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रूसी तेल पर अमेरिकी राहत: भारत के लिए सस्ते ईंधन का रास्ता फिर खुला

अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर छूट बढ़ाने का फैसला भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से फायदेमंद है. इससे जहां भारत को सस्ता ईंधन मिलता रहेगा, वहीं वैश्विक बाजार में भी स्थिरता लाने में मदद मिल सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में दी गई छूट को आगे बढ़ा दिया है, जिससे भारत जैसे देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने का मौका मिलता रहेगा. यह फैसला न सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश भी माना जा रहा है.

16 मई तक बढ़ाई गई छूट

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी तेल की खरीद पर दी गई छूट को 16 मई तक बढ़ा दिया है. इस नई व्यवस्था के तहत देशों को समुद्र में लदे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद जारी रखने की अनुमति मिलेगी. यह कदम पहले दी गई 30-दिवसीय छूट के समाप्त होने के बाद उठाया गया है. हालांकि, इस लाइसेंस में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े लेन-देन को बाहर रखा गया है. अमेरिका का उद्देश्य साफ है, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखना और सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाना.

ऊर्जा संकट और युद्ध का असर

मौजूदा समय में दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है. पश्चिम एशिया में संघर्ष और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में व्यवधान के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. इस मार्ग से पहले वैश्विक तेल-गैस का लगभग 20% परिवहन होता था. इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका का यह फैसला अहम हो जाता है, क्योंकि इससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है.

भारत की कूटनीतिक पहल रंग लाई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुई बातचीत में इस छूट को बढ़ाने का मुद्दा उठाया था. विदेश स्तर पर हुई चर्चाओं में भारत ने साफ किया था कि ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है, खासकर तब जब वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही हो. यह निर्णय उसी कूटनीतिक प्रयास का परिणाम माना जा रहा है, जिसने भारत को एक बार फिर राहत दिलाई है.

सप्लाई बढ़ने की उम्मीद, लेकिन चुनौतियां बरकरार

रूस की ओर से संकेत मिले हैं कि इस छूट के चलते वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ सकती है. अनुमान है कि करोड़ों बैरल कच्चा तेल बाजार में उपलब्ध हो सकता है, जिससे कीमतों पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव है. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ छूट से कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है.

भारत को बढ़ेगी रूसी सप्लाई

रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह कच्चे तेल के साथ-साथ LPG और LNG की सप्लाई भी बढ़ाने के लिए तैयार है. रूस भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है और भविष्य में ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की बात कह चुका है.

रूसी तेल का भारत में बढ़ता आयात

हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने रूस से तेल आयात में तेजी लाई है. मार्च महीने में यह आयात कई गुना बढ़ गया, जो दर्शाता है कि भारत सस्ते तेल के अवसर का पूरा फायदा उठा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत रूस के लिए एक प्रमुख तेल खरीदार बनकर उभरा है. इससे भारत को लागत कम करने में मदद मिली है, वहीं रूस को भी बड़ा बाजार मिला है.

 


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