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BW MarketWorld: हम प्रोडक्‍ट की क्‍वॉलिटी से कभी समझौता नहीं करते: जयेन मेहता

अमूल के एमडी ने कहा कि हमारी कंपनी के हर सेक्‍शन में आठ रूलों वाला एक लैमिनेटेड पेपर कर्मचारियों के सामने होता है. हम हमेशा ही उसे ध्‍यान में रखकर काम करते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

 BW Marketing World के Top 100 Marketer इवेंट में अमूल ग्रुप के एमडी ने वहां पहुंचे लोगों के सामने मार्केटिंग से जुड़े अपने अनुभव को रखा. उन्‍होंने बताया कि दुनिया के किसी भी कारोबार में होता ये है कि वहां कच्‍चा माल सस्‍ते में खरीदकर उसे महंगे दाम पर बेचते हैं लेकिन हमारे वहां ऐसा नहीं होता है. हम कच्‍चे माल को महंगे दाम में खरीदकर उसे किफायती दाम पर बेचते हैं. इस कार्यक्रम में BW Businesswolrd  के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ और एक्‍सचेंज4मीडिया के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा भी मौजूद रहे.   

कहां से कहां पहुंच गई मार्केटिंग?  
Amul ग्रुप के एमडी जयेन मेहता ने कहा मैं आज आपको ये बताने की कोशिश करूंगा कि पहले मार्केटिंग कैसे हुआ करती थी. आज के बदलते समय में ये मार्केटिंग कैसे हो रही है. आखिर एक नाम में क्‍या होता है? अगर किसी कंपनी को फॉर्चुन लिस्‍ट में शामिल होना है तो आपको उसके लिए जरूरी ये है कि आप 7.5 बिलियन से ज्‍यादा की कंपनी हो, लेकिन सौभाग्‍य से अमूल 9 बिलियन से ज्‍यादा की कंपनी है. अगर आप देखेंगे तो किसी के भी नाम में मार्केटिंग वर्ड नहीं है. लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे समूह के नाम में गुजरात को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन है, जिसे 1973 में बनाया गया था. लेकिन अमूल डेयरी 1946 से चल रही है. लेकिन उसे मार्केटिंग फेडरेशन बनाने का विचार डॉ. कूरियन के दिमाग में आया. जब उन्‍होंने 1957 में एक पेपर के जरिए मार्केटिंग फेडरेशन की नींव रखी और आज अमूल एक सबसे बड़ा एफएमसीजी ब्रैंड है. अमूल की स्‍थापना के बाद डॉ. कूरियन ने अपनी टीम के साथ मिलकर इसे एक बड़ा ब्रैंड बनाया.

मार्केटिंग के 4 P से सभी हैं वाकिफ  
जयेन मेहता ने कहा कि एक मार्केटिंग का स्‍टूडेंट होने के नाते हम चार पी को जानते हैं जिसमें, प्रोडक्‍ट, प्राइस, प्रमोशन और प्‍लेस होते हैं. आप अगर अमूल के लोगो को देखें तो उसमें हमारी सप्‍लाई चेन से लेकर सभी वो चीजें मौजूद हैं जो किसी ब्रैंड में होनी चाहिए. हमने हमेशा ही अपनी सभी स्‍टेकहोल्‍डरों का पूरा ध्‍यान रखा. आज हम क्‍या हैं ये आप सभी लोग देख ही रहे हैं. 

क्‍या हैं मार्केटिंग के रूल? 
मार्केटिंग के कुछ नियमों को हमने अमूल में फॉलो किया है. हमारी कंपनी के सभी विभाग में वो आठ नियमों का एक लैमिनेटेड पेपर में लगे हुए हैं. हम हमेशा उसे ध्‍यान में रखकर काम करते हैं. इसका पहला नियम है कि कभी भी किसी ग्राहक को कम नहीं आंकना है. लेकिन अमूल जैसे ब्रैंड में जिससे हजारों किसान जुड़े हुए हैं, हम हमेशा अपने ब्रैंड को मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रोड्यूसर को मजबूत बनाना, कंज्‍यूमर पैक्‍स और प्राइसिंग इन सभी को ध्‍यान में रखा गया है. इसमें से कई चीजें एक दूसरे की विरोधाभासी हैं लेकिन हम करते हैं. लोग ये जानते हैं कि अमूल अफोर्डेबल प्राइस पर बेहतरीन प्रोडक्‍ट मुहैया कराता है. 

हम महंगे दाम पर खरीदते हैं किसानों से दूध 
अमूल के एमडी जयेन मेहता ने कहा कि सामान्‍य बिजनेस का नियम ये होता है कि बिजनेसमैन सस्‍ते दाम पर कच्‍चा माल खरीदता है और महंगे दाम पर उसे बेचकर मोटा मुनाफा कमाता है. लेकिन हमारे वहां इसका उल्‍टा होता है. हम किसानों से महंगे प्राइस पर दूध खरीदते हैं और देश को कम से कम कीमत में दूध मुहैया कराते हैं.हमारे सामने बहुत कम मार्जिन में अपना प्रोडक्‍ट मुहैया कराने की चुनौती होती है. हमारा 80 प्रतिशत शेयर कंज्‍यूमर को जाता है. अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे देशा में प्रोड्यूसर को 30 से 40 प्रतिशत तक दिया जाता है, लेकिन हम अमूल में 80 प्रतिशत तक देते हैं. 

क्‍वॉलिटी से कभी नहीं करते समझौता 
हमारे सामने कोई भी स्थिति क्‍यों न आ जाए, हम क्‍वॉलिटी से समझौता नहीं करते हैं. इसी का नतीजा है कि आज ग्राहक हम पर ब्‍लाइंड ट्रस्‍ट (आंख बंद करके भरोसा) करता है. वर्ल्‍ड मिल्‍क प्रोडक्‍शन का डाटा कहता है कि पूरी दुनिया में 930 मिलियन दूध पैदा होता है. इसमें भारत 22 मिलियन टन दूध पैदा करता है. इसमें एक चौथाई दूध संगठित क्षेत्र से आता है जबकि 1 चौथाई अमूल के द्वारा हैंडिल किया जाता है. 


 


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