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आखिर कौन हैं George Soros और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से क्या है उनका नाता?

भाजपा का कहना है कि हिंडनबर्ग के पीछे भारत विरोधी सोच रखने वाले अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस का हाथ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट कोई बड़ा धमाका करने में लगभग नाकाम रही है. हालांकि, इसने कांग्रेस और भाजपा के बीच वाकयुद्ध ज़रूर शुरू कर दिया है. कांग्रेस लीडर राहुल गांधी जहां रिपोर्ट के बहाने मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं. वहीं, भाजपा यह साबित करने में लगी है कि  कांग्रेस का 'हाथ' भारत विरोधियों के साथ है. 

सोरोस का लगा है पैसा
बीजेपी का आरोप है कि हंगरी के निवेशक जॉर्ज सोरोस (George Soros) हिंडनबर्ग के मुख्य निवेशक हैं. सोरोस ओपन सोसायटी फाउंडेशन की संस्थापक हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आलोचक माना जाता है. भाजपा पहले भी उन पर भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश का आरोप लगा चुकी है. पार्टी सांसद रवि शंकर प्रसाद ने हाल ही में कहा था कि हम कुछ मुद्दे उठाना चाहते हैं. हिंडनबर्ग में किसका पैसा लगा है? क्या आप जॉर्ज सोरोस को जानते हैं, जो हर रोज भारत के खिलाफ प्रोपगेंडा चलाते हैं. जॉर्ज सोरोस हिंडनबर्ग के निवेशक हैं.

हंगरी से अमेरिका तक 
1930 में जन्मे जॉर्ज सोरोस यहूदी पृ्ष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं. 1947 में वह हंगरी से ब्रिटेन पहुंचे. यहां उन्होंने रेलवे कुली और वेटर के रूप में काम किया. संघर्षों के बीच उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से पढ़ाई की. 1956 में वह लंदन से अमेरिका चले गए और वहां फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट सेक्टर में काम किया. इसके बाद उन्होंने 1969 में अपना पहला हेज फंड 'डबल ईगल' लॉन्च किया. इस फंड की सफलता के बाद वह 'सोरोस फंड मैनेजमेंट' को अस्तित्व में लेकर आए. सोरोस ने 1984 में ओपन सोसायटी फाउंडेशंस की स्थापना की. उनकी यह संस्था 120 से ज्यादा देशों में न्याय, लोककंत्र और मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करती है.

इतनी दौलत के हैं मालिक
बताया जाता है कि 1992 में सोरोस ने ब्रिटिश पाउंड को शॉर्ट करके कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर का प्रॉफिट कमाया था. 94 साल के सोरोस के पास 6.7 बिलियन डॉलर की दौलत है. फोर्ब्स की रिपोर्ट बताती है कि उन्होंने ओपन सोसाइटी फाउंडेशन को 32 बिलियन डॉलर से ज्यादा का दान दिया है. वह चैरिटी करते रहते हैं. 1979 और 2011 के बीच उन्होंने दुनियाभर में विभिन्न परोपकारी कार्यों केलिए 11 बिलियन डॉलर से अधिक डोनेट किए थे. सोरोस अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के सबसे बड़े दानदाताओं में से एक हैं.

OCCRP से भी है नाता
जॉर्ज सोरोस ने नॉन प्रॉफिट मीडिया संस्था OCCRP में भी निवेश किया हुआ है. इसी संस्था ने पिछले साल गौतम अडानी और अनिल अग्रवाल पर निशाना साधा थ. OCCRP ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अडानी ग्रुप ने गुपचुप तरीके से खुद अपने शेयर खरीदकर लाखों डॉलर का निवेश किया. जबकि वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने देश के पर्यावरण कानूनों को कमजोर करने के लिए गुपचुप तरीके से लॉबिंग की. सोरोस PM मोदी की नीतियों के धुर आलोचक माने जाते हैं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और नागरिकता संसोधन कानून (CAA) का भी खुलकर विरोध किया था. इतना ही नहीं, पिछले साल जब हिंडनबर्ग के रिपोर्ट आई थी तब उन्होंने कहा था कि अडानी का पीएम मोदी के साथ इतना घनिष्ठ संबंध है कि दोनों एक-दूसरे के लिए जरूरी हो गए हैं. 

लग चुके हैं कई आरोप 
जॉर्ज सोरोस पर अब तक कई गंभीर आरोप लग चुके हैं. कहा जाता है कि उन्होंने 1992 में बैंक ऑफ इंग्लैंड को तबाह कर खुद की जेब भरी. यह भी आरोप है कि उन्होंने जॉर्ज बुश को हराने के लिए 125 करोड़ रुपए खर्च किए थे. रिपोर्ट्स की मानें तो जॉर्ज सोरोस ने दिग्गज मीडिया कंपनी फॉक्स न्यूज को बर्बाद करने के लिए 10 लाख डॉलर खर्च कर डाले थे. सोरोस पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भी विरोधी माने जाते हैं. एक बार उन्होंने ट्रंप को ठग तक कह डाला था. 


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