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परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाओं को नियमित रोजगार में 4.4% ज्यादा मौके: SBI रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित वेतन वाली नौकरियों में काम करने वाली महिलाओं को नौकरी की सुरक्षा, लिखित अनुबंध, पेड लीव और सोशल सिक्योरिटी जैसे लाभ मिलने की संभावना अधिक रहती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

देश में महिलाओं की रोजगार स्थिति को लेकर आई SBI Research की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, जो महिलाएं अपने परिवार की मुखिया होती हैं, उनके नियमित वेतन वाली नौकरी में होने की संभावना अन्य महिलाओं की तुलना में 4.4 प्रतिशत ज्यादा होती है.

यह अध्ययन पहली बार भारत के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के यूनिट-लेवल डेटा के आधार पर किया गया है. रिपोर्ट बताती है कि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाएं अधिक स्थिर और सुरक्षित रोजगार की ओर बढ़ रही हैं.

नियमित नौकरी में बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं

रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित वेतन वाली नौकरियों में काम करने वाली महिलाओं को नौकरी की सुरक्षा, लिखित अनुबंध, पेड लीव और सोशल सिक्योरिटी जैसे लाभ मिलने की संभावना अधिक रहती है.

शोधकर्ताओं ने इसके लिए वर्क क्वालिटी इंडेक्स (WQI) तैयार किया, जिसमें तीन मुख्य पहलुओं को शामिल किया गया.

1. लिखित जॉब कॉन्ट्रैक्ट
2. पेड लीव की सुविधा
3. सोशल सिक्योरिटी लाभ

जिस कर्मचारी का WQI ज्यादा होता है, उसकी नौकरी को बेहतर गुणवत्ता वाली नौकरी माना गया है.

महिलाओं के लिए अब भी चुनौतीपूर्ण है रोजगार बाजार

हालांकि रिपोर्ट में महिला मुखियाओं की स्थिति बेहतर बताई गई है, लेकिन कुल मिलाकर महिलाओं के लिए रोजगार की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, महिला कर्मचारियों के अनौपचारिक रोजगार (Informal Jobs) में होने की संभावना पुरुषों की तुलना में 4.8 प्रतिशत अधिक है. ऐसे रोजगार में न तो लिखित अनुबंध होता है और न ही पेड लीव या सोशल सिक्योरिटी की सुविधा मिलती है.

भारत में करीब 80 से 90 प्रतिशत कार्यबल अब भी अनौपचारिक रोजगार क्षेत्र में काम कर रहा है, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है.

राज्यों के बीच रोजगार गुणवत्ता में बड़ा अंतर

SBI की रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों की रोजगार गुणवत्ता और श्रम भागीदारी दर की भी तुलना की गई है.

बेहतर प्रदर्शन वाले राज्य

कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों में रोजगार भागीदारी और नौकरी की गुणवत्ता दोनों बेहतर पाई गईं.

कमजोर स्थिति वाले राज्य

उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब में रोजगार भागीदारी और नौकरी की गुणवत्ता दोनों कम दर्ज की गईं.

ज्यादा काम लेकिन कम गुणवत्ता

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, लेकिन वहां नौकरी की गुणवत्ता कमजोर है. इसका मतलब है कि रोजगार तो मिल रहा है, लेकिन उसमें सुरक्षा और सुविधाओं की कमी है.

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा अनौपचारिक रोजगार

रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में अनौपचारिक रोजगार की स्थिति ज्यादा गंभीर है. करीब 59 प्रतिशत अनौपचारिक कर्मचारी ग्रामीण इलाकों में काम करते हैं, जबकि 41 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में हैं. कृषि क्षेत्र अकेले 42 प्रतिशत अनौपचारिक रोजगार का हिस्सा है.

इसके अलावा ट्रेड, होटल और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोग बिना सुरक्षा वाले रोजगार में काम कर रहे हैं.

न्यूनतम वेतन से कम कमाई कर रहे लाखों कर्मचारी

रिपोर्ट में मजदूरी को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है. अध्ययन के अनुसार, भारत में करीब 25 प्रतिशत अस्थायी कर्मचारी न्यूनतम वेतन से कम कमाई कर रहे हैं. छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में सबसे ज्यादा कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन पा रहे हैं. महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी लगभग एक-तिहाई अस्थायी कर्मचारी कम भुगतान का सामना कर रहे हैं.

महिलाएं कुल अंडरपेड कर्मचारियों में लगभग 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं, जबकि अस्थायी कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी केवल 25 प्रतिशत है. यह वेतन असमानता की गंभीर तस्वीर पेश करता है.

ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट से बदल सकती है तस्वीर

रिपोर्ट में स्किल ट्रेनिंग को रोजगार सुधार का बड़ा माध्यम बताया गया है. जिन कर्मचारियों ने किसी प्रकार की ट्रेनिंग ली है, उनके अनौपचारिक रोजगार में रहने की संभावना 4.8 प्रतिशत तक कम हो जाती है.

महिलाओं के मामले में सरकारी फंडिंग वाली ट्रेनिंग से स्वरोजगार की संभावना 5.8 प्रतिशत बढ़ती है, जबकि खुद के खर्च पर ली गई ट्रेनिंग से नियमित नौकरी मिलने की संभावना 3 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

रोजगार सुधार के लिए सख्त कदम जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं की बेहतर रोजगार भागीदारी के लिए स्किल डेवलपमेंट, औपचारिक रोजगार और सोशल सिक्योरिटी को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही न्यूनतम वेतन कानून का सख्ती से पालन कराने और अनौपचारिक रोजगार को कम करने के लिए बड़े श्रम सुधारों की आवश्यकता बताई गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं को बेहतर ट्रेनिंग, रोजगार सुरक्षा और वित्तीय अवसर मिलें, तो उनकी आय और नौकरी की गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार हो सकता है.
 


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