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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे को ईडी ने किया गिरफ्तार
जहां ईडी इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं कांग्रेस और भूपेश बघेल इसे सत्ता के दुरुपयोग और बदले की राजनीति बता रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में बड़ा मोड़ आया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया. ईडी ने यह कार्रवाई चैतन्य के जांच में सहयोग नहीं करने के आधार पर की है.
सुबह हुई छापेमारी, PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तारी
ईडी की टीम ने शुक्रवार सुबह भिलाई स्थित बघेल परिवार के निवास पर छापेमारी की और बाद में चैतन्य बघेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 19 के तहत हिरासत में ले लिया. चैतन्य और भूपेश बघेल दोनों एक ही घर में रहते हैं, इसलिए तलाशी और गिरफ्तारी की कार्रवाई वहीं की गई. इससे पहले मार्च 2025 में भी ईडी ने उनके घर पर छापा मारा था.
भूपेश बघेल का पलटवार, बताया ‘सियासी साजिश’
गिरफ्तारी के तुरंत बाद भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि यह कदम विधानसभा के मानसून सत्र को भटकाने के लिए उठाया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उसी दिन तमनार में अदाणी की कोल परियोजना पर चर्चा होनी थी, और ध्यान हटाने के लिए यह कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि यह सब "साहब" के इशारे पर हो रहा है.
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला?
यह मामला 2019 से 2022 के बीच राज्य में शराब की बिक्री से जुड़े ₹2,100 करोड़ के कथित घोटाले से जुड़ा है. ईडी का आरोप है कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए एक शराब माफिया को फायदा पहुंचाया गया, जिससे राज्य को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ. जांच एजेंसी का कहना है कि घोटाले से प्राप्त धन का एक हिस्सा चैतन्य बघेल तक भी पहुंचा.
पहले ही कई बड़े नाम गिरफ्तार
इस मामले में पहले भी कई बड़ी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें पूर्व मंत्री कवासी लखमा, रायपुर के मेयर अजीज ढेबर के भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अनिल तुतेजा और टेलीकॉम अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी शामिल हैं. शुरुआत में ईडी ने यह केस आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर शुरू किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. बाद में जनवरी 2024 में आर्थिक अपराध शाखा की नई FIR के आधार पर जांच दोबारा शुरू हुई.
70 नाम शामिल, ₹205 करोड़ की संपत्ति जब्त
ईडी द्वारा दर्ज की गई नई एफआईआर में 70 से अधिक व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम शामिल हैं, जिनमें कई राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी भी हैं. अब तक ईडी करीब ₹205 करोड़ की संपत्तियों को जब्त कर चुकी है, और जांच अभी भी जारी है. एजेंसी का दावा है कि यह घोटाला राज्य के शीर्ष राजनीतिक स्तर से संचालित किया गया था.
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