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LIC को SEBI से ऐसी क्या मिली खुशखबरी कि झूम उठे कंपनी के शेयर?
एलआईसी के शेयरों की स्थिति पर नजर डालें तो बुधवार को उनमें 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिली. बुधवार को कंपनी का शेयर 977.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
देश की सबसे बड़ी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी(LIC) को MPC (Minimum Public Holding) को पाने के लिए सेबी की ओर से 3 साल का अतिरिक्त समय मिल गया है. इससे पहले भारत सरकार के इकोनॉमिक अफेयर्स से लेकर वित्त मंत्रालय तक ने 10 साल का समय दे दिया है. इस खबर के आने के बाद एलआईसी के शेयरों में जबरदस्त बढ़त देखने को मिल रही है.
आखिर क्या है ये पूरा मामला?
दरअसल नियम ये है कि किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र कंपनी में पब्लिक होल्डिंग 25 प्रतिशत तक होनी चाहिए. लेकिन मौजूदा समय में एलआईसी की स्थिति पर नजर डालें तो उसमें सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत की है. सरकार ने आईपीओ के माध्यम से एलआईसी में 3.5 प्रतिशत यानी 22.13 करोड़ शेयरों को बेचा है. नियम के अनुसार सरकार को इसमें अपनी हिससेदारी को और कम करना है और पब्लिक यानी आम आदमी की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक लानी है. सेबी ने इसी 25 प्रतिशत हिस्सेदारी को लाने के लिए एलआईसी को 3 साल का और समय दे दिया है.
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इस खबर से झूम उठे एलआईसी के शेयर
एलआईसी को 3 साल का समय दिए जाने की खबर जैसे ही सामने आई उसका सीधा असर कंपनी के शेयरों पर देखने को मिला. कंपनी का शेयर बुधवार को 934 रुपये पर खुला था. लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनी का शेयर 977.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. कंपनी के शेयर में 4.99 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली. कंपनी का मार्केट कैप 6.18 लाख करोड़ रुपये रहा. एलआईसी के शेयर का 52 हफ्तों का हाई 1175 रुपये रहा है जबकि 52 हफ्तों का लो 561 रुपये रहा है.
क्या है MPC का नियम?
मिनिमम पब्लिक होल्डिंग का नियम कहता है कि किसी भी लिस्टेड कंपनी में आम निवेशक की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक होनी चाहिए. दरअसल किसी भी कंपनी में दो तरह के निवेशक होते हैं. एक वो होते हैं जो कंपनी को शुरू करते हैं और उन्हें प्रमोटर कहते हैं. दूसरे आम निवेशक होते हैं जो कंपनी में पैसा लगाते हैं. सेबी का नियम कहता है कि किसी भी लिस्टेड कंपनी में प्रमोटर में अपनी हिस्सेदारी को 65 प्रतिशत से ज्यादा 75 प्रतिशत तक ले जा सकते हैं. लेकिन एलआईसी में ये हिस्सेदारी 96 प्रतिशत तक है. ऐसे में सरकार को अपनी हिस्सेदारी काफी और कम करनी है. सरकार उसके लिए आने वाले समय में क्या रास्ता अपनाती है ये आने वाला वक्त ही बताएगा.
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