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क्या Adani मामले में SEBI के हाथ भी हैं काले? अब कठघरे में बाजार नियामक
अडानी-हिंडनबर्ग मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिक में सेबी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
क्या बाजार नियामक सेबी (SEBI) अडानी समूह (Adani Group) को फायदा पहुंचाने के लिए सच्चाई छिपाता रहा है? सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में यह आरोप लगाया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, याचिकाकर्ता का कहना है कि सेबी (SEBI) ने 2014 में अडानी ग्रुप के खिलाफ डायरेक्टरेट ऑफ रिवेन्यू इंटेलीजेंस (DRI) के एक अलर्ट को छिपाया था. यह अलर्ट अडानी की कंपनियों के संभावित फंड डाइवर्जन और स्टॉक मार्केट में छेड़छाड़ के बारे में था.
विस्तृत जांच की मांग
याचिका में अमेरिकी शार्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में सामने आई जानकारी की विस्तृत जांच की मांग की गई है. साथ ही सेबी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि SEBI ने अडानी ग्रुप के खिलाफ जांच में सही तथ्य नहीं रखे. याचिकाकर्ता अनामिका जायसवाल का कहना है कि हिंडनबर्ग मामले में सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी स्टेटस रिपोर्ट में DRI के अलर्ट का जिक्र नहीं किया है. बता दें कि हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप के बारे में इसी साल 24 जनवरी को एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट में समूह पर शेयरों की कीमत में छेड़छाड़ सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे.
क्या था DRI के अलर्ट में?
याचिकाकर्ता अनामिका जायसवाल ने आरोप लगाया है कि सेबी ने अडानी ग्रुप के बारे में डीआरआई अलर्ट कोई जिक्र नहीं किया है. जनवरी 2014 में DRI ने एक अलर्ट में आशंका जताई थी कि अडानी ग्रुप द्वारा शेयर बाजार में मैनिपुलेशन किया जा सकता है. जायसवाल ने हलफनामे में कहा है कि डीआरआई ने तत्कालीन सेबी चीफ यूके सिन्हा को 31 जनवरी, 2014 को एक चिट्ठी भेजी थी, जिसमें आशंका जताई जा गई थी कि अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियां शेयर मार्केट में छेड़छाड़ कर सकती हैं. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सेबी से हिंडनबर्ग के आरोपों की जांच करने को कहा था. सेबी ने 25 अगस्त को कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी. अब अनामिका जायसवाल की इस याचिका से सेबी और अडानी समूह, दोनों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
रिश्ते पर भी किया सवाल
याचिकाकर्ता अनामिका जयसवाल ने अपने हलफनामे में सेबी के सदस्य सिरिल श्रॉफ और गौतम अडानी के पारिवारिक संबंधों का भी जिक्र किया है. उन्होंने इसे स्पष्ट तौर पर सेबी के हितों का टकराव करार दिया है. दरअसल, सिरिल श्रॉफ की बेटी परिधि की शादी अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के बेटे करण अडानी से हुई है, इस वजह से उनका पारिवारिक रिश्ता है. इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी यही मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि अडानी के समधी मशहूर वकील सिरिल श्रॉफ कॉरपोरेट गवर्नेंस एंड इनसाइडर ट्रेडिंग पर सेबी की समिति में काम करते हैं. अगर सेबी इंडिया अडानी मामले की जांच कर रहा है, तो श्रॉफ को खुद को इससे अलग कर लेना चाहिए. परिधि भी अपने पिता की तरह कॉर्पोरेट वकील हैं.
चलाते हैं सबसे बड़ी लॉ फर्म
करण और परिधि की शादी साल 2013 में हुई थी, जो उस साल की सबसे चर्चित शादियों में से एक थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस शादी में मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी और उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे. करण और परिधि के तीन रिसेप्शन हुए थे, जिनमें से एक में कुल 22,000 लोगों को आमंत्रित किया गया था. अब बात करते हैं अडानी के समधी सिरिल श्रॉफ की. श्राफ भारत के सबसे प्रसिद्ध कानूनी दिग्गजों में से एक हैं. वह कॉर्पोरेट लॉ में माहिर हैं और भारत की सबसे बड़ी लॉ फर्म 'सिरिल अमरचंद मंगलदास' के मैनेजिंग पार्टनर हैं. इस फर्म को मशहूर उद्योगपतियों को कानूनी सलाह देने के लिए जाना जाता है.
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