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आईटी सेक्टर की टॉप कंपनियों ने फिलहाल टाली स्नातकों की भर्ती, सब ठीक तो है….
दरअसल अमेरिका और यूरोप के बाजारों में जो मंदी की आहट दिखाई दे रही है वो तिमाही नतीजों में साफ तौर पर देखी जा सकती है. कंपनियों संख्या बढ़ाए बिना उत्पादकता बढ़ाना चाह रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एक ओर जहां दुनियाभर की तमाम रेटिंग एजेंसिया भारत की मौजूदा और भविष्य की ग्रोथ को लेकर आश्वस्त हैं वहीं दूसरी ओर देश के आईटी सेक्टर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. आईटी सेक्टर की टॉप कंपनियां जिसमें विप्रो, इंफोसिस, टीसीएस जैसे नाम शामिल हैं उन्होंने फिलहाल 10 हजार स्नातकों की नियुक्तियों को टाल दिया है. इन सभी स्नातकों को ऑफर लेटर दिए जा चुके हैं. लेकिन अभी तक कंपनी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है. ये जानकारी आईटी इंप्लाई यूनियन की ओर से निकल कर सामने आई है.
क्या कहते हैं NITES के प्रेसीडेंट?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Nacsent Information Technology Employee Senate (NITES) हरप्रीत सिंह सलूजा कहते हैं कि ऐसे कैंडिडेट जिन्हें आईटी सेक्टर की टॉप और मिड लेवल की कंपनियों की ओर से ऑफर दिए गए थे, इन कंपनियों में टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो(Wipro), जेनसार (Zensar) और एलटीआई माइंडट्री(LTI Mind Tree) जैसी कंपनियों के नाम हैं. इंफोसिस की ओर से इन कैंडीडेट को कहा गया है कि उनकी ज्वॉइंनिंग की डेट कंपनी की बिजनेस आवश्यकताओं पर निर्भर होगी. उन्हें इसके लिए कम से कम 3 से 4 हफ्ते पहले सूचित किया जाएगा. इंफोसिस की ओर से फाइनेंशियल ईयर 2024 में अब तक सिर्फ 11900 लोगों को चयनित किया गया है जबकि 2023 में कंपनी की ओर से कोई 50 हजार फ्रेशर्स को चुना गया था. इस साल हुआ सलेक्शन 76 प्रतिशत कम है. वहीं विप्रो ने दो साल पहले जिन स्टूडेंट को कैंपस सलेक्शन के जरिए लिया था उन्हें अभी तक जॉब नहीं दिया गया है.
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क्या बोले विप्रो के सीएचआरओ?
कुछ समय पहले एक अर्निंग काल(आय कॉल) के दौरान कंपनी के सीएचआरओ सौरभ गोविल ने कहा था कि वे नए फ्रेशर्स को नियुक्त करने से पहले उन प्रस्तावों को पूरा करेंगे जो हमने पहले दिए हैं. लेकिन अनिश्चित मैक्रो वातावरण के कारण कोई संख्या नहीं दी जा सकती है. वहीं दूसरी ओर मिड लेवल आईटी कंपनी जेनसार ने उनकी नियुक्ति पर विचार करने से पहले उनकी एक परीक्षा लेने की बात कही थी. देरी के बावजूद जेनसार की ओर से इंतजार कर रहे कैंडिडेट से अपनी बारी का इंतजार करने को कहा गया था. वहीं इस संबंध में टीसीएस इंफोसिस, विप्रो को भेजे गए सवालों का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है.
आखिर क्या है इस देरी की वजह?
सबसे ज्यादा समझने की बात ये है कि आखिर देरी क्यों हो रही है. दरअसल उत्तरी अमेरिका के बाजारों में देरी और यूरोप के बाजारों में बनी अनिश्चितता इसका सबसे बड़ा कारण है. इन बाजारों की अनिश्चितता में कंपनियों को मंदी का पुर्वानुमान दिखाई दे रहा है. कंपनियों ने इसी वजह से अपनी कॉस्ट एक्सपेंस को लेकर विचार करना शुरू कर दिया है. अगर सभी बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या पर नजर डालें तो वो 64 हजार तक कम हो गई है. अब नई नियुक्तिओं में कमी इसलिए हो रही है क्योंकि महामारी के दौरान पर्याप्त नियुक्तियां हुई हैं. अब इस स्थिति में कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ अपनी उत्पादकता को बढ़ाना चाहती हैं.
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