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वेदांता का नया रिकॉर्ड: 85 मिलियन घन मीटर पानी का पुनर्चक्रण, 10 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ
जल संरक्षण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वेदांता लिमिटेड सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में मजबूत कदम उठा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
वैश्विक स्तर पर बढ़ते जल संकट के बीच, जहां अनुमान है कि मौजूदा खपत के चलते वर्ष 2030 तक दुनिया को 40% तक पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे समय में जल संरक्षण और प्रबंधन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है. इसी परिप्रेक्ष्य में विश्व जल दिवस के अवसर पर वेदांता (Vedanta Limited) ने घोषणा की कि उसने वित्त वर्ष 2026 (फरवरी तक) में अपने विभिन्न संचालन में 85 मिलियन घन मीटर से अधिक पानी का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग किया है. यह मात्रा 34,000 से अधिक ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूलों के बराबर है.
कंपनी का जल सकारात्मकता सूचकांक 0.63 पर पहुंच गया है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप आंतरिक जल लेखांकन के आधार पर निर्धारित किया गया है. यह वेदांता के सतत जल प्रबंधन और पर्यावरणीय परिणामों को बेहतर बनाने की दिशा में सक्रिय प्रयासों को दर्शाता है.
भारत में बढ़ते जल संकट और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए वेदांता लिमिटेड ने 2030 तक पूरी तरह ‘शुद्ध जल सकारात्मक’ बनने का लक्ष्य रखा है. इसके तहत कंपनी तकनीक आधारित जल दक्षता, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन और सामुदायिक भागीदारी पर लगातार काम कर रही है.
तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति
वेदांता की जल प्रबंधन रणनीति तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है.
1. पुनर्चक्रण: उपचारित पानी का पुनः उपयोग कर ताजे पानी पर निर्भरता कम करना.
2. संरक्षण: संचालन में दक्षता बढ़ाकर पानी की खपत घटाना.
3. पुनर्भरण: जल संरक्षण परियोजनाओं और सामुदायिक पहलों के जरिए जल स्तर को बढ़ाना.
इस रणनीति के तहत Hindustan Zinc Limited, Cairn Oil & Gas और वेदांता का लौह अयस्क व्यवसाय अब ‘शुद्ध जल सकारात्मक’ बन चुके हैं. यानी वे जितना पानी उपयोग करते हैं उससे अधिक पुनर्भरण करते हैं.
जल प्रबंधन में उपलब्धियां
कंपनी ने उन्नत उपचार और पुनः उपयोग प्रणालियों के जरिए 31% जल पुनर्चक्रण दर हासिल की है. जो जल-गहन उद्योगों में वैश्विक स्तर पर उच्च मानी जाती है. इसके अलावा वर्ष के दौरान 7 मिलियन घन मीटर से अधिक पानी का संरक्षण और पुनर्भरण किया गया.
वेदांता की सहायक कंपनी भारत एलुमिनियम कंपनी लिमिटेड ने शीतलन टावर के पानी का पुनः उपयोग कर रोजाना लगभग 4,800 घन मीटर ताजे पानी की बचत की है. वहीं मीनाक्षी एनर्जी लिमिटेड का ऊर्जा संयंत्र पूरी तरह समुद्री खारे पानी पर संचालित होता है. जिससे ताजे पानी की आवश्यकता समाप्त हो जाती है.
सामुदायिक प्रभाव और पहल
इस वर्ष विश्व जल दिवस की थीम “जल और लैंगिक समानता – जहां जल बहता है, वहां समानता बढ़ती है” के अनुरूप वेदांता ने जल प्रबंधन को सामुदायिक विकास और लैंगिक समानता से भी जोड़ा है. कंपनी की पहलें विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं.
वित्त वर्ष 2026 में वेदांता की जल और स्वच्छता पहलें 225 से अधिक गांवों तक पहुंचीं. जिससे 10.5 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला. इन पहलों के तहत सौर ऊर्जा संचालित बोरवेल, सीवेज उपचार संयंत्र और रिवर्स ऑस्मोसिस प्रणालियां स्थापित की गईं. जो 30 लाख लीटर से अधिक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करा रही हैं.
प्रमुख परियोजनाएं
1. राजस्थान में कैर्न ऑयल एंड गैस द्वारा 5 नाड़ी और 100 से अधिक खादिन का निर्माण.
2. बाड़मेर जिले में लगभग 70 वर्षा जल संचयन संरचनाएं.
3. पंजाब में Talwandi Sabo Power Limited द्वारा तालाबों का पुनर्जीवन.
4. लौह अयस्क व्यवसाय द्वारा भूजल पुनर्भरण गड्ढों का निर्माण.
5. ओडिशा के लांजीगढ़ में 10 लाख घन मीटर जल पुनर्भरण क्षमता का निर्माण.
राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता
NITI Aayog ने Rajpura Dariba Complex को ‘स्कोप 1 जल सकारात्मक आकांक्षी कंपनी’ प्रमाणन प्रदान किया है. जो जल प्रबंधन के क्षेत्र में कंपनी की उपलब्धियों को दर्शाता है.
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