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इटली की एक कंपनी के खिलाफ अमूल ने खटखटाया दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा, जानिए क्या है पूरा मामला?
सहकारी आंदोलन (Cooperative Movement) के जरिये देश-विदेश में नाम कमाने वाली अमूल को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
ट्रेडमार्क मामले में अमूल (Amul) को इटली की एक कंपनी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत के सबसे बड़े डेयरी ब्रैंड अमूल की नकल करने के मामले में एक इतालवी कंपनी टेरे प्रिमिटिव (Terre Primitive) के खिलाफ फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अमूल में पक्ष में फैसला सुनाते हुए इटली की कंपनी के खिलाफ निषेधाज्ञा आदेश पारित किया है. तो चलिए जानते हैं क्या है ये पूरा मामला?
इतालवी कंपनी ऐसे कर रही थी अमूल की नकल
कोर्ट ने अमूल को एक बड़े सीमा-पार ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले (Cross-border trademark infringement case) में राहत दी है. दरअसल, इतालवी फर्म अमूल के मिलते जुलते नाम 'अमूलेटी' (Amuleti) ट्रेड मार्क के तहत कुकीज और चॉकलेट कवर्ड बिस्कुट बेच रही थी. यह अमूल के प्रसिद्ध ट्रेडमार्क से काफी मिलता-जुलता है, इसलिए इसके खिलाफ अमूल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
अमूल की विदेशों में भी है प्रसिद्धि
बता दें, गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (GCMMF) अमूल (Amul) ब्रैंड नाम के तहत अपने डेयरी प्रोडक्ट्स का विपणन करता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमूल ने अपने वकील अभिषेक सिंह के माध्यम से इतालवी कंपनी के खिलाफ ट्रेडमार्क मुकदमा दायर किया था. उनके वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि अमूल न केवल भारत में एक घरेलू नाम है, बल्कि इसने सीमा-पार प्रतिष्ठा भी हासिल की है. अंतर्राष्ट्रीय फार्म कंप्रीजन नेटवर्क (International Farm Comparison Network) द्वारा 2020 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार अमूल शीर्ष डेयरी संगठन के रूप में दुनिया में 8वें स्थान पर है. उन्होंने कहा कि टेरे प्रिमिटिव ने स्पष्ट रूप से 'अमूल' की नकल की है. इसने अमूल के नाम में बस 'एति' (eti) शब्द जोड़ दिया और अपना ब्रैंड बना लिया. उन्होंने बताया कि इतालवी कंपनी अपने उत्पादों को अपनी वेबसाइट और फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उल्लंघनकारी चिह्न के तहत बढ़ावा दे रही है, जोकि अमूल के कई पंजीकरणों के समान ही वर्ग में आता है, इसलिए इस पर रोक लगाया जाना चाहिए.
हाई कोर्ट ने पारित किया निषेधाज्ञा आदेश
अमूल की ओर से पेश दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने निषेधाज्ञा आदेश पारित किया. इसमें इतालवी फर्म को 'अमूल' के समान किसी भी चिह्न का उपयोग करने या उससे निपटने से रोक दिया गया. अदालत ने इतालवी फर्म को अपनी वेबसाइट से उत्पादों की सूची को तुरंत हटाने का भी निर्देश दिया और मेटा इंक को फेसबुक और इंस्टाग्राम खातों के यूआरएल को ब्लॉक/निलंबित/हटाने का आदेश दिया, जहां इतालवी कंपनी अपने उत्पादों का प्रचार कर रही थी.
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