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महाराष्ट्र में ऐसा क्या है खास, जो विधानसभा चुनाव पर रहेगी शेयर बाज़ार की नज़र?
महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में चुनाव आयोग चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लोकसभा चुनाव के बाद शेयर बाजार और निवेशकों की नज़रें अब महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव पर टिक गई हैं. राज्य में इसी साल नवंबर में चुनाव होना है, लेकिन अभी उसका कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है. माना जा रहा है कि चुनाव आयोग सितंबर के आखिरी तक महाराष्ट्र विधासनभा चुनाव की तरीखों का ऐलान कर सकता है. एक मीडिया रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी के हवाले से बताया गया है कि ऐसी कई वजह हैं, जिनके चलते राज्य के चुनाव पर स्टॉक मार्केट की करीबी नज़र रहेगी.
इसलिए महत्वपूर्ण है महाराष्ट्र
मैक्वायरी का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद बाजार और निवेशकों की निगाहें अब महाराष्ट्र चुनाव पर हैं. इसकी कई महत्वपूर्ण वजह हैं. 288 विधानसभा सीटों वाला महाराष्ट्र लोकसभा सीटों के लिहाज से देश का दूसरा सबसे बड़ा प्रदेश है. पहला नंबर उत्तर प्रदेश का आता है. भारत की GDP में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 13 से 14% है. इस राज्य में प्रति व्यक्ति आय देश की औसत प्रति व्यक्ति आय से करीब 30% अधिक है. भारत के कुल निर्यात में महाराष्ट्र की 16% हिस्सेदारी है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI अट्रैक्ट करने के मामले में भी महाराष्ट्र देश में पहले नंबर पर है. ऐसे में यहां बनने वाली सरकार बाजार और निवेशकों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी.
अलग होंगे सत्ता समीकरण
महाराष्ट्र में मुख्य मुकाबला महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच है. महायुति में भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना, अजित पवार गुट की NCP शामिल है. जबकि कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की NCP महा विकास अघाड़ी का हिस्सा हैं. लोकसभा चुनावों में महा विकास अघाड़ी का प्रदर्शन महायुति से काफी बेहतर रहा है. इसलिए राज्य के सत्ता समीकरण इस बार काफी अलग हो सकते हैं. यह भी संभव है कि अजित पवार भाजपा का दामन छोड़कर चुनाव पूर्व चाचा शरद पवार के खेमे में वापस चले जाएं या भाजपा खुद उन्हें महायुति से बेदखल कर दे.
बढ़ सकता है फिस्कल डेफिसिट
मैक्वायरी की रिपोर्ट में महाराष्ट्र के फिस्कल डेफिसिट पर चिंता जताई गई है. चुनाव में लाभ की उम्मीद के साथ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लाडली बहना की तर्ज पर महिलाओं को 1500 रुपए महीना कैश ट्रांसफर और लाड़ला भाई योजना के तहत लड़कों को आर्थिक सहायता जैसी लोकलुभावन योजनाएं शुरू की हैं. मैक्वायरी का कहना है कि ऐसी योजनाओं से राज्य का फिस्कल डेफिसिट 2.6% को पार कर जाएगा. बता दें कि केंद्र सरकार राज्यों को 3 प्रतिशत तक फिस्कल डेफिसिट की इजाजत देती है. निवेशकों की एक धारणा यह भी है कि अगर राज्य में सत्ता परिवर्तन होता है, तो इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर फोकस घट सकता है. इसलिए वह चुनाव परिणाम तक बेहद सतर्क रुख अख्तियार करेंगे.
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