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दिल्ली HC का बड़ा फैसला, ट्रेडमार्क उल्लंघन के लिए Amazon पर 340 करोड़ रुपये का जुर्माना!
अमेजन पर 340 करोड़ रुपये का जुर्माना इस बात का संकेत है कि अब कंपनियों को अपने व्यापारिक व्यवहार में उच्चतम स्तर की जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखनी होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में अमेजन की भारतीय यूनिट पर 340 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना 'बेवर्ली हिल्स पोलो क्लब' (BHPC) ट्रेडमार्क नियमों के उल्लंघन के मामले में लगाया गया है. अमेजन की भारतीय शॉपिंग वेबसाइट पर इसी ब्रैंड के नाम से नकली कपड़े बेचे जा रहे थे, जिसके खिलाफ यह मामला दायर किया गया था. इस फैसले को भारत में ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले कभी किसी अमेरिकी कंपनी पर इतनी बड़ी रकम का जुर्माना नहीं लगा है. तो आइए जानते हैं ये पूरा मामला क्या है?
इसलिए लगा कंपनी पर जुर्माना
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, अमेजन पर यह जुर्माना 'बेवर्ली हिल्स पोलो क्लब' के ट्रेडमार्क के उल्लंघन के लिए लगाया गया. 'बेवर्ली हिल्स पोलो क्लब' का मालिकाना हक रखने वाली लाइफस्टाइल इक्विटीज, ने अमेजन पर आरोप लगाया था कि अमेजन की भारतीय वेबसाइट पर उनके ट्रेडमार्क के समान दिखने वाले कपड़े कम कीमत पर बेचे जा रहे थे, जो कि उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे थे. कोर्ट ने दोनों लोगो की तुलना की और यह पाया कि दोनों के बीच काफी समानताएँ थीं, जिससे यह साबित हुआ कि अमेजन ने ट्रेडमार्क का उल्लंघन किया.
अदालत का ऐतिहासिक आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने 85 पन्नों के आदेश में कहा, "जिस लोगो का इस्तेमाल किया गया है, उसे अलग करना मुश्किल है." अदालत ने दोनों लोगो की तुलना करते हुए टी-शर्ट की तस्वीरें भी शामिल कीं, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कैसे अमेजन के द्वारा बेचे जा रहे उत्पाद 'बेवर्ली हिल्स पोलो क्लब' के ट्रेडमार्क के समान थे. यह फैसला भारत में ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामलों में सबसे बड़ी राशि के जुर्माने के रूप में माना जा रहा है.
ट्रेडमार्क उल्लंघन पर सबसे बड़ा जुर्माना
यह फैसला न केवल एक ऐतिहासिक मुकदमा है, बल्कि यह भारत में ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामलों में अब तक की सबसे बड़ी क्षतिपूर्ति राशि भी है. भारतीय वकील आदित्य गुप्ता ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "यह भारत में ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे में अब तक की सबसे बड़ी क्षतिपूर्ति राशि है. अब यह देखना होगा कि अमेरिकी अदालतें इस भारतीय फैसले को कैसे लागू करती हैं." वहीं, अमेजन ने इस फैसले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. कंपनी की भारतीय इकाई ने किसी भी प्रकार की गलती से इनकार किया है. गौरतलब है कि इससे पहले 2019 में लंदन में भी लाइफस्टाइल इक्विटीज ने अमेजन पर इसी तरह के आरोप लगाए थे. पिछले साल, अमेजन ने एक फैसले के खिलाफ अपील की थी जिसमें यह कहा गया था कि उसने अपनी अमेरिकी वेबसाइट पर ब्रिटिश उपभोक्ताओं को लक्षित करके ब्रिटेन के ट्रेडमार्क का उल्लंघन किया था, और उस मामले में भी उसे हार का सामना करना पड़ा था.
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