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₹50 करोड़ के घोटाले में CBI की FIR से सवालों के घेरे में कालनत्री परिवार और The Green Billions

CBI का आरोप है कि TGBL ने ₹25 करोड़ की एक फर्जी परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा की, लेकिन बैंक ने साफ किया कि वह गारंटी नकली है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

मुंबई की कॉरपोरेट और इंडस्ट्री से जुड़ी दुनिया में एक बड़ा घोटाला सामने आने वाला है. यह घोटाला कालनत्री परिवार से जुड़ा है, जिसकी अगुवाई विजय कालनत्री कर रहे हैं. विजय कालनत्री ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज़ (AIAI) के प्रेसिडेंट हैं, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन हैं, बालाजी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन हैं और पहले कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं.

CBI (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) ने ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) और द ग्रीन बिलियंस लिमिटेड (TGBL) के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है. TGBL कंपनी का सीधा संबंध कालनत्री परिवार से है. यह मामला एक बड़ी धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें नकली बैंक गारंटी, गुम दस्तावेज़ और करीब ₹50 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है. यह FIR CBI की पुलिस इंस्पेक्टर वैशाली घोरपड़े की शिकायत पर दर्ज की गई है.

घोटाले की शुरुआत कैसे हुई

यह मामला तब शुरू हुआ जब इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) ने BECIL नाम की सरकारी कंपनी को ₹80 करोड़ का लोन दिया. यह पैसा वेस्ट मैनेजमेंट, एलईडी स्मार्ट लाइटिंग और स्मार्ट मीटरिंग जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए था. BECIL ने इसमें से ₹50 करोड़ मुंबई की TGBL नाम की कंपनी को पुणे में कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) के एक प्रोजेक्ट के लिए दिए. शुरुआत में यह एक आम सरकारी और निजी साझेदारी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) लग रही थी, लेकिन बाद में इसमें गड़बड़ी और धोखाधड़ी की बातें सामने आने लगीं.

कालनत्री परिवार का संबंध

इस पूरे मामले के बीच में कालनत्री परिवार का नाम है, जिनका TGBL कंपनी से गहरा जुड़ाव है. डॉ. विजय गोवर्धनदास कालनत्री — जो एक जाने-माने उद्योगपति हैं और Dighi Port Limited और Balaji Infra Projects के प्रमोटर भी हैं — TGBL और इसकी ग्रीन हाइड्रोजन योजनाओं का लंबे समय से समर्थन करते आ रहे हैं. उनकी बेटी TGBL की प्रमोटर है और उनका बेटा विशाल विजय कालनत्री पहले इस कंपनी में बड़ा पद संभाल चुका है. अब CBI का आरोप है कि TGBL ने ₹25 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी (Performance Bank Guarantee) जमा की थी. यह गारंटी पंजाब नेशनल बैंक, घाटकोपर ईस्ट ब्रांच की बताई गई थी — लेकिन बैंक ने कहा कि वह गारंटी नकली (फर्जी) है.

FIR और मुख्य आरोपी

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव और चीफ विजिलेंस ऑफिसर संजीव शंकर की शिकायत पर CBI ने एक केस दर्ज किया है. इस केस में कई लोगों के नाम शामिल हैं:

• जॉर्ज कुरुविला – BECIL के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर
• डब्ल्यू.बी. प्रसाद – जनरल मैनेजर
• आशीष प्रताप सिंह – पूर्व लीगल एडवाइजर
• सुधीर चौहान – पूर्व सलाहकार
• प्रतीक कनाकिया – TGBL के सीईओ और फाउंडर
• और कुछ अन्य अज्ञात लोग

CBI का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर TGBL को ₹50 करोड़ तीन किश्तों में दे दिए, जबकि कंपनी कुछ ज़रूरी शर्तें पूरी नहीं कर पाई थी. इन शर्तों में शामिल थे, इन्डेम्निटी बॉन्ड (Indemnity Bond) देना, ₹45 करोड़ के ब्लैंक चेक जमा करना, ज़मीन की लीज़ डीड (Land Lease Deed) देना. अब और हैरानी की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े अहम दस्तावेज — जैसे फर्जी बैंक गारंटी, इन्डेम्निटी बॉन्ड और हाइपोथिकेशन की सहमति — BECIL के नई दिल्ली ऑफिस से गायब हो गए हैं. इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई है.

CBI ने इन आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की ये धाराएं लगाई हैं:

• आपराधिक साजिश (धारा 120-B)
• धोखाधड़ी (धारा 420)
• जालसाजी (धारा 467, 468, 471)
• सबूत नष्ट करना (धारा 201)
• इसके अलावा भ्रष्टाचार निरोधक कानून, 1988 की धारा 7 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

परेशानियों से भरा वित्तीय इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब कालनत्री परिवार विवादों में आया है. विजय कालनत्री, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री एस.बी. चव्हाण के करीबी माने जाते थे और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से भी जुड़े रहे हैं, पहली बार 2001 में चर्चा में आए थे. उस समय मुंबई के नरीमन पॉइंट में एक कीमती प्रॉपर्टी एस.बी. चव्हाण के नाम पर बने एक ट्रस्ट को दी गई थी, जिसमें विजय कालनत्री और जयंत शाह ट्रस्टी थे. 

2014 में महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना सरकार आने के बाद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC), कफ परेड को चलाने वाले संगठन MVIRDC में कई वित्तीय गड़बड़ियाँ सामने आईं. विजय कालनत्री WTC के चेयरमैन रहे हैं. कई मीडिया रिपोर्ट्स में कालनत्री, उनके बेटे और अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे. इनमें एक 80 साल के निदेशक को 2012-13 में ₹50 लाख की सैलरी देने का मामला भी था, जो माना जाता है कि कालनत्री और कमल मोरारका के कहे पर चलते थे. मुंबई मिरर ने तब एक कड़ी रिपोर्ट में WTC को “धोखे की मीनार” कहा था. मोरारका की मृत्यु के बाद WTC में विजय कालनत्री ही अकेले ताकतवर व्यक्ति रह गए.

2019 में, बैंक ऑफ बड़ौदा ने विजय कालनत्री को जानबूझकर लोन न चुकाने वाला (wilful defaulter) घोषित किया. यह मामला ₹3,334 करोड़ का था, जो 16 बैंकों के समूह से लिया गया था, जिसका नेतृत्व बैंक ऑफ इंडिया कर रहा था. यह लोन दिघी पोर्ट से जुड़ा हुआ था. 2021 में भी उनका नाम एक और CBI केस में आया, जिसमें कपड़ा कंपनी एस कुमार्स (Reid & Taylor ब्रांड की मालिक) पर IDBI बैंक ने ₹1,245.15 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया. उस समय विजय कालनत्री कंपनी के डायरेक्टर थे. आरोप था कि कंपनी ने बैंकों से लिए पैसे फर्जी लेन-देन और फंड की हेराफेरी से इधर-उधर कर दिए. KPMG की एक जांच रिपोर्ट में कई संदिग्ध लेन-देन और गलत तरीके से बकाया पैसे माफ करने की बात कही गई.

संकट में विरासत और नेतृत्व

यह नया मामला विजय कालनत्री के लंबे और विवादों से घिरे करियर पर एक और गहरा साया डाल रहा है. विजय कालनत्री, जो ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज़ (AIAI) के अध्यक्ष और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन हैं, दशकों से भारत के उद्योग, व्यापार और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में एक असरदार शख्सियत रहे हैं. 

अब महाराष्ट्र में फिर से बीजेपी-शिवसेना सरकार के आने के बाद और कुछ नए राजनीतिक और कारोबारी लोगों की नजर MVIRDC (जो WTC को चलाता है) की कीमती संपत्तियों और मैनेजमेंट पर है. ऐसे में कहा जा रहा है कि कालनत्री का इन संस्थाओं पर बना हुआ नियंत्रण खतरे में है. सूत्रों का कहना है कि कम से कम तीन ताकतवर लोग — जिनमें एक MKB से जुड़ा पावर ब्रोकर और एक ग्रुप जो हिन्डेनबर्ग मामले से जुड़ा बताया जा रहा है — इसमें सक्रिय हो गए हैं.

CBI की यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब विजय कालनत्री अपनी बेटी संगीता जैन को AIAI और WTC में अपना उत्तराधिकारी (नेतृत्व संभालने वाली) बनाने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन अब जब संगीता खुद कानूनी मुसीबतों में फंसी हैं, तो सूत्रों का मानना है कि प्रिय पानसरे — जो विजय कालनत्री (जूनियर) की भरोसेमंद सहयोगी हैं — AIAI और MVIRDC में जल्दी ही बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

आगे क्या हो सकता है

अब जब CBI की मुंबई स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो के डीएसपी अरुण भास्कर इस मामले की जांच संभाल चुके हैं और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17-A के तहत जरूरी मंजूरी भी मिल गई है, तो माना जा रहा है कि CBI अब कालनत्री परिवार की भूमिका की गहराई से जांच करेगी.

(लेखक- पलक शाह, "द मार्केट माफिया - क्रॉनिकल ऑफ इंडिया’s हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" किताब के लेखक हैं. पलक शाह पिछले दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसे प्रमुख पिंक पेपरों में काम किया है. वह 19 साल की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग से जुड़े थे, लेकिन कुछ सालों में इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि अपराध की संरचना बदल चुकी थी और वह संगठित गिरोह, जैसा कि मुंबई ने 80 के दशक में देखा था, अब अस्तित्व में नहीं थे.  'व्हाइट मनी' अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को समझने के उनके जुनून ने पलक को वित्त और नियामकों की दुनिया में पहुंचा दिया.)
 


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