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पुणे के रेस्तरां को कोर्ट ने दिया झटका, Burger King नाम के इस्तेमाल पर लगाई रोक!

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के एक मामले में पुणे स्थित बर्गर किंग रेस्तरां पर ब्रैंड का नाम इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

अगर आप बर्गर किंग (Burger King) के आउटलेट में जाकर बर्गर खाते हैं, तो ये खबर आपके इंटरस्ट की हो सकती है. दरअसल, ‘बर्गर किंग' नाम को लेकर अमेरिकी की दिग्गज फास्ट-फूड कंपनी और पुणे में बर्गर की एक फेमस दुकान के बीच चले आ रहे मुकदमे में हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेस्तरां को 'बर्गर किंग' नाम का उपयोग करने की अनुमति देने वाले पुणे ट्रायल कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. आइए जानते हैं ये पूरा मामला क्या है और अब कोर्ट ने इसमें क्या फैसला सुनाया है?

पुणे ट्रायल कोर्ट के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पिछले हफ्ते बर्गर किंग ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इस याचिका में कंपनी ने पुणे के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. दरअसल, पुणे ट्रायल कोर्ट ने पुणे स्थित बर्गर किंग रेस्तरां के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप वाले मुकदमे को खारिज कर दिया था और रेस्तरां को बर्गर किंग नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी थी. ऐसे में जिला अदालत से मुकदमा खारिज होने के बाद बर्गर किंग ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई रोक
अमेरिकी फास्टफूड कंपनी बर्गर किंग की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सोमवार को पुणे स्थित बर्गर किंग नाम के एक रेस्तरां पर ब्रैंड का नाम इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बर्गर किंग की याचिका पर न्यायमूर्ति एएस. चंदुरकर और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने सोमवार यानी 26 अगस्त 2024 को कहा कि कोर्ट 6 सितंबर को कंपनी की अर्जी पर सुनवाई करेगी और तब तक रेस्तरां ब्रैंड के नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा. कंपनी ने रेस्तरां के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग की अर्जी दी है. वहीं, कंपनी ने कहा कि रेस्तरां भी "बर्गर किंग" नाम का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे कंपनी को कारोबार में नुकसान के साथ उसकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंच रहा है. 

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2011 में दायर में हुआ था मुकदमा
बर्गर किंग कॉरपोरेशन ने साल 2011 में पुणे अदालत में मुकदमा दायर किया था. इस मुकदमें में कंपनी ने कहा था कि पुणे का एक रेस्तरां "बर्गर किंग" नाम का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि भारत में बर्गर किंग आउटलेट की शुरूआत करने से भी पहले अमेरिकी में बर्गर किंग कंपनी खुल गई थी. पुणे कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब कंपनी ने हाई कोर्ट में आवेदन दिया है.. 

यहां से हुई बर्गर किंग नाम की लड़ाई की शुरुआत 
ये पूरा मामला 2008 का है, जब अमेरिकी कंपनी ने अपने पिछले वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक चेतावनी जारी की थी. अमेरिकी कंपनी को पता चला था कि पुणे स्थित "बर्गर किंग" रेस्तरां जो अनाहिता और शापूर ईरानी का था, उन्होंने ट्रेडमार्क के लिए आवेदन दायर किया हुआ है. 2009 में अमेरिकी कंपनी ने कैंप और कोरेगांवपार्क में स्थित पुणे के भोजनालयों के मालिकों को नोटिस भेजा, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया और अमेरिकी कंपनिय कंपनियों के कानूनी अधिकारों को नकार दिया. ईरानी दंपती ने दावा किया था कि वह 1989 से अपनी एक दुकान चला रहे हैं और 1992 से बर्गर किंग नाम का उपयोग कर रहे हैं. पत्नी और पति ने कहा कि उन्हें अमेरिकी दिग्गज कंपनी के अस्तित्व के बारे में भी पता नहीं था.  

 


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