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विजय माल्या को बड़ा झटका, ब्रिटेन हाई कोर्ट ने दिवालियापन याचिका पर लगाई मुहर
अदालती फैसले के बाद अब भारतीय बैंकों को माल्या की ब्रिटेन स्थित संपत्तियों पर कानूनी नियंत्रण हासिल करने का रास्ता साफ हो गया है. इससे वे अपनी करोड़ों की रकम की वसूली कर सकेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन में बड़ा कानूनी झटका लगा है. दरअसल, ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भारतीय बैंकों के उस कंसोर्टियम के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिसने माल्या को दिवालिया घोषित करने की याचिका दायर की थी. अदालत ने माल्या द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिससे अब उनके खिलाफ जारी दिवालियापन का आदेश बरकरार रहेगा. यह फैसला न सिर्फ भारतीय बैंकों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि भारत सरकार की ओर से भगोड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ उठाए गए कदमों को भी मजबूती देता है. आइए इस मामले के बारे में विस्तार से जानते हैं.
एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों की जीत
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई में 13 बैंकों के समूह ने इस कानूनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया. यह मामला कई वर्षों से ब्रिटेन की अदालतों में लंबित था और अब अदालत के फैसले के बाद भारतीय बैंकों को माल्या की ब्रिटेन स्थित संपत्तियों की कुर्की और नीलामी कर बकाया कर्ज की वसूली का अधिकार मिल गया है.
माल्या पर गंभीर आरोप, भारत में वॉन्टेड
69 वर्षीय विजय माल्या पर भारत में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं, उन्हें भारतीय एजेंसियों ने "भगोड़ा आर्थिक अपराधी" घोषित किया हुआ है. माल्या देश से फरार होकर 2016 से लंदन में रह रहे हैं. ब्रिटिश हाई कोर्ट के न्यायाधीश एंथनी मान ने बुधवार को सुनवाई करते हुए भारतीय बैंकों के पक्ष में निर्णय दिया. उन्होंने कहा कि बैंकों की दिवालियापन याचिका वैध और सही है. अदालत ने यह भी माना कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भारत में जब्त की गई संपत्तियों से मिलने वाली वसूली सशर्त है, इसलिए ब्रिटेन स्थित संपत्तियों से कर्ज की वसूली की जा सकती है.
क्या है पूरा मामला?
विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस पर भारी कर्ज था, जिसे वह चुका नहीं सके. इस एयरलाइन को बंद हुए कई साल हो चुके हैं. भारतीय बैंकों ने उनकी चूक के खिलाफ लंदन की अदालत में दिवालियापन की याचिका दायर की थी. मकसद यह था कि ब्रिटेन में स्थित माल्या की संपत्तियों को बेचकर अपने पैसे वसूल किए जा सकें. माल्या ने अदालत से इस आदेश को रद्द करने की अपील की थी, लेकिन अब अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी है.
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