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कैसे करें वर्क-लाइफ बैलेंस को रिस्ट्रक्चर, BW इवेंट में एक्सपर्ट ने रखी अपनी ये राय
वर्क-लाइफ बैलेंस को रिस्ट्रक्चर करना आज के दौर में बहुत जरूरी है. भागदौड़ भरी इस जिंदगी में सबसे ज्यादा लोगों को इसी बात की दिक्कत होती है कि वो काम के चलते अपने परिवार को समय नहीं दे पाते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः वर्क-लाइफ बैलेंस को रिस्ट्रक्चर करना आज के दौर में बहुत जरूरी है. भागदौड़ भरी इस जिंदगी में सबसे ज्यादा लोगों को इसी बात की दिक्कत होती है कि वो काम के चलते अपने परिवार को समय नहीं दे पाते हैं. इसको कैसे सही किया जाए इस बारे में BW Happiest World Summit and Awards में एक्सपर्ट ने अपनी राय एक सेशन में रखी.
सोनू वाडेवाला सीनियर एचआर एक्सिस सिक्युरिटीज लिमिटेड, प्रद्युमन पांडे, सीएचआरओ मदर डेयरी फूड्स एंड वेजिटेबल्स, सुभादीप खान, सीएचआरओ बाल्को और आशीष कपूर डायरेक्टर और सीनियर एचआरएम, अर्नेस्ट एंड यंग ने सेशन की अध्यक्षता करते हुए इस बात की चर्चा करते हुए कहा कि कैसे वर्क लाइफ बैलेंस को रिस्ट्रक्चर किया जा सकता है. चर्चा की शुरुआत करते हुए सोनू वाडेवाला ने कहा कि यह एक समस्या है जो सभी तरह की इंडस्ट्री में देखी जा रही है. वर्क लाइफ का जो बैलेंस नहीं है वो एक बीमारी का लक्षण है. बीमारी है मैनेजमेंट का रवैया और कंपनियों के काम करने का तरीका. आज के समय में जब सब कुछ हाईब्रिड हो चुका है तो ऐसे में कर्मचारी ऑफिस आकर के काम नहीं करना चाहते हैं.
अब वो समय नहीं है कि कंपनियां एक निश्चित समय पर कर्मचारियों को बुलाएं और एक निश्चित समय तक काम करने के बाद छोड़ें. अब कंपनियों को अपने काम करने के तरीकों में परिवर्तन लेकर के आना होगा. इसमें लीडरशिप का भी रोल अहम है.
काम पर आने पर होना चाहिए कर्मचारियों को खुशी
इस बारे में आगे अपने विचार रखते हुए प्रद्युमन पांडेय ने कहा कि जब कोई व्यक्ति काम पर ऑफिस या फिर फैक्ट्री में आए तो वो खुश होकर के आना चाहिए. वर्क लाइफ बैलेंस की शुरुआत यही से होती है. अगर कर्मचारी काम पर आते वक्त खुश नहीं है तो फिर वर्क लाइफ बैलेंस की बात करना बेमानी है. इससे आदमी अपने कार्य का 100 फीसदी से ज्यादा काम कर सकेगा. इसके साथ ही अब हमें ऐसा भी सोचना होगा कि व्यक्ति काम से जाने के बाद भी खुश होकर के जाए कि आज हमने अच्छा काम किया है. ये ही मेरे लिए वर्क लाइफ बैलेंस है. इसके साथ ही लीडरशिप को भी कर्मचारियों को समय समय पर उत्साहवर्धन करते रहना चाहिए, क्योंकि इसका भी किसी व्यक्ति के वर्क लाइफ बैलेंस पर काफी असर पड़ता है.
वर्क लाइफ बैलेंस पर जगह के हिसाब से बदलना होगा दृष्टिकोण
चर्चा में वर्चुअल तरीके से भाग लेते हुए सुभादीप खान, सीएचआरओ बाल्को ने कहा कि हमें वर्क लाइफ बैलेंस के बारे में एक व्यापक दृष्टिकोण से सोचना होगा. हम मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में काम करते हैं और यहां पर 24 घंटे काम चलता है. जिस इंडस्ट्री में हम है वो महानगरों में नहीं है बल्कि एक रिमोट लोकेशन पर है. इसलिए हमें जगह के हिसाब से वर्क लाइफ बैलेंस पर बात करनी होगी. हमारे यहां पर कर्मचारियों को समय पर आना होता है और समय पर जाना होता है, इसलिए यहां पर वर्क लाइफ बैलेंस को काम के साथ ही इंटीग्रेट किया गया है.
अगर किसी कर्मचारी को काम के बीच अपने बच्चों को स्कूल से लेकर के आना है और वो इसमें अपनी खुशी देखता है तो उसका हमारी कंपनी स्वागत करती है. ऐसा ही अप्रोच हर कंपनी को अपने कर्मचारियों के प्रति दिखाना होगा, कि अगर उनको काम के घंटों के बीच अपना कुछ निजी काम करना है तो वो करके आ सकते हैं.
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