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AI और बॉट्स से 734 करोड़ की हेराफेरी! WinZo पर ED का बड़ा एक्शन, कंपनी और प्रमोटर्स पर चार्जशीट
करोड़ों यूजर्स से जुड़े इस घोटाले ने ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया के उस अंधेरे पहलू को उजागर कर दिया है, जहां तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ठगी के हथियार के रूप में किया जा रहा था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री की चमक-धमक के पीछे छिपे काले सच पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है. देश के चर्चित गेमिंग प्लेटफॉर्म WinZo और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ ईडी ने 734 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है. आरोप है कि कंपनी ने बॉट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गेम के नतीजों में हेराफेर कर करोड़ों यूजर्स को चूना लगाया.
PMLA कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट
ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 23 जनवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत नामित अदालत में यह चार्जशीट दाखिल की. एजेंसी के मुताबिक, WinZo ने अपने प्लेटफॉर्म पर चल रहे गेम्स के एल्गोरिदम में जानबूझकर छेड़छाड़ की ताकि यूजर्स को लगातार नुकसान हो और कंपनी को गैरकानूनी फायदा मिले.
इन लोगों और कंपनियों पर गिरी गाज
चार्जशीट में WinZo प्राइवेट लिमिटेड, इसके डायरेक्टर पवन नंदा और सौम्या सिंह राठौर को आरोपी बनाया गया है. इसके अलावा कंपनी की विदेशी सब्सिडियरी कंपनियां WinZo US Inc, WinZo SG Pvt Ltd और ZO Pvt Ltd को भी इस केस में नामजद किया गया है.
100 से ज्यादा गेम, 25 करोड़ यूजर्स का दावा
ईडी के अनुसार, WinZo अपने मोबाइल ऐप के जरिए 100 से अधिक गेम ऑपरेट करता था और दावा किया जाता था कि इसके करीब 25 करोड़ यूजर्स थे, जिनमें बड़ी संख्या छोटे शहरों के लोगों की थी. कंपनी खुद को सुरक्षित, पारदर्शी और बॉट-फ्री प्लेटफॉर्म बताती थी, लेकिन जांच में इसकी हकीकत कुछ और ही निकली.
कैसे की गई हेराफेरी?
सरकार ने अगस्त 2025 में भारत में रियल मनी गेमिंग ऐप्स पर बैन लगाया था. जांच एजेंसी के मुताबिक, WinZo यूजर्स से दांव पर लगाई गई रकम का एक हिस्सा कमीशन के तौर पर वसूलता था. लेकिन दिसंबर 2023 तक कंपनी के कई गेम्स में बॉट्स, AI और खास एल्गोरिदमिक प्रोफाइल पहले से एम्बेड किए जा चुके थे, जिससे आम यूजर की जीत की संभावना लगभग खत्म हो जाती थी.
विदेशों के जरिए हुआ मनी लॉन्ड्रिंग का खेल
चार्जशीट में यह भी आरोप है कि इस धोखाधड़ी से कमाई गई रकम को अमेरिका और सिंगापुर में बनाई गई फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई. ईडी पहले ही WinZo और इसके प्रमोटर्स के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. इस मामले में पवन नंदा और सौम्या राठौर को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि राठौर फिलहाल जमानत पर बाहर हैं.
ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर बढ़ी सख्ती
इस पूरे मामले ने देश में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस सेक्टर पर सरकार और जांच एजेंसियों की नजर और कड़ी हो सकती है.
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