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चीन के साथ व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर, रिश्ते सुधारने की कोशिश में जुटा भारत: पीयूष गोयल
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत चीन के साथ एक बार फिर संबंध विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस यात्रा का अंतिम परिणाम अभी तय नहीं है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत और चीन के बीच संबंधों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत किस दिशा में बढ़ेगी, इसे लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह बात कही. चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में 112 अरब डॉलर रहा. ऐसे में भारत की कोशिश व्यापार असंतुलन दूर करने, निर्यात बढ़ाने और अपने उत्पादों के लिए चीनी बाजार में बेहतर पहुंच हासिल करने की है.
चीन के साथ संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत चीन के साथ एक बार फिर संबंध विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस यात्रा का अंतिम परिणाम अभी तय नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के देशों के साथ व्यापार और सहयोग के लिए तैयार है, बशर्ते उसे उचित शर्तें मिलें, बातचीत में निरंतरता बनी रहे और भू-राजनीतिक माहौल स्थिर हो.
भारत और चीन के संबंधों में 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था. इसके बाद भारत ने चीन से होने वाले निवेश की जांच और निगरानी सख्त कर दी थी. हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा.
सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार में संरचनात्मक असंतुलन, आपूर्ति शृंखला से जुड़े मुद्दों और बाजारों तक सार्थक एवं अनुमानित पहुंच की जरूरत पर चर्चा की थी. शी जिनपिंग का यह सात साल में पहला भारत दौरा था. इस सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने भी अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात की थी.
चीन से भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर
चीन भारत के लिए आयात का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है. मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान भारत के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 17 फीसदी रही. इस अवधि में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर दर्ज किया गया. यह भारत की चीनी वस्तुओं पर निर्भरता को भी दर्शाता है.
हालांकि, चीन को भारत का निर्यात भी बढ़ा है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन को निर्यात करीब 37 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया. वहीं, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान चीन भारत के तीन सबसे बड़े निर्यात बाजारों में शामिल रहा. इस अवधि में भारत ने चीन को 9.61 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया.
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर भी बातचीत जारी
गोयल ने भारत और अमेरिका के संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आगे मजबूत होंगे. उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों में राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के बावजूद द्विपक्षीय संबंधों में सुधार जारी रहेगा.
अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत के बीच उनकी यह टिप्पणी अहम है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इसी महीने कहा था कि दोनों पक्षों ने बातचीत में प्रमुख मतभेदों की पहचान कर ली है, लेकिन निकट भविष्य में समझौते पर पहुंचने की संभावना कम है.
भारत और अमेरिका ने मार्च 2025 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू की थी. दोनों देशों का लक्ष्य 2025 की शरद ऋतु तक अंतरिम समझौता करने का था. हालांकि, तय समयसीमा बीतने के एक साल से अधिक समय बाद भी बातचीत जारी है.
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. भारत के कुल सालाना निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब पांचवां हिस्सा है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने अमेरिका के साथ 33.86 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया.
ऐसे में अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच भारत के लिए व्यापार वार्ता का अहम मुद्दा है. चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिशें भारत की व्यापक व्यापार रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं.
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