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अमेरिकी शुल्क से भारत के निर्यात पर गहरा असर, रत्न-आभूषण और परिधानों की मांग में भारी गिरावट

अमेरिकी शुल्क नीति ने भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने और नए बाजार तलाशने की आवश्यकता है ताकि एक ही देश पर निर्भरता कम हो सके.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का असर अब साफ दिखने लगा है. वाणिज्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में भारत का अमेरिकी बाजार को निर्यात कई श्रेणियों में बुरी तरह प्रभावित हुआ है. रत्न-आभूषण, वस्त्र और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत की अमेरिका पर निर्यात निर्भरता को लेकर चिंता बढ़ गई है. अब दोनों देश व्यापार समझौते की दिशा में फिर से संवाद शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.

रत्न और आभूषण निर्यात में सबसे बड़ी गिरावट

अगस्त में मोती और कीमती रत्नों के निर्यात में 54.2 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई. वहीं समुद्री उत्पादों का निर्यात 33 फीसदी और सोना व अन्य बहुमूल्य धातु से बने आभूषणों का निर्यात 18.6 फीसदी घटा. इसी अवधि में रेडीमेड परिधान का निर्यात 13.2 फीसदी, सूती कपड़े का 10.1 फीसदी, दवा फॉर्मूलेशन का 7 फीसदी और वाहन कलपुर्जों का निर्यात 6.6 फीसदी कम हुआ है.

अमेरिकी बाजार पर निर्भरता बनी चुनौती

भारत अपने रेडीमेड कपड़ों का करीब 34 फीसदी और सूती कपड़ों का 39 फीसदी निर्यात अमेरिका को करता है. कीमती रत्नों के कुल निर्यात में अमेरिकी हिस्सेदारी 37 फीसदी और स्वर्ण आभूषणों में 28 फीसदी है. इसी तरह समुद्री उत्पादों का 36 फीसदी, ड्रग फॉर्मूलेशन का 40 फीसदी और वाहन कलपुर्जों का 22 फीसदी निर्यात अमेरिका को जाता है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अमेरिकी बाजार पर भारत की निर्भरता अभी भी बहुत अधिक है.

रूसी तेल पर शुल्क का प्रभाव

अमेरिका ने रूस से भारत की तेल खरीद को लेकर 7 अगस्त से भारतीय सामानों पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लागू किया था. यह 27 अगस्त से प्रभावी हुआ जिससे भारतीय निर्यात पर कुल शुल्क बढ़कर 50 फीसदी हो गया. इसी कारण अगस्त में अमेरिका को भारत का कुल निर्यात वृद्धि दर घटकर 7.15 फीसदी रह गई, जबकि जुलाई में यह 27.9 फीसदी थी. हालांकि दूरसंचार उपकरणों के निर्यात में 140.1 फीसदी की तेज वृद्धि दर्ज की गई.

व्यापार समझौते की दिशा में तेज कदम

भारत ने इस वर्ष के अंत तक अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम रूप देने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह के अंत में अमेरिका जाएगा. यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई फोन वार्ता और नई दिल्ली में अमेरिका के नामित राजदूत सर्जियो गोर की यात्रा के बाद हो रहा है.

पिछली व्यापार वार्ताएं भारी शुल्क विवाद के चलते स्थगित कर दी गई थीं, लेकिन अब दोनों देश एक व्यापक समाधान की दिशा में बातचीत कर रहे हैं. इसमें व्यापार समझौते से जुड़े लंबित मुद्दों के साथ-साथ भारत की रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की चिंताओं को भी दूर करने का प्रयास शामिल होगा.

 


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