होम / बिजनेस / कई प्लांट्स को बंद करने की बना रही योजना Volkswagen, हजारों स्टाफ की भी करेगी छंटनी
कई प्लांट्स को बंद करने की बना रही योजना Volkswagen, हजारों स्टाफ की भी करेगी छंटनी
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी अगले दो साल तक इंक्रीमेंट भी नहीं देगी. साथ ही बोनस में कटौती की तैयारी भी कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
दुनिया की दिग्गज कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) भी संकट के दौर में आ गई है. कंपनी ने बड़ा कॉस्ट कटिंग प्लान तैयार किया है. इसके तहत कंपनी के कई प्लांट बंद किए जाएंगे. साथ ही सैलरी में भी 10 फीसदी की कटौती की जाएगी. इसके अलावा छंटनी की आशंका भी जताई जा रही है. इस बारे में जल्द ही कर्मचारी यूनियन को जानकारी दे दी जाएगी. यह कंपनी के कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका है.
नहीं दिया जाएगा इंक्रीमेंट
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फॉक्सवैगन जर्मनी के अपने कई प्लांट बंद करने का प्लान बना चुकी है. रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के सीईओ ओलिवर ब्लूम (Oliver Blume) ने फॉक्सवैगन ग्रुप के लिए 4 अरब यूरो (4.3 अरब डॉलर) का कॉस्ट कटिंग प्लान बनाया है. कंपनी के 87 साल के इतिहास में ऐसे कदम पहली बार उठाए जा रहे हैं. रिपोर्ट में दावा किया है कि 10 फीसदी सैलरी कटौती के अलावा कंपनी ने फैसला लिया है कि 2025 और 2026 में इंक्रीमेंट भी नहीं दिए जाएंगे. बोनस में कटौती पर भी विचार किया जा रहा है.
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी की वर्क्स काउंसिल की हेड डैनियल कैवालो ने कहा कि मैनेजमेंट इस बारे में काफी गंभीर है, यह बारगेनिंग का कोई प्रयास नहीं है. यह पहल जर्मनी के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल ग्रुप का अपने देश में प्लांट्स बेचने के प्लान का हिस्सा है.' हालांकि, उन्होंने इस बारे में साफ तौर पर यह नहीं बताया कि इससे कौन से प्लांट्स प्रभावित होंगे और फॉक्सवैगन के कुल कितने स्टाफ की छंटनी हो सकती है. जर्मनी में फॉक्सवैगन के तकरीबन 3,00,000 स्टाफ हैं.
इन प्लान का कर्मचारी कर सकते हैं भारी विरोध
रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इन प्लान का कर्मचारी भारी विरोध कर सकते हैं. कर्मचारी यूनियन का कहना है कि कंपनी सिर्फ प्रॉफिट बनाने पर ध्यान दे रही है. मैनेजमेंट की विचारधारा सही नहीं है. फॉक्सवैगन ने सितंबर में रीस्ट्रक्चरिंग की जानकारी देकर कर्मचारियों को चौंका दिया था. कंपनी ने कहा था कि प्रोडक्शन की लागत बढ़ती जा रही है. इलेक्ट्रिक वेहिकल की तरफ जाने से उन्हें काफी खर्च करना पड़ रहा है. साथ ही चीन जैसे मार्केट में तगड़ा कम्पटीशन भी झेलना पड़ रहा है. कंपनी का दावा है कि ऐसा सभी कंपनियों के साथ हो रहा है.
टैग्स