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तारीख पर तारीख: अब सीजेआई ने सामने रखी जजों की संख्या पर भारत की काली तस्वीर
सीजेआई ने चेक बाउंस का मामला पूरी तरह से दीवानी मामला हुआ करता था. लेकिन कुछ समय पहले सरकार ने इस आपराधिक मामला बना दिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
हमारे देश में अदालतों में बढ़ते मामलों की संख्या पर चिंता तो सभी लोग जता चुके हैं लेकिन इसका हल आज तक नहीं निकल पाया है. अब इस समस्या पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने एक ऐसी जानकारी सामने रखी है जिसने सभी को हैरान कर दिया है. 140 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया का नंबर वन देश होने के बावजूद हमारी अदालतों में दुनिया में सबसे कम जज मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि केसों की संख्या को कम करने के लिए दुनियाभर में एआई की मदद ली जा रही है.
सीजेआई ने कही क्या बात?
सीजेआई डी वाई चंद्रचूढ़ ने ऑक्सफोर्ड यूनियन में एक सवाल के जवाब में अपनी बात कहते हुए कहा कि भारत में न्यायाधीश जनसंख्या अनुपात काफी कम है. हमें अपने लगातार बढ़ते मामलों की संख्या को कम करने के लिए और जजों की आवश्यकता है और हम इसे लेकर सरकार से बात कर रहे हैं. सीजेआई ने ये भी कहा कि अदालतों में कोई भी पद लंबे समय तक रिक्त ना रहे. जैसे ही पद खाली हों वहां तुरंत नियुक्ति हो जानी चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि जब संसद में कोई कानून बनाया जाता है तो ये भी देखा जाना चाहिए कि उसका अदालतों पर क्या असर पड़ेगा.
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संसद के कानून का होता है ये असर
सीजेआई ने अपनी बात को समझाते हुए कहा कि कुछ समय पहले तक चेक बाउंस का मामला पूरी तरह से दीवानी मामला हुआ करता था. लेकिन कुछ समय पहले सरकार ने इस आपराधिक मामला बना दिया. इसके चलते अदालतों में मजिस्ट्रेट स्तर पर बहुत से मामले आ गए. उन्होंने कहा कि इसलिए हमें ये समझना होगा कि जब भी हम कोई कानून बनाएं तो उसके अदालतों पर पड़ने वाले असर को पहले ऑडिट कर लें.
तकनीक से निपटाए जा सकते हैं कुछ मामले
सीजेआई ने लगातार बढ़ते मामलों को तकनीक के इस्तेमाल के जरिए सुलझाने की अपनी बात कही. उन्होंने इसका उदाहरण एक मामले से दिया और कहा कि हाल ही में उनके सहयोगी के पास जमीन अधिग्रहण से जुड़ा एक ऐसा मामला था जिसमें 750 ऐसे मामले थे जिनका निपटारा एक ही फैसले से हुआ था. उन्होंने कहा कि कुछ मामले ऐसे होते हैं जो एक ही तरीके के होते हैं और हम उन्हें तकनीक के जरिए सुलझा सकते हैं. चीफ जस्टिस ने ये भी कहा कि मामलों को शीघ्रता से निपटाने के लिए कई उपाय किए गए हैं और प्रयास लगातार जारी हैं.
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