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क्या कर्ज में डूबी शिवराज सरकार की आर्थिक नब्ज दबाएगी नई शराब नीति?

मध्य प्रदेश सरकार ने नई शराब नीति लागू कर दी है. इसके तहत प्रदेश के सभी अहाते बंद कर दिए गए हैं. जिससे शराब कारोबारियों को तो नुकसान होगा ही सरकार को भी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

नीरज नैयर 3 years ago

मध्य प्रदेश में नई शराब नीति एक अप्रैल से लागू हो गई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस नई नीति के जरिए राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है. दरअसल, राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, मध्य प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मुहिम चलाए हुए थीं, ऐसे में शिवराज सिंह ने अहाते बंद करने का फैसला लेकर उन्हें खुश करने का प्रयास किया है. हालांकि, उनके इस ‘प्रयास’ से शराब कारोबारी नाराज हैं. उनका कहना है कि इससे सरकार के राजस्व का नुकसान तो होगा कि उनकी कमाई भी काफी कम हो जाएगी. 

क्या थी पुरानी व्यवस्था?
प्रदेश में 3 हजार से आसपास अहाते थे, जिन पर अब ताला लग चुका है. इन अहतों में तमाम कर्मचारी भी काम करते थे, जो पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं. आहते एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसके तहत शराब के ठेकेदार को लोगों के बैठकर पीने का इंतजाम भी करना होता था. यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी, ताकि लोग सार्वजनिक स्थानों या वाहनों में शराब पीने से बचें. अहाते को एक तरह से सस्ता बार कहा जा सकता है, जहां मुफीद दाम में फूड आइटम्स मिलते थे, सर्व करने के लिए वेटर भी होते थे. इन अहातों से बड़े पैमाने पर लोगों की रोजी-रोटी चल रही थी, जिस पर अब रोक लग गई है.

500 करोड़ का नुकसान?
BW हिंदी से बात करते हुए मध्य प्रदेश लिकर एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश राय ने कहा कि किसी एक को खुश करने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर शराब कारोबारियों को नुकसान पहुंचाया है. अहाते बंद करने से केवल शराब की बिक्री ही कम नहीं हुई है, बल्कि उससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने दावा किया कि अहाते बंद होने से अकेले सरकार को करीब 500 करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा. नई शराब नीति राज्य सरकार से लेकर कारोबारियों तक सबके लिए नुकसानदेह है.

ऐसे होती थी ज्यादा बिक्री
अहातों का शराब की ज्यादा बिक्री से संबंध समझाते हुए अखिलेश राय ने कहा कि जब व्यक्ति शराब खरीदकर ले जाता है, तो वो सीमित मात्रा में खरीदारी करता है. इसके उलट जब वह अहाते या बार आदि में बैठकर पीता है, तो उसके ज्यादा पीने की संभावना बढ़ जाती है. अहाते की व्यवस्था सबके लिए अच्छी थी. सरकार को ज्यादा रिवेन्यु मिल रहा था, कारोबारियों की ज्यादा सेल हो रही थी, कई लोगों को रोजगार मिल गया था, कानून व्यवस्था की समस्या भी खड़ी नहीं होती थी, लेकिन सरकार ने किसी एक को खुश करने के लिए सबकुछ चौपट कर दिया. 

करीब 30% कारोबार प्रभावित
शराब कारोबारियों का आकलन है कि अहाते बंद होने से उनके व्यापार में करीब 30% की गिरावट आएगी. होशंगाबाद रोड स्थित लिकर शॉप सहित कई कारोबारियों ने कहा कि सरकार की नई नीति से उन्हें बड़ा नुकसान उठाना होगा. नीति के लागू होने के साथ ही बिक्री पर इसका नकारात्मक असर नजर आने लगा है. पहले जब अहाते फुल रहते थे, तो बिक्री अपने आप बढ़ जाती है, लेकिन अब लोग बेहद सीमित मात्रा में ही शराब खरीद रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को लगता है कि अहाते बंद करने से शराब पीने वाले कम हो जाएंगे, जो पूरी तरह गलत है. शराब पीने वालों की संख्या नहीं घटेगी, बस उसकी खपत कम हो जाएगी. गौरतलब है कि अहाते का भी अलग से लाइसेंस लेना होता था, जिसकी फीस से सरकार की अतिरिक्त कमाई होती थी.

भाजपा ने दिया ये तर्क
हालांकि, सत्ताधारी भाजपा आर्थिक नुकसान के दावे से इत्तेफाक नहीं रखती. पार्टी प्रवक्ता डॉक्टर हितेश बाजपेई का कहना है कि अभी ये कहना कि सरकार को इस फैसले से आर्थिक नुकसान होगा जल्दबाजी होगी. नई नीति एक अप्रैल से लागू हुई है, ऐसे में पूरी तस्वीर साफ होने में कुछ महीने लगेंगे. उन्होंने अहाते बंद करने को जल्दबाजी में लिया फैसला मानने से इनकार करते हुए कहा कि अहाते असामाजिक गतिविधियों का अड्डा बन गए थे, लिहाजा सरकार ने सोच-समझकर और समाज के हित में यह फैसला लिया है. बाजपेई ने यह भी कहा कि अहाते बंद होने से बड़े पैमाने पर रोजगार के आंकड़े प्रभावित हुए हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है.    

कांग्रेस ने उठाया सवाल
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने सरकार के इस फैसले को पॉलिटिकल स्टंट करार दिया है. उनका कहना है कि यदि शिवराज सरकार वास्तव में शराब के सेवन को हतोत्साहित करना चाहती थी, तो इतने साल इंतजार क्यों किया. चुनावी साल में ही इसकी याद क्यों आई? उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस का वचनपत्र तैयार किया जा रहा है, उसमें पार्टी इस मुद्दे पर अपनी नीति स्पष्ट करेगी. हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि पूर्ण शराबबंदी कोई हल नहीं है.

MP में क्यों महंगी है बीयर?
मध्य प्रदेश में बीयर कुछ अन्य राज्यों की तुलना में काफी महंगी है, ऐसा क्यों? इस सवाल के जवाब में अखिलेश राय ने बताया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में एक भी नई बीयर प्रोडक्शन यूनिट का लाइसेंस नहीं दिया गया, जबकि खपत में पिछले 15 सालों में काफी इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा, ‘जब बाजार में नए प्लेयर ही नहीं आएंगे, तो प्रतियोगिता नहीं बढ़ेगी और जब प्रतियोगिता नहीं बढ़ेगी तो बीयर के दाम भी कम नहीं होंगे. सरकार को नए लाइसेंस जारी करने चाहिए’. मध्यप्रदेश आबकारी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, प्रदेश में 8 बीयर प्लांट के लाइसेंस दिए गए हैं. जिनके द्वारा 2016-17 में बीयर का उत्पादन 1079.91 लाख बल्क लीटर रहा था और 2021-22 में 1348.61 लाख बल्क लीटर था.  

शराब से कमाई और सरकार पर कुल कर्ज
किसी भी राज्य की कमाई में शराब का बहुत बड़ा योगदान होता है. यही वजह थी कि कोरोना महामारी के दौरान जब सभी कुछ बंद था, शराब की दुकानों को खोलने की इजाजत दी गई थी. मध्य प्रदेश की आय में भी शराब का अच्छा खासा योगदान है. एक रिपोर्ट बताती है कि 2018-19 में सरकार ने शराब बेचकर 9,507 करोड़ की कमाई की थी. 2019-20 में यह आंकड़ा बढ़कर 10,773 करोड़ हो गया. इसी तरह, 2020-21 में सरकार ने शराब से 9,520 करोड़, 2021-22 में 10,380 करोड़ और 2022-23 में नवंबर तक 12,800 करोड़ कमा लिए थे. बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार पर कर्ज का भारी बोझ है. एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सरकार पर तीन लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है. पिछले साल अक्टूबर में शिवराज सिंह सरकार ने 2 हजार करोड़ रुपए का लोन भी लिया था. ऐसे में यदि अहाते बंद करने से राजस्व नुकसान का दावा सही है, तो सरकार को ये फैसला काफी भारी पड़ सकता है.

फैसले का सियासी मतलब समझिए
शिवराज सरकार को एकदम से अहाते बुरे क्यों लगने लगे, इसके पीछे पूरा सियासी समीकरण छिपा है. पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती मध्य प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग पर अड़ी हुईं थीं. वह लगातार आंदोलन-प्रदर्शन कर रही थीं और उन्हें महिलाओं का भरपूर समर्थन मिल रहा था. ऐसे में शिवराज सिंह चौहान को कुछ न कुछ तो करना था. पूर्ण शराबबंदी सरकार की आर्थिक कमर तोड़ देती, इसलिए उन्होंने अहातों पर ताला लगा दिया. इससे उमा भारती भी खुश हो गईं और महिलाओं को भी यह संदेश चला गया कि CM उनकी परेशानियों को समझते हैं. शराब पर राजनीति से नीतीश कुमार को काफी फायदा मिला था. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने शराबबंदी का वादा किया था. जिसका असर ये हुआ कि चुनाव में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 60% के करीब हो गया. शिवराज सिंह को भी कुछ ऐसी ही आस होगी.

अभी कितनी हैं दुकानें?
मध्य प्रदेश में शराब की कम्पोजिट दुकानों की संख्या 3605 है. कम्पोजिट दुकानें वह होती हैं, जहां देशी और विदेशी दोनों तरह की शराब मिलती है. राज्य में कुल 358 बार हैं. जबकि कुल बॉलिंग यूनिट्स की संख्या 46 है. शिवराज सरकार ने 2010 से शराब की कोई नई दुकान नहीं खोली है.


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