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यूएई भारत में करेगा 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश, पोर्ट, एनर्जी और स्पेस पर फोकस
2032 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य, भारत में पहले ही करीब 25 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है यूएई
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत में करीब 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रहा है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि संभावित निवेश के लिए पोर्ट, शिपबिल्डिंग, ऊर्जा, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है. यह प्रस्तावित निवेश भारत में यूएई के पहले से किए गए करीब 25 अरब डॉलर के निवेश के अतिरिक्त होगा.
यूएई ने भारत में लंबी अवधि में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है. वहीं, दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है.
पोर्ट और शिपबिल्डिंग पर विशेष जोर
समुद्री बुनियादी ढांचा यूएई के संभावित निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है. दोनों देशों ने सहयोग के छह क्षेत्रों को कवर करने वाले एक द्विपक्षीय वर्किंग ग्रुप की स्थापना पर सहमति जताई है. इनमें जहाजों का स्वामित्व, आधुनिक पोर्ट का विकास, शिपबिल्डिंग, जहाजों की मरम्मत और रखरखाव, जहाजों को तोड़ना और कंटेनर निर्माण शामिल हैं.
पीयूष गोयल ने कहा कि यूएई के निवेशक नए पोर्ट के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा पोर्ट सुविधाओं के विस्तार में भी भाग ले सकते हैं. इसमें महाराष्ट्र में बन रहे वधावन पोर्ट के अलावा भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर मौजूद विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं.
सरकार के अनुसार, भारत और यूएई के बीच आर्थिक साझेदारी ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में लगातार विस्तार कर रही है. दोनों देश 200 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
ऊर्जा क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
ऊर्जा सुरक्षा भी दोनों देशों के बीच बातचीत का एक प्रमुख विषय रही. भारत और यूएई रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं. भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाने की संभावना का अध्ययन किया जा रहा है और इस क्षेत्र में यूएई की ओर से आगे निवेश किए जाने की उम्मीद है.
भारत यूएई से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और अन्य गैसों की आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है. भारत तक गैस पहुंचाने के लिए समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने की व्यवहार्यता का भी अध्ययन किया जा रहा है. इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का एक और नया क्षेत्र खुल सकता है.
भारत और यूएई के बीच व्यापक निवेश सहयोग के साथ ऊर्जा संबंध भी मजबूत हो रहे हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में यूएई भारत के कच्चे तेल, LNG और LPG के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था.
स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप में निवेश की तैयारी
यूएई स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी भारत में निवेश बढ़ाने पर विचार कर रहा है. इसमें ऑर्बिटल डेब्रिस यानी अंतरिक्ष में मौजूद मलबे से संबंधित तकनीक विकसित करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं.
दोनों देशों ने पहले ही स्पेस इंडस्ट्री के विकास और कमर्शियल सहयोग को गहरा करने के क्षेत्रों की पहचान की थी. इसमें स्पेस स्टार्टअप्स को समर्थन देना भी शामिल है.
इसके अलावा, भारत और यूएई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीकों और फिनटेक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. बातचीत में भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी क्षमताओं के साथ जोड़कर वित्तीय सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के विकल्प भी शामिल हैं.
यूएई के निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर देख रहे हैं. वित्तीय क्षेत्र में सहयोग के तहत स्थानीय मुद्रा में लेनदेन, पेमेंट और मैसेजिंग सिस्टम तथा सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया जा रहा है.
CEPA के तहत व्यापार संबंध मजबूत करने पर जोर
भारत और यूएई के बीच निवेश और व्यापार बढ़ाने की ये बातचीत दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के तहत व्यापार संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों के बीच हो रही है.
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब डॉलर रहा. वहीं, 2025 में दोनों देशों के बीच गैर-तेल व्यापार 76.2 अरब डॉलर रहा.
खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात पर भी सहयोग
निवेश और व्यापार के अलावा, दोनों देश खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं. इसका उद्देश्य भारतीय किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को खाद्य और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में मदद करना है.
इस तरह भारत और यूएई के बीच आर्थिक सहयोग अब पारंपरिक व्यापार और ऊर्जा क्षेत्रों से आगे बढ़कर पोर्ट, शिपबिल्डिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, फिनटेक और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रहा है.
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