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केजरीवाल को मिली राहत कैसे बन गई सीबीआई के चेहरे की शिकन, समझिये पूरा गणित  

सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ जहां दिल्ली शराब नीति घोटाले में केजरीवाल को राहत प्रदान की, वहीं दूसरी तरफ सीबीआई की जमकर क्लास भी लगाई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

दिल्ली के कथित शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 10 लाख के मुचलके पर जमानत दे दी है. हालांकि, दो जजों की पीठ इस मामले में एकराय नहीं है कि सीबीआई द्वारा केजरीवाल को गिरफ्तार करना सही था नहीं? एक तरफ जहां जस्टिस सूर्यकांत ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को सही बताया. वहीं, जस्टिस भूईंया ने केजरीवाल की गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठाए.

पिंजरे में बंद तोता
केजरीवाल की याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने बहुत कुछ ऐसा कहा कि सीबीआई के चेहरे पर शिकन पड़ना लाजमी है. जस्टिस भूइयां ने कहा कि सीबीआई ने केजरीवाल को इसलिए गिरफ्तार किया कि ED के मामले मिली जमानत को विफल किया जा सके.
जस्टिस भूइंया ने यह भी कहा कि सीबीआई को दिखाना होगा कि वह पिंजरे में बंद तोता नहीं है.

धारणा बदलना ज़रूरी
न्यायाधीश भूइयां ने कहा कि किसी भी देश में धारणा मायने रखती है और सीबीआई को पिंजरे में बंद तोता होने वाली धारणा को दूर करना चाहिए. उसे यह दिखाना चाहिए कि वो पिंजरे में बंद तोता नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर सीबीआई इस मामले में अचानक एक्टिव कैसे हो गई? जस्टिस भूइंया ने कहा कि CBI ने मार्च 2023 में केजरीवाल से पूछताछ की गई थी,लेकिन तब उन्हें गिरफ्तार करने की जरूरत महसूस नहीं हुई.

22 महीने बाद एक्टिव
उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अरविंद केजरीवाल को तब गिरफ्तार किया जब ईडी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई. सीबीआई को 22 महीनों तक गिरफ्तारी की जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन फिर अचानक वह एक्टिव हो गई और हिरासत की मांग करने लगी. जस्टिस भूईंया ने कहा कि सीबीआई द्वारा इस तरह की कार्रवाई गिरफ्तारी के समय पर गंभीर सवाल उठाती है. जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी केवल ईडी मामले में दी गई जमानत को विफल करने के लिए की.

शर्तों के साथ मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट की इन तल्ख टिप्पणियों से स्पष्ट है कि इस मामले में सीबीआई की कार्यप्रणाली अदालत को नागवार गुजरी है. ऐसे में सीबीआई को आगे बहुत सोच-समझकर कदम बढ़ाना होगा. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को राहत देते हुए कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं. मसलन, केजरीवाल ना तो सचिवालय जा सकेंगे और ना ही किसी फाइल पर साइन कर पाएंगे. ऐसी ही शर्तें अदालत ने ED मामले में जमानत देते हुए भी लगाई थीं.


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