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अमेरिकी टैरिफ नीति से वैश्विक व्यापार असंतुलन नहीं सुधरा : SBI रिपोर्ट
SBI की रिपोर्ट में कहा गया है “वैश्विक व्यापार में स्थायी संतुलन के लिए संरक्षणवाद नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधार और वित्तीय पुनर्संतुलन आवश्यक हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नवीनतम शोध के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ वैश्विक व्यापार असंतुलन को सुधारने में विफल रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही अमेरिका का व्यापार घाटा हाल के महीनों में थोड़ा घटा हो, लेकिन यह कमी मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड के साथ आयात में गिरावट के कारण आई है, जबकि भारत, मेक्सिको, वियतनाम और ताइवान जैसे अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ घाटा और बढ़ गया है.
अमेरिका का व्यापार घाटा बना चुनौती
SBI रिसर्च के अनुसार, अमेरिका ने 2025 के मध्य में मासिक व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से नीचे दर्ज किया, जो जनवरी और मार्च में 150 अरब डॉलर से अधिक था. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया, “वास्तविकता यह है कि घाटे में सार्थक कमी केवल स्विट्जरलैंड के साथ हुई है, जो 53 अरब डॉलर तक घटी है.” वहीं वियतनाम, मेक्सिको, ताइवान और भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ गया है.
यूरोप-अमेरिका व्यापार तनाव के बीच जारी विश्लेषण
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच “अनुचित व्यापार प्रथाओं” को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है. यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्डे के हवाले से SBI ने कहा कि सतही आंकड़े असली स्थिति नहीं दिखाते, क्योंकि यूरोप में अमेरिकी कंपनियों के भीतर होने वाला आंतरिक व्यापार और सेवा क्षेत्र का बढ़ता घाटा वस्तुओं के अधिशेष को संतुलित कर देता है.
2024 में यूरोपीय संघ का वस्तु व्यापार अधिशेष 273.1 अरब डॉलर रहा, जो 2016 के 347.9 अरब डॉलर से घटा है. वहीं चीन का व्यापार अधिशेष 2016 के 509.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में लगभग 992 अरब डॉलर पहुंच गया.
टैरिफ से व्यापार प्रवाह बदला, असंतुलन नहीं
SBI रिसर्च के अनुसार, 2025 की शुरुआत से लगाए गए अमेरिकी टैरिफ ने व्यापार प्रवाह को “रीशेप” किया है, लेकिन उन्हें ठीक नहीं किया. स्विट्जरलैंड पर टैरिफ 31 से बढ़ाकर 39 प्रतिशत किया गया, जिससे अप्रैल-जून के बीच अस्थायी अधिशेष मिला, पर जुलाई में आयात फिर बढ़ने से घाटा 7.9 अरब डॉलर हो गया. भारत पर टैरिफ 26 से 50 प्रतिशत तक बढ़ाए गए, जिससे अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा 17 अरब डॉलर से बढ़कर 23 अरब डॉलर हो गया.
रिपोर्ट में कहा गया, “पहली नजर में अमेरिकी व्यापार घाटा घटता दिखता है, लेकिन गहराई से देखें तो यह व्यापक सुधार नहीं है. उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ घाटा बढ़ा है, जिससे स्पष्ट है कि सुधार नहीं बल्कि व्यापार मोड़ (trade diversion) हो रहा है.”
वैश्विक व्यापार में नया समीकरण
SBI रिपोर्ट बताती है कि अब मेक्सिको अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है, जिसका हिस्सा कुल व्यापार का 16 प्रतिशत है. इसके बाद कनाडा 12.5 प्रतिशत और चीन 7.6 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. भारत 2.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दसवें स्थान पर है.
व्यापार को "लंबी अवधि का खेल" बताया गया
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान व्यापार तनाव “वन-शॉट नैश इक्विलिब्रियम” जैसा है, जिसमें अमेरिका और यूरोपीय संघ अल्पकालिक लाभ के लिए टैरिफ और प्रतिशोधी कदम उठा रहे हैं, जिससे “पारेटो-अधोमानक परिणाम” (Pareto-inferior outcomes) सामने आ रहे हैं. लेकिन SBI का कहना है कि व्यापार एक “दोहराया जाने वाला खेल” (repeated game) है, जहां दीर्घकालिक सहयोग से पारस्परिक लाभ संभव है.
“वैश्विक व्यापार कोई एकबारगी खेल नहीं है,” रिपोर्ट में कहा गया. “खुली और नियम-आधारित व्यवस्था के जरिए आपसी सहयोग से अधिक उत्पादकता, नवाचार और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है. संरक्षणवाद या सब्सिडी जैसे कदम इन लाभों को कम कर देते हैं.”
भारत-अमेरिका व्यापार में हल्की बढ़ोतरी
अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को निर्यात साल-दर-साल 3.02 प्रतिशत बढ़कर 45.8 अरब डॉलर पर पहुंचा, हालांकि अगस्त और सितंबर में मासिक निर्यात में गिरावट दर्ज हुई. SBI का अनुमान है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता जल्द ही पूरी होगी, जिससे अमेरिका भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक “अनुकूल बाजार” बना रहेगा.
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