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धान की सीधी बुवाई का दायरा बढ़ा, 9 राज्यों में 81,000 हेक्टेयर तक पहुंचा बायर का कार्यक्रम
2023 में 3,500 हेक्टेयर से शुरू हुआ कार्यक्रम 2026 में 81,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र तक पहुंचा, किसानों को कम लागत और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल वाली खेती अपनाने में मदद
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
धान की खेती में पानी की खपत, बढ़ती लागत और कृषि मजदूरों की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. ऐसे में धान की सीधी बुवाई (DSR) को खेती के एक वैकल्पिक तरीके के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी दिशा में बायर का डायरेक्टएकर्स प्रोग्राम 2026 में 2 लाख एकड़ यानी 81,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र तक पहुंच गया है. कंपनी के मुताबिक, इस पहल के तहत किसानों को बीज, फसल सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और कृषि विशेषज्ञता के जरिए धान की सीधी बुवाई अपनाने में मदद दी जा रही है. इसका उद्देश्य पानी और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ खेती की लागत कम करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने में सहायता करना है.
भारत में धान की पारंपरिक खेती में पानी और श्रम की अधिक जरूरत होती है. जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव, कृषि लागत में वृद्धि और मजदूरों की उपलब्धता में कमी के कारण किसानों के लिए मौजूदा तरीकों से खेती करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. बायर के अनुसार, धान की सीधी बुवाई से पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी का इस्तेमाल 30-40 प्रतिशत तक और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 45 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. इसके अलावा, कृषि मजदूरों पर निर्भरता में 50 प्रतिशत तक कमी लाने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, इसके वास्तविक परिणाम भौगोलिक क्षेत्र, खेती के तरीके और खेत की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं.
तकनीक और कृषि सलाह के जरिए किसानों की मदद
डायरेक्टएकर्स प्रोग्राम में धान की सीधी बुवाई को केवल एक तकनीक के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे खेती की पूरी व्यवस्था में बदलाव के रूप में अपनाने पर जोर दिया जाता है. इसके तहत बायर बीज और उन्नत गुणों वाली किस्मों, फसल सुरक्षा उत्पादों, डिजिटल खेती के समाधानों और कृषि विशेषज्ञता को मशीनीकरण तथा डिजिटल सलाह के साथ जोड़ती है.
इस मॉडल के तहत किसानों और स्थानीय कृषि उद्यमियों को मशीनरी उपलब्ध कराने वाले साझेदारों, डिजिटल सलाहकार सेवाओं और सरकारी तथा निजी क्षेत्र की सहयोगी संस्थाओं से जोड़ा जाता है. इसका उद्देश्य खरपतवार प्रबंधन, मशीनों तक पहुंच और खेती से जुड़ी अन्य चुनौतियों को दूर करना है, ताकि छोटे किसान भी धान की सीधी बुवाई को अपना सकें. कंपनी का कहना है कि इस एकीकृत व्यवस्था से खेती में संसाधनों का अधिक कुशल इस्तेमाल करने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खेती की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
चार साल में तेजी से बढ़ा कार्यक्रम का दायरा
बायर ने 2021 में डायरेक्टएकर्स का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था. इसके बाद कार्यक्रम का विस्तार तेजी से हुआ. वर्ष 2023 में यह 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंचा था, जो 2024 में बढ़कर 17,000 हेक्टेयर और 2025 में 46,000 हेक्टेयर हो गया. वर्ष 2026 में इसका दायरा 81,000 हेक्टेयर से अधिक हो चुका है.
यह कार्यक्रम पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में संचालित है. कंपनी के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में इसकी मौजूदगी धान की खेती से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों में इस मॉडल को अपनाने की संभावना को दर्शाती है.
किसानों की लाभप्रदता बढ़ाने पर जोर
बायर फॉर इंडिया, बांग्लादेश और श्रीलंका के क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिविजनल हेड साइमन वीबुश ने कहा कि डायरेक्टएकर्स का 2 लाख एकड़ तक पहुंचना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि सही तकनीक, सेवाओं और सहयोग के जरिए धान की सीधी बुवाई को अलग-अलग क्षेत्रों में विस्तार दिया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि इस पहल में बीज, फसल सुरक्षा, डिजिटल समाधान और कृषि विशेषज्ञता को एकीकृत किया गया है, ताकि किसानों की लाभप्रदता और परिचालन दक्षता बढ़ाने में मदद मिल सके. कंपनी का लक्ष्य भारत में संसाधन-कुशल धान की खेती को बढ़ावा देना है.
डायरेक्टएकर्स बायर की पुनर्योजी कृषि (रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर) से जुड़ी व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है. इसके तहत कंपनी ऐसी खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, जिसमें उत्पादकता बढ़ाने के साथ पानी और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो तथा खेती बदलती परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बने. कंपनी के मुताबिक, आने वाले समय में इस कार्यक्रम की पहुंच और साझेदारियों का विस्तार किया जाएगा, ताकि संसाधन-कुशल खेती के तरीकों को अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सके.
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