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Cipla खरीदने के लिए Torrent को यूरोप से चाहिए मदद, क्या है पूरा मामला?

Cipla खरीदने के लिए कंपनी 1.2 बिलियन डॉलर्स से 1.5 बिलियन डॉलर्स जितनी राशि इकट्ठा करने के बारे में विचार कर रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

मशहूर फार्मा कंपनी सिप्ला (Cipla) को खरीदने की दौड़ पिछले काफी लंबे समय से जारी है. टोरेंट फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (Torrent Pharmaceuticals Limited) भी इस दौड़ का हिस्सा है और अब इस कंपनी को लेकर एक काफी बड़ी खबर सामने आ रही है. माना जा रहा है कि सिप्ला को खरीदने के लिए अहमदाबाद स्थित टोरेंट फार्मा  CVC कैपिटल पार्टनर्स (CVC Capital Partners) से बात कर रही है. 

क्या है पूरा मामला?
इसके साथ ही कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया जा रहा है कि कंपनी 1.2 बिलियन डॉलर्स से लेकर 1.5 बिलियन डॉलर्स जितनी राशि इकट्ठा करने के बारे में विचार कर रही है. सिप्ला (Cipla) को खरीदने के लिए कंपनी CVC कैपिटल पार्टनर्स के साथ एक सहायता संघ बनाने के बारे में विचार कर रही है और राशी इकठ्ठा करने के लिए यूरोपीय बायआउट फंड (Europe Buyout Fund) को भी शामिल करने के बारे में विचार कर रही है. मामले से जुड़े लोगों का मानना है कि सिप्ला के अधिग्रहण के लिए अहमदाबाद स्थित कंपनी लगभग 60,000 करोड़ रुपयों की राशि इकठ्ठा करने के बारे में विचार कर रही है और यह पिछले कुछ समय के दौरान किया गया सबसे बड़ा अधिग्रहण हो सकता है. 

Cipla खरीदने के लिए इनसे भी जारी है बात
दूसरी तरफ टोरेंट फार्मा (Torrent Pharmaceuticals) बैन कैपिटल (Bain Capital) के साथ को-इन्वेस्टर को लेकर भी बातचीत कर रही है. लेकिन मामले से जुड़े लोगों का मानना है कि सिप्ला (Cipla) को खरीदने के लिए टोरेंट CVC कैपिटल को ही अपना प्रमुख पार्टनर चुनेगा. दूसरी तरफ टोरेंट और ब्रूकफील्ड (Brookfield) के बीच भी 1-1.2 बिलियन डॉलर्स की राशि इकट्ठा करने के लिए बातचीत जारी है. आपको बता दें कि टोरेंट फार्मा में 71.25% हिस्सा कंपनी के प्रमोटर्स सुधीर और समीर मेहता के परिवारों के पास है. भारतीय फार्मा कंपनियों में प्रमोटर्स के पास मौजूद यह सबसे बड़ी हिस्सेदारी है और इक्विटी को गिरवी रखकर वह इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं. 

क्या है कंपनी का प्लान?
कंपनी का प्लान है कि वह शेयर्स को उधारी के रूप में जारी करके एक NDU (नॉन-डिस्पोजेबल अंडरटेकिंग) बनाएंगे. आपको बता दें कि एक NDU स्टॉक प्लेजिंग (Stock Pledging) की तरह नहीं होता है. NDU के तहत एक कंपनी या इकाई स्टॉक्स को बेच सकती है जबकि स्टॉक प्लेजिंग में ऐसा नहीं हो सकता है. जबकि स्टॉक प्लेजिंग द्वारा शेयरों की बिक्री पर रोक लगाई जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो टोरेंट फार्मा द्वारा सिप्ला को खरीदे जाने के लिए इसी तरीके का इस्तेमाल किया जाएगा.
 

यह भी पढ़ें: इंडिया में इतने हजार कर्मचारियों को हायर करने जा रही है ये नामी कंपनी 

 


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