है कि मेरे पास हाईकोर्ट के 20 केस हैं और सुप्रीम कोर्ट के 10 केस हैं. उन्होंने बताया कि कल रात मैं देश के सीनियर वकील कपिल सिब्बल के पास गया था. वहां चर्चा के दौरान इस बात पर फोकस रहा कि वकालत को बिजनेस मत बनाइए, आप इसे प्रोफेशन ही रहने दीजिए. डॉ भसीन ने कहा कि आज हमारे देश की न्यायिक व्यवस्थाओं पर बहुत भार है. उन्होंने कहा कि देश में आज करोड़ों केस पेंडिंग हैं। अगर हम किसी मामले को आपसी समन्वय से सुलझा सकते हैं तो हमें पहले वो करना चाहिए. अनावश्यक तौर पर अदालत में जाने से बचना चाहिए.
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