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EXCLUSIVE: Amul ने सिर्फ गुजरात में ही क्यों नहीं बढ़ाए दाम? कंपनी के MD ने दिया जवाब

अमूल दूध हाल ही में 2 रुपए महंगा हो गया है. हालांकि, कंपनी ने गुजरात में दूध की कीमतों में इजाफा नहीं किया है.

नीरज नैयर 3 years ago

महंगाई पहले से ही लोगों का बजट बिगाड़ रही है और अब दूध भी महंगा हो गया है. अमूल दूध के दामों में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी के बाद मदर डेयरी ने भी कीमतों में इतना ही इजाफा किया है. इससे पहले भी दोनों कंपनियों ने लागत का हवाला देते हुए दाम बढ़ाए थे. हालांकि, अमूल ने गुजरात में दूध महंगा नहीं किया है. कहने का मतलब है कि कंपनी ने वहां दाम नहीं बढ़ाए हैं. कंपनी का यह फैसला चौंकाने वाला है, क्योंकि अमूमन दाम पूरे देश में एकसाथ बढ़ाए जाते हैं.

क्यों मिली रियायत?
अमूल की तरफ से गुजरातवासियों को मिली इस छूट को राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, कंपनी का कुछ और ही कहना है. BW हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर आरएस सोढ़ी ने कहा, 'अमूल ताजा में 3% फैट होता है, जबकि अमूल गोल्ड में 6%. गुजरात में ताजा और गोल्ड की MRP में 12 रुपए का अंतर है, जबकि दिल्ली और बाकी शहरों में 10 रुपए का. अब गुजरात को छोड़कर बाकी शहरों में अमूल गोल्ड की कीमत में 2 रुपए के इजाफे के साथ हमने बाकी शहरों और गुजरात के बीच के अंतर को खत्म कर दिया है'. उन्होंने आगे कहा कि इस इजाफे की वजह फैट की कीमतों में हुई बढ़ोतरी होना है. वैसे भी, आम आदमी 'अमूल ताजा' इस्तेमाल करता है, कंपनी ने उसकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है.  

पुरानी है परंपरा 
हालांकि, सोशल मीडिया पर इसे विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया फैसला बताया जा रहा है. ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि चुनाव हिमाचल प्रदेश में भी होने हैं, तो फिर वहां कंपनी ने कोई रियायत क्यों नहीं दी? दरअसल, अमूल (Amul) डेयरी का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी, गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन की डिस्ट्रिक्ट डेयरी यूनियन के ज़्यादातर लीडर्स भाजपा समर्थन हैं. लिहाजा, माना जा रहा है कि उनके दबाव के चलते ही कंपनी ने फिलहाल दाम नहीं बढ़ाए हैं. वैसे भी, हमारे यहां चुनावी मौसम में जनता पर मेहरबानी का इतिहास रहा है. चुनाव के वक्त पेट्रोल-डीजल के दाम कभी नहीं बढ़ते, फिर चाहे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल रिकॉर्ड ऊंचाई पर क्यों न पहुंच गया हो. लेकिन चुनाव खत्म होते ही सरकार को कंपनियों का घाटा नजर आने लगता है. 2014 से पहले नरेंद्र मोदी कच्चे तेल में नरमी का फायदा जनता को पहुंचाने के हिमायती थे. अपनी रैलियों में वह पुरजोर ढंग से इस मुद्दे को उठाया करते थे, लेकिन अब वह पूरी तरह खामोश हैं. जबकि क्रूड ऑयल में गिरावट के बावजूद तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई कटौती नहीं की. 

इस साल 3 बार इजाफा
अमूल इससे पहले भी दूध के दाम बढ़ा चुकी है. इस साल ये तीसरा मौका है जब  कंपनी ने दूध की कीमतों में इजाफा किया है. अगस्त में जब कंपनी ने कीमतें बढ़ाईं थीं, तब इसका कारण ऑपरेशन कॉस्ट और मिल्क प्रोडक्शन कॉस्ट में बढ़ोतरी को बताया था. कंपनी ने कहा था कि पिछले साल की तुलना में पशु चारे की कीमत लगभग 20% बढ़ी है. इनपुट कॉस्ट और पशु आहार में इजाफे को देखते हुए कंपनी दाम बढ़ाने को मजबूर है. बता दें कि गुजरात में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. 


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