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कमजोर कर वृद्धि और धीमी GDP, भारत के बजट पर दबाव

CareEdge रेटिंग्स ने चेताया कि कमजोर कर संग्रह और धीमी GDP वृद्धि भारत के वित्तीय समेकन लक्ष्यों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

FY26 में भारत की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है. CareEdge रेटिंग्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नाममात्र GDP वृद्धि में कमी और कर संग्रह में सुस्ती पूरी साल की राजस्व लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, FY26 की पहली छमाही में केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत गैर-कर राजस्व से समर्थित रही, जबकि सकल कर संग्रह में सिर्फ 2.8 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज हुई. बजट में अनुमानित 12.5 प्रतिशत वृद्धि से काफी कम. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर दोनों में सुस्ती मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है, जिसमें आयकर में कटौती और चल रही GST सुधार प्रमुख कारण हैं.

वित्तीय घाटा बढ़ा
CareEdge के अनुसार, FY26 की पहली छमाही के अंत तक सरकार का वित्तीय घाटा 5.7 ट्रिलियन रुपये रहा, जो पूरे साल के बजट अनुमान का 36.5 प्रतिशत है. यह पिछले साल की समान अवधि में दर्ज 29.4 प्रतिशत से अधिक है, लेकिन ऐतिहासिक औसत के अनुसार अभी भी सामान्य है.

कर वृद्धि सुस्त
FY26 की पहली छमाही में प्रत्यक्ष कर वृद्धि 3.1 प्रतिशत साल-दर-साल रही, जबकि पूरे साल का बजट लक्ष्य 16.1 प्रतिशत था. कॉर्पोरेट कर संग्रह में केवल 1.1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई, जबकि आयकर संग्रह में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई — यह 21.6 प्रतिशत वार्षिक अनुमान से काफी कम है.

रिपोर्ट में कहा गया कि बजट में घोषित आयकर स्लैब सुधार ने अब तक वृद्धि की गति को धीमा किया है. हालांकि हाल के महीनों में आयकर संग्रह में सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी अपेक्षाओं से कम है.

अप्रत्यक्ष कर राजस्व में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि वार्षिक लक्ष्य 10.9 प्रतिशत था. इसमें GST संग्रह 3.2 प्रतिशत, उत्पाद शुल्क 8.1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कस्टम ड्यूटी 5.2 प्रतिशत घट गई, जो बजट में घोषित कर कटौती को दर्शाती है. परिणामस्वरूप, केंद्र का शुद्ध कर राजस्व पिछले साल की तुलना में 2.8 प्रतिशत घट गया.

CareEdge ने कहा कि सितंबर 2025 में लागू दो-स्तरीय GST ढांचे का पूरा वित्तीय प्रभाव इस साल बाद में ही स्पष्ट होगा. इस सुधार से केंद्र और राज्यों को संक्षिप्त अवधि में GDP का लगभग 0.1 प्रतिशत राजस्व हानि हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक में यह कर संग्रह को मजबूती प्रदान कर सकता है.

गैर-कर समर्थन और पूंजीगत व्यय

जहां कर राजस्व सुस्त रहे, वहीं गैर-कर राजस्व 30.5 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें RBI का 2.7 ट्रिलियन रुपये का लाभांश प्रमुख योगदान रहा. यह बजट में अनुमानित 2.6 ट्रिलियन रुपये से अधिक है.

व्यय के मोर्चे पर, पूंजीगत व्यय FY26 की पहली छमाही में 40 प्रतिशत बढ़ा, खासकर खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग और सड़कों व रेल के लिए आवंटनों के कारण. CareEdge ने कहा कि पूंजीगत व्यय पूरे साल के लक्ष्य को पार करने की दिशा में है, जबकि राजस्व व्यय में कुछ समायोजन किया गया.

आर्थिक दबाव और वैश्विक जोखिम
नाममात्र GDP वृद्धि FY26 में 10.1 प्रतिशत से घटकर लगभग 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे राजस्व संग्रह पर दबाव बना रहेगा. रिपोर्ट ने चेताया कि आयकर कटौती और GST सुधार का प्रभाव “नजदीकी निगरानी” का विषय है.

गैर-कर राजस्व में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि कर घाटे के हिस्से को पूरा कर सकती है, लेकिन कमजोर कर प्रदर्शन दूसरी छमाही में व्यय को सीमित कर सकता है.

विशेषज्ञों ने यह भी चेताया कि अमेरिकी शुल्क और वैश्विक मांग में गिरावट भारतीय निर्यात, रोजगार और विनिर्माण पर असर डाल सकती है. भारतीय वस्त्र और परिधान जैसे निर्यात पर कड़े अमेरिकी शुल्क बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं, जिससे उत्पादन, रोजगार और आय पर दबाव पड़ सकता है.


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