✕

होम / बिजनेस / भारत के उभरते एविएशन बाजार में क्‍यों डूब जाती हैं कई कंपनियां? 

भारत के उभरते एविएशन बाजार में क्‍यों डूब जाती हैं कई कंपनियां? 

पिछले एक दशक में भारत के एविएशन सेक्‍टर के इतिहास पर अगर नजर डालें तो समझ में आता है कि इस बाजार में नए-नए प्‍लेयर तो सामने बहुत से आए हैं लेकिन आगे चलकर वो सर्वाइव नहीं कर पाए हैं.

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

भारत के मध्‍यम वर्ग के हवाई सफर की आकांक्षाओं के अनुरूप पिछले कुछ वर्षों में एयरलाइन इंडस्‍ट्री में काफी ग्रोथ देखने को मिली है. कई कंपनियों ने बड़ी मात्रा में पैसा विमानों की खरीद में लगाया है इसी निवेश ने आज भारत के इस बाजार को दुनिया के बाजार के साथ प्रतिस्‍पर्धा में ला दिया है. हालांकि इस इंडस्‍ट्री को भी बाकी उद्योगों की तरह महामारी के दौरान बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन फिर भी इसमें आज नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और कंपनियों के खराब प्रदर्शन भी सामने आ रहे हैं. गो, एयरलाइंस कुकी-टू-क्लॉथिंग मैग्नेट नुस्ली वाडिया के समूह द्वारा संचालित, एक अरबपति के स्वामित्व वाली तीसरी हाई-प्रोफाइल एयरलाइन कंपनी है, जिसने अब उड़ान भरना बंद कर दिया है. आज हम आपको उन कारणों को बताने जा रहे हैं जिसने देश के इस सेक्‍टर को सबसे तेजी से उभरते लेकिन ऑपरेटरों के लिए सबसे कठिन सेक्‍टर बना दिया है. 

आखिर गो एयरलाइन के संकट की क्‍या रही वजह 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दरअसल गो एयरलाइन एक ऐसी विमान कंपनी के रूप में सामने आई है जिसने शुरुआती दिनों से काफी संघर्ष देखा है. इस कंपनी को पहले इंडिगो से प्रतिस्‍पर्धा का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए आज ये आधे से ज्‍यादा बाजार में हिस्‍सेदारी रखता है. कंपनी को कोविड का सामना करना पड़ा जिसमें उसे कर्मचारियों की सैलरी, हवाई अड्डे का किराया, और वेतन का भुगतान करने के लिए भारी उधार लेना पड़ा. ये भी सबकुछ तब हुआ जब विमान नहीं चल रहे थे. कंपनी को पिछले साल 36 बिलियन रुपये (440 मिलियन डॉलर) की शुरुआती शेयर बिक्री में देरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा था, जबकि इसके कई विमान अभी भी निष्क्रिय थे और अब 114.6 बिलियन रुपये (1.4 बिलियन डॉलर) की देनदारियों के साथ लगातार लेनदार कंपनी की चूक को घूर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर अदालत ने इस कंपनी को विमान किराए पर देने पर वाली एक कंपनी जो अपने विमान वापस चाहती है उस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. 

इससे पहले किन-किन कंपनियों का डूबा साम्राज्‍य 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गो एयरलाइन इस सेक्‍टर की कोई पहली कंपनी नहीं है जिसका कामकाज ठप हो गया हो. इससे पहले कर्ज न चुकाने को लेकर भगोड़े बीयर व्यवसायी विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस ने 2012 में बैंकों, कर्मचारियों, पट्टेदारों और हवाईअड्डों का बकाया चुकाने में विफल रहने के बाद अपना ऑपरेशन बंद कर दिया था. ट्रैवल एजेंट से अरबपति बने नरेश गोयल की जेट एयरवेज इंडिया लिमिटेड का भी यही हाल हुआ. कंपनी ने 2019 में दिवालिएपन में प्रवेश करने के बाद से उड़ान नहीं भरी है. सिर्फ बड़े ही नहीं छोटे प्‍लेयरों का भी यही हाल हुआ, जिसमें एयर कोस्टा भी शामिल है. इस कंपनी ने 2014 में एविएशन की दुनिया को 2.9 बिलियन डॉलर के 50 विमानों का ऑर्डर देकर चौंका दिया था. लेकिन उसके बाद  2017 में कंपनी बंद हो गई. 

इस कंपनियों की असफलता की क्‍या है वजह?
 मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय एयरलाइनों के बंद होने के कारण अलग-अलग हैं, लेकिन इसकी प्रमुख वजहों में गंदगी-सस्ते किराए, ईंधन पर उच्च कर और गलाकाट प्रतियोगिता जैसे कारण जिम्‍मेदार हैं, जो हाल ही के दिनों में कोविड के कारण और कठिन हो गए हैं. अगर भारत में एयरलाइन के दाम और दुनिया में एयरलाइन टिकटों के दामों में तुलना करें तो वो भी अपने आप में बड़ी वजह के रूप में सामने आती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार Booking.com पर रविवार को नई दिल्ली से मुंबई की 90-मिनट की उड़ान के लिए एक-तरफ़ा टिकट की कीमत 79 डॉलर में की गई, जबकि न्यूयॉर्क से अटलांटा के लिए समान-दूरी की उड़ान के लिए 199 डॉलर चार्ज किए जा रहे थे. 
कुछ भारतीय राज्य जेट ईंधन पर 30% तक स्‍टेट टैक्‍स  लगाते हैं. यह एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ी लागत है. यही नहीं इंडिगो जैसे बड़े खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वियों का मुकाबला करने के लिए सस्‍ते किराए की पेशकश करते हैं. इसके अलावा, भारतीय रुपया 2019 की शुरुआत से डॉलर के मुकाबले लगभग 20% गिर गया है, जिससे विदेशों से विमानों को पट्टे पर लेने की लागत बढ़ गई है.

क्या सरकार मदद करती है?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार की भूमिका को अगर देखें तो वो एयरलाइनों को सीधे समर्थन देने से कतराती रही हैं. दरअसल, सरकार ने कभी-कभी वाहकों को किराए में और कटौती करने के लिए प्रेरित किया है. जबकि पिछली सरकार ने विदेशी एयरलाइनों को देश की एविएशन कंपनियों में निवेश करने की अनुमति दी और राज्यों से करों को कम करने का आग्रह किया.
जबकि वहीं इस इंडस्‍ट्री को लेकर मौजूदा सरकार के रवैये को देखें तो नरेंद्र मोदी की सरकार ने महामारी के दौरान क्रेडिट लाइन की पेशकश तो की, लेकिन एकमुश्त बेलआउट की कमी को पूरा किया. यही नहीं मोदी सरकार ने पिछले साल टाटा समूह को भारी नुकसान वाले एयर इंडिया लिमिटेड को बेचकर अपनी साख भी साबित की लेकिन फिर भी मोदी सरकार को अगले साल चुनावों में जाना है ऐसे में अधिक एयरलाइन विफलताएं चैंपियनिंग उद्योग के लिए उनकी प्रतिष्ठा को खराब कर सकती हैं.

फिर नई एयरलाइंस क्यों आती रहती हैं?
 मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसका सीधा सा जवाब एयरलाइन सेक्‍टर का आकर्षण है. भारत की आधी आबादी 30 से कम है, और यह आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन सकती है. भारत ने वर्ष 2016 में जापान को तीसरे सबसे बड़े घरेलू विमानन बाजार के रूप में पीछे छोड़ दिया, और अधिक स्थानीय एयरलाइंस विदेशी मार्गों को जोड़ रही हैं.
सिडनी स्थित सीएपीए सेंटर फॉर एविएशन के अनुसार, भारत को अगले 20 वर्षों में प्रति वर्ष 1.3 अरब से अधिक यात्रियों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि अभी 200 मिलियन से भी कम यात्रियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसका अनुमान है कि 40 वर्षों के भीतर भारतीय बाजार का विकास होगा. 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 1,233 अंक उछला; निवेशकों की दौलत में ₹8 लाख करोड़ का इजाफा

सोमवार, 2 नवंबर को बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में जोरदार तेजी दर्ज की गई. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 75,692 और निफ्टी 23,440 के स्तर को पार कर गए. दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए.

2 hours ago

विदेशी और MF निवेशकों को मिल सकती है टैक्स राहत, सेबी ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. मौजूदा व्यवस्था में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने को यूनिट्स की बिक्री माना जाता है और इस पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.

5 hours ago

हरियाणा में 500 करोड़ रुपये के निवेश की योजना, स्टीमहाउस इंडिया ने सरकार के साथ किया समझौता

इस समझौते के तहत राज्य के औद्योगिक क्लस्टर में सामुदायिक बॉयलर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर विचार किया जाएगा.

6 hours ago

IDBI को खरीदने के लिए IDBI की पूंजी का इस्तेमाल करेगी फेयरफैक्स?

फेयरफैक्स, IDBI बैंक का नियंत्रण हासिल करने के लिए 52,878 करोड़ रुपये का भुगतान कर रहा है. लेकिन इसके चेयरमैन प्रेम वत्सा ने निवेशकों से कहा है कि IDBI खुद फेयरफैक्स के बीमा और वित्तीय सेवा कारोबार को खरीदने के लिए नकद भुगतान करेगा. फेयरफैक्स ने इस रकम को उन स्रोतों में भी शामिल किया है, जिनसे वह अधिग्रहण के लिए भुगतान करेगी.

7 hours ago

मार्च 2027 तक 6.75-7% तक आ सकती है 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड: SBI रिसर्च

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, अगर RBI रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 6 फीसदी तक पहुंचा देता है, तब भी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.75 से 7 फीसदी के दायरे में रह सकती है.

7 hours ago


बड़ी खबरें

शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 1,233 अंक उछला; निवेशकों की दौलत में ₹8 लाख करोड़ का इजाफा

सोमवार, 2 नवंबर को बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में जोरदार तेजी दर्ज की गई. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 75,692 और निफ्टी 23,440 के स्तर को पार कर गए. दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए.

2 hours ago

कैंसर की 543 दवाएं होंगी सस्ती, 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें; मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

इस व्यवस्था के तहत कई प्रमुख कैंसर दवाओं की कीमतों में कमी की गई है. इनमें 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं शामिल हैं.

2 hours ago

विदेशी और MF निवेशकों को मिल सकती है टैक्स राहत, सेबी ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. मौजूदा व्यवस्था में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने को यूनिट्स की बिक्री माना जाता है और इस पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.

5 hours ago

AAAI ने बनाई मीडिया काउंसिल, WPP, ओमनीकॉम, पब्लिसिस, हवास और मैडिसन के वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल

भारतीय विज्ञापन एजेंसियों का संगठन AAAI मीडिया इंडस्ट्री के सामने उभरती चुनौतियों पर चर्चा और आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए नई मीडिया काउंसिल बनाएगा. ओमनीकॉम मीडिया के कार्तिक शर्मा को काउंसिल का अध्यक्ष बनाया गया है.

7 hours ago

मार्च 2027 तक 6.75-7% तक आ सकती है 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड: SBI रिसर्च

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, अगर RBI रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 6 फीसदी तक पहुंचा देता है, तब भी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.75 से 7 फीसदी के दायरे में रह सकती है.

7 hours ago