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अब इस मामले में फंसे बाबा रामदेव, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश
बाबा रामदेव की कंपनी पंतजलि आयुर्वेद को बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेडमार्क से जुड़े एक अंतरिम आदेश के उल्लंघन के मामले में लाखों रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किलें खत्म होने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं. अब उनकी कंपनी पंतजलि आयुर्वेद को बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेडमार्क से जुड़े उल्लंघन के मामले में लाखों रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है. तो आइए जानते हैं आखिर ये क्या मामला है और पतंजलि को कोर्ट ने कितना जुर्माना भरने का आदेश दिया है?
कोर्ड में जमा करने होंगे 50 लाख रुपये
बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेडमार्क से जुड़े उल्लंघन के मामले में बाबा रामदेव (Baba Ramdev) की कंपनी पंतजलि आयुर्वेद लिमिटेड (Patanjali Ayurved) को 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह आदेश अदालत के अंतरिम आदेश के उल्लंघन के लिए जारी किया है. कोर्ट ने पतंजलि के कपूर से जुड़े प्रोडक्ट को बेचने और उसके विज्ञापन पर रोक लगाई थी. यह रोक मंगलम ऑर्गेनिक लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के बाद लगाई गई थी. कंपनी ने याचिका में दावा किया था कि अदालत के आदेश के बावजूद पंतजलि ने खुद के प्रोडक्ट को बेचा है.
पतंजलि ने की कोर्ट के आदेश की अवहेलना
कोर्ट में जस्टिस रियाज छागला ने पंतजलि के हलफनामे पर गौर करने के बाद पाया कि उसने अदालत के 30 अगस्त 2023 के आदेश की अवहेलना की है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, ऐसे में जस्टिस रियाज ने पंतजलि को कोर्ट में 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश किया. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई 2024 को रखी है.
इससे पहले भी पतंजलि मांग चुका है माफी
इस मामले को लेकर पहले भी पतंजलि के निदेशक रजनीश मिश्रा ने कोर्ट में हलफनामा दायर किया था, जिसमें उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी थी और अदालत के आदेश का पालन करने का आश्वासन दिया था. हलफनामे के मुताबिक, कोर्ट की रोक के बाद 49,57,861 रुपये के कपूर उत्पाद की सप्लाई की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट में भी हलफनामा दायर करने का निर्देश
इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था. इसमें कंपनी को यह बताना होगा कि उत्तराखंड सरकार ने कंपनी के जिन 14 उत्पादों का लाइसेंस निलंबित किया था, उनके विज्ञापन वापस लिए गए या नहीं. उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने 15 अप्रैल को लाइसेंस निलंबित कर दिए थे. हालांकि बाद में इन्हें बहाल कर दिया गया था.
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