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नेविल टाटा की एंट्री से टाटा ट्रस्ट्स में नई पीढ़ी की शुरुआत, भास्कर भट्ट को भी सौंपी जिम्मेदारी

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए नोएल टाटा के बेटे नेविल और टाटा वेटरन भास्कर भट्ट को तीन साल की जिम्मेदारी सौंपी हई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

टाटा समूह की धुरी माने जाने वाले सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाया है. ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा और समूह के अनुभवी नेता भास्कर भट्ट को तीन साल की अवधि के लिए नया ट्रस्टी नियुक्त किया गया है. यह फैसला न केवल टाटा समूह में नई पीढ़ी की एंट्री का संकेत देता है, बल्कि नोएल टाटा के प्रभाव के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है.

कौन हैं नेविल टाटा, नई पीढ़ी का चेहरा

32 वर्षीय नेविल टाटा इस समय Trent Hypermarket के बिजनेस हेड हैं और पहले से ही कई टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड में ट्रस्टी की भूमिका निभा रहे हैं. उन्हें समूह के भविष्य के नेतृत्व की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है. जानकारों का कहना है कि यह नियुक्ति रतन टाटा के उस पुराने विजन की झलक है, जिसमें उन्होंने अगली पीढ़ी को ट्रस्ट्स की कमान सौंपने की बात कही थी.

तीन साल का कार्यकाल क्यों

हाल ही में टाटा ट्रस्ट्स ने ट्रस्टी के लिए आजीवन कार्यकाल (लाइफटाइम टेन्योर) का नियम बनाया था, लेकिन इसके बावजूद नेविल टाटा और भास्कर भट्ट को केवल तीन साल का कार्यकाल मिला है. दरअसल, महाराष्ट्र सरकार के एक हालिया अध्यादेश के तहत ट्रस्टी का कार्यकाल अब अधिकतम पांच साल तक सीमित कर दिया गया है. इसी वजह से ट्रस्ट ने यह नियुक्ति तीन साल के लिए तय की है. इसी नीति के तहत उद्योगपति वेनू श्रीनिवासन को भी तीन साल की अवधि के लिए ट्रस्टी और वाइस चेयरमैन नियुक्त किया गया है.

कैसे हुई नियुक्ति की प्रक्रिया

नेविल टाटा का नाम वकील दरियस खंबाटा ने प्रस्तावित किया, जिसे सभी ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी. वहीं, भास्कर भट्ट का नाम वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने रखा, जिसे प्रमीत झावेरी सहित सभी सदस्यों ने समर्थन दिया. दोनों की नियुक्तियां 12 नवंबर 2025 से प्रभावी होंगी. दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला नोएल टाटा के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले लिया गया. सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में नेविल को सर रतन टाटा ट्रस्ट में भी ट्रस्टी बनाया जा सकता है.

ट्रस्ट के स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने अपनी कार्यकारी समिति (Executive Committee) को भंग कर दिया है. अब टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा सीधे चेयरमैन को रिपोर्ट करेंगे.
फिलहाल, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 28% हिस्सेदारी है, जबकि सर रतन टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी लगभग 24% है.

मतभेद और सरकारी दखल

रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट के भीतर मतभेदों का दौर तेज हुआ. सितंबर में पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने विजय सिंह की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया था, जिसके बाद नोएल टाटा ने भी मेहली मिस्त्री के टाटा संस बोर्ड में नामांकन पर आपत्ति जताई. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि गृहमंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दखल देना पड़ा. उन्होंने दोनों पक्षों से मुलाकात कर स्थिरता बनाए रखने की सलाह दी.

RBI का दबाव और टाटा संस की लिस्टिंग

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस को 30 सितंबर 2025 तक स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने का निर्देश दिया है. जहां टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग को टालने के पक्ष में हैं, वहीं शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप, जिसके पास टाटा संस में करीब 18% हिस्सेदारी है, लिस्टिंग की मांग पर अड़ा हुआ है. ऐसे में नेविल टाटा और भास्कर भट्ट की नियुक्ति समूह की रणनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है.


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