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तुहिन कांत पांडेय का चक्रव्यूह: अभिमन्यु या अर्जुन?
माधबी बुच का दावा कि जेन स्ट्रीट जांच उनकी योजना थी, पांडेय को नौसिखिया दिखाता है. क्या ईमानदार पूर्व IAS पांडेय राजनीतिक दबाव और बुच की परछाई से बच पाएंगे, या इस नियामक जाल में फंस जाएंगे?
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
पलक शाह
एक चक्रव्यूह और नियामक कानाफूसी
सेबी के नए योद्धा तुहिन कांत पांडेय एक वित्तीय महाभारत में फंसे हुए हैं, जहां उन्हें जेन स्ट्रीट घोटाले के घातक चक्रव्यूह से जूझना पड़ रहा है. अपने पूर्ववर्तियों से अलग एम. दामोदरन, जिन्होंने अपने अंतिम दिनों में पार्टिसिपेटरी नोट्स पर प्रतिबंध लगाया था; यू. के. सिन्हा, जिन्होंने अपने अंतिम दिन को-लोकेशन जांच को आगे बढ़ाया; या अजय त्यागी, जिन्होंने अपना कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले हिमालयन बाबा का धमाका किया. सेबी का 3 जुलाई 2025 का आदेश, जिसमें जेन स्ट्रीट को प्रतिबंधित किया गया और ₹4,843 करोड़ फ्रीज़ किए गए, पांडेय के कार्यकाल की शुरुआत में ही एक बिजली के झटके की तरह गिरा. लेकिन क्या वह अभिमन्यु हैं, जो इस साजिशों के चक्रव्यूह में फंस गए हैं, या अर्जुन, जो न्याय की धार से इसे चीरने को तत्पर हैं?
सिंगापुर से, सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच का दावा है कि जेन स्ट्रीट जांच उनका मास्टरस्ट्रोक था, जिससे पांडेय को केवल उनके भव्य योजना के निष्पादक के रूप में दिखाया जा रहा है. एक सूक्ष्म परंतु रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन. इस बीच, जेन स्ट्रीट द्वारा महज़ दस दिनों से कम में $567 मिलियन की एस्क्रो जमा राशि यह संकेत देती है कि वे वापसी के लिए दुस्साहसी सौदेबाजी कर रहे हैं. ठीक उसी समय जब संसद का मानसून सत्र नजदीक है, विपक्षी पार्टियाँ प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को निशाने पर लेने के लिए तलवारें तेज कर रही हैं, जिसे भारत के शेयर बाजार के सबसे बड़े घोटालों में से एक कहा जा रहा है, और जिसमें रिटेल निवेशकों को हजारों करोड़ों का नुकसान हुआ है. क्या पांडेय, यह ईमानदार पूर्व IAS अधिकारी, राजनीतिक बाणों और बुच की परछाई से बच पाएंगे, या वह इस नियामक दलदल में फंस जाएंगे? क्या जेन स्ट्रीट के खिलाफ Ex-parte आपातकालीन आदेश में 15 महीने की देरी एक सोची-समझी रणनीति थी?
बुच की परछाई: राजनीतिक तूफान की आहट
सेबी की पहली महिला प्रमुख (मार्च 2022–फरवरी 2025) के रूप में माधबी पुरी बुच का कार्यकाल सुधारों और विवादों की रोलरकोस्टर सवारी रहा, जिसने पांडेय की राह में एक राजनीतिक विरासत छोड़ दी है जो उन्हें झुलसा सकती है. T+0 सेटलमेंट और इनसाइडर ट्रेडिंग एल्गोरिदम जैसे टेक-ड्रिवन बदलावों के लिए सराही गईं बुच को 2024 में तब झटका लगा जब हिंडनबर्ग रिसर्च ने उन पर और उनके पति धवल पर अदानी ग्रुप से जुड़े ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी रखने का आरोप लगाया, जिससे हितों के टकराव की आशंका जताई गई. कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने उन पर धावा बोला, यह आरोप लगाते हुए कि बुच ने ब्लैकस्टोन जैसी कंपनियों को तरजीह दी, जो उनके पति से जुड़ी थीं, और उनके इस्तीफे की मांग की. आंतरिक रूप से, सेबी कर्मचारियों ने विद्रोह कर दिया 1,000 कर्मचारियों ने “जहरीले” कार्य परिवेश का विरोध किया, जिससे राजनीतिक ताप और बढ़ गया. अक्टूबर 2024 में संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के समन पर बुच की अनुपस्थिति व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए, विपक्ष की ओर से अवमानना के आरोपों का कारण बनी, और कांग्रेस ने सवाल उठाया कि उन्हें किसने बचाया. लोकपाल ने हिंडनबर्ग के दावों को अनुमानात्मक कहकर खारिज कर दिया, लेकिन आलोचकों ने तर्क दिया कि यह मूल जांच से बचते हुए केवल तकनीकी आधारों पर निर्णय था, जिससे बुच की विरासत धूमिल हो गई. सिंगापुर से दिया गया यह दावा कि जेन स्ट्रीट जांच उनकी सोच थी, एक बार फिर तनाव को हवा देता है और पांडेय को नौसिखिया दिखाता है, जबकि विपक्ष इस घोटाले को सरकार पर हमले के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. रिटेल निवेशकों के नुकसान और बुच की परछाई के बीच, पांडेय एक राजनीतिक अग्निपरीक्षा का सामना कर रहे हैं जो उनके पूरे कार्यकाल की दिशा तय कर सकती है.
जेन स्ट्रीट की त्वरित नकद चाल
जेन स्ट्रीट की दुस्साहसी $567 मिलियन की एस्क्रो जमा, जो दस दिनों से भी कम समय में ट्रांसफर की गई, ने बाजार में हलचल मचा दी है. क्या यह एक दोषी की स्वीकारोक्ति है या वापस घुसने की एक चतुर चाल? अगले हफ्ते बड़े ऐलानों की कानाफूसी हो रही है, लेकिन अगर जेन स्ट्रीट को आसानी से छोड़ दिया गया तो यह पांडेय की प्रतिष्ठा को जला सकता है. सेबी की जांच अभी एनएसई के केवल 21 दिनों के डेटा पर अटकी है और रिटेल निवेशक ₹1.06 लाख करोड़ के घाव सहला रहे हैं, ऐसे में जुर्माने का आंकड़ा बढ़ सकता है. बीएसई का गायब डेटा एक कवर-अप की बू देता है, क्या सेबी ने एक्सचेंज को बख्श दिया है, या कोई बड़ा जाल बिछाया जा रहा है?
बीएसई की रहस्यमयी चुप्पी
जेन स्ट्रीट की कहानी बीएसई की रहस्यमयी अनुपस्थिति से और दिलचस्प हो जाती है. एनएसई ने अप्रैल 2024 से ट्रेडिंग डेटा सौंप दिया, लेकिन बीएसई की देरी या इनकार ने पक्षपात की चर्चाओं को जन्म दिया है. सेबी का 105-पृष्ठों का आदेश इस मुद्दे को नजरअंदाज करता है, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या एक्सचेंज को बचाने के लिए कोई छिपा हाथ काम कर रहा है? जब जेन स्ट्रीट की ₹36,500 करोड़ की कमाई सवालों के घेरे में है, तब बीएसई की चुप्पी और भी ज्यादा संदिग्ध लगती है.
जेन स्ट्रीट की कोविड चाल: पास में ही एक साहसिक डाका?
जब दिसंबर 2020 में पूरी दुनिया कोविड के चरम से जूझ रही थी, तब जेन स्ट्रीट चुपचाप भारत में जड़ें जमा रही थी, JSI Investments Pvt Ltd को एक चौंकाने वाली ₹4,500 करोड़ की अधिकृत पूंजी और ₹1,290 करोड़ की पेड-अप कैपिटल के साथ शामिल करवा रही थी. एक संकटग्रस्त समय के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी. भारत के डेरिवेटिव बाजार में इतनी बड़ी बाज़ी क्यों लगाई गई? कहानी और पेचीदा तब हो जाती है जब उनकी ऑफिस लोकेशन पर नजर डालते हैं: सेबी के मुंबई मुख्यालय और एनएसई के बगल में स्थित मेकर मैक्सिटी का एक को-वर्किंग स्पेस. और अनुपालन (कम्प्लायंस) कौन देख रहा है? 15 वर्षों से HSBC और Barclays जैसे दिग्गजों में काम कर चुके फाइनेंशियल क्राइम कंप्लायंस एक्सपर्ट, जो भारत, हांगकांग और सिंगापुर में KYC, प्रतिबंधों और नियामक भूलभुलैयों में माहिर हैं. उस अधिकारी की LinkedIn प्रोफाइल विशेषज्ञता की चीख लगाती है, लेकिन दलाल स्ट्रीट पर कानाफूसी हो रही है कि इतनी सशक्त कंप्लायंस टीम होने के बावजूद यह फर्म सेबी की ₹4,843 करोड़ की मार्केट मैनिपुलेशन जांच में फंसी कैसे?
को-वर्किंग गुत्थी
सेबी के मुंबई मुख्यालय के पास एक को-वर्किंग डेस्क से अरबों कमाने वाली एक वैश्विक ट्रेडिंग दिग्गज? जेन स्ट्रीट की यह संदिग्ध व्यवस्था घोटालों का केंद्र बन गई है, लेकिन मार्केट मैनिपुलेशन पर ऐतिहासिक आदेश के बाद भी सेबी का वहां छापा न मारना, जबकि छोटे-मोटे फिनफ्लुएंसर्स पर कार्रवाई की जा रही है. एक नियामक चूक की बू देता है. क्या जेन स्ट्रीट ने सेबी की नाक के नीचे सबूत मिटा दिए? इसके प्रमुख निदेशकों पर कोई प्रतिबंध नहीं और रिटेल निवेशकों में गुस्सा चरम पर है, ऐसे में यह कानाफूसी और तेज हो रही है कि क्या यह किसी वैश्विक प्रभाव का नतीजा है या सेबी की निगाहें चूक गई हैं? जैसे-जैसे जेन स्ट्रीट प्रतिबंध के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, दलाल स्ट्रीट अगली बड़ी खबर का इंतजार कर रहा है.
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