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हर काली टंकी...बिक गई Water Tank बनाने वाली ये दिग्गज कंपनी, जानें कौन है नया मालिक?

सालों तक लोगों के भरोसे का प्रतीक रही सिंटेक्स बिक गई है. गुजरात के वेलस्पन ग्रुप ने इसे खरीद लिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

जब बात घर की छत पर लगने वाली पानी की टंकी की आती है, तो जहन में एक ही नाम सबसे पहले आता है - सिंटेक्स. इसका एक विज्ञापन 'हर काली टंकी सिंटेक्स नहीं होती' खूब फेमस हुआ था. सालों तक लोगों के भरोसे का प्रतीक रही यह कंपनी अब बिक गई है. सिंटेक्स (Sintex) को गुजरात के वेलस्पन ग्रुप (Welspun Group) ने 1251 करोड़ रुपए में खरीदा है. बता दें कि वेलस्पन टेक्सटाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी है, लेकिन हाल में इसने वेयरहाउसिंग, फ्लोरिंग और एडवांस्ड टेक्साइटल्स जैसे सेक्टर्स में भी विस्तार किया है.

मजबूत होगा पोर्टफोलियो  
सिंटेक्स प्लास्टिक इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनी है. पानी की टंकी यानी वॉटर टैंक के अलावा सिंटेक्स प्लास्टिक के दूसरे प्रॉडक्ट्स भी बनाती है और इसका देशभर में स्ट्रॉन्ग नेटवर्क है. वेलस्पन ने सिंटेक्स को दिवाला प्रक्रिया के माध्यम से खरीदा है. इस डील से Welspun के बिल्डिंग पोर्टफोलियो में मजबूती आएगी. ग्रुप का कहना है कि सिंटेक्स के अधिग्रहण से पूरे देश में उसकी पहचान बढ़ेगी, क्योंकि सिंटेक्स की हर घर तक पहुंच है. गौरतलब है कि इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग यानी दिवाला प्रक्रिया में जाने से पहले सिंटेक्स की प्लास्टिक मार्केट में डबल डिजिट से भी ज्यादा हिस्सेदारी थी.

इस तरह मिलेगा फायदा
मीडिया रिपोर्ट्स में वेलस्पन के चेयरमैन बालकृष्ण गोयनका के हवाले से बताया गया है कि समूह अपना बिल्डिंग मटीरियल पोर्टफोलियो मजबूत कर रहा है और हर घर तक अपने बिजनेस को पहुंचाना चाहता है. सिंटेक्स का अधिग्रहण उसकी इसी रणनीति का हिस्सा है. वेलस्पन ग्रुप बिल्डिंग मटीरियल मार्केट पर कब्जा करना चाहता है. ऐसे में पानी की 'काली टंकी' बनाने वाली ये कंपनी उसके लिए फायदे का सौदा हो सकती है. सिंटेक्स के पास सालों का अनुभव है और वह किसी पहचान की मोहताज नहीं है.

इस तरह डूबी सिंटेक्स
वित्तीय वर्ष 2022 में सिंटेक्स का रिवेन्यु 761 करोड़ रुपए रहा था. जबकि वित्तीय वर्ष 2019 में कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 270 करोड़ रुपये और टर्नओवर 1800 करोड़ रुपए था. हालांकि, कंपनी ने लोन के पेमेंट में डिफॉल्ट किया और दिसंबर 2020 में इसे बैंकरप्सी कोर्ट में घसीट लिया गया. इस तरह सालों तक लोगों के भरोसे का प्रतीक रही कंपनी दिवालिया होकर दूसरे हाथों में चली गई. कंपनी के पास देशभर में 800 डिस्ट्रीब्यूटर्स और 13000 रिटेलर्स का विशाल नेटवर्क है. 

शेयरों को लगे पंख
वेलस्पन के अलावा JM फाइनेंशियल एसेट मैनेजमेंट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने भी सिंटेक्स को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन बाजी वेलस्पन के हाथ लगी. सिंटेक्स पानी की टंकी के अलावा इंडस्ट्रियल कंटेनर्स, सब-ग्राउंड स्ट्रक्चर्स, फैक्ट्री मेड डूअर्स और पैसेंजर कार, टू-वीलर और कमर्शियल वाहनों के लिए प्लास्टिक मोल्डेड कंपोनेंट्स भी बनाती है. वहीं, इस डील का असर वेलस्पन के शेयरों पर भी पड़ा है. कंपनी के शेयर तेजी से ऊपर की तरफ भाग रहे हैं. खबर लिखे जाने तक इनमें ढाई फीसदी से ज्यादा का उछाल आ गया था और कंपनी का शेयर 65.15 रुपए पर ट्रेड कर रहा था.

 


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