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RBI ने बैंक ग्राहकों को दी राहत उम्मीद, डेबिट कार्ड और लेट फीस चार्ज पर लगाम की तैयारी
RBI की इस पहल से न केवल आम ग्राहकों को राहत मिलेगी, बल्कि बैंकों को अपनी फीस स्ट्रक्चर पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों द्वारा ग्राहकों से वसूले जाने वाले विभिन्न शुल्कों पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहा है. डेबिट कार्ड फीस, न्यूनतम बैलेंस न रखने पर जुर्माना और लेट पेमेंट चार्ज जैसे शुल्कों में कटौती की सिफारिश की गई है. इस कदम से करोड़ों बैंक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
आरबीआई ने बैंकों को दिया संकेत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही के हफ्तों में आरबीआई अधिकारियों ने निजी बैठकों में बैंकों को यह स्पष्ट किया है कि वह डेबिट कार्ड शुल्क, न्यूनतम बैलेंस उल्लंघन और लेट पेमेंट चार्ज जैसे कस्टमर फीस में कटौती चाहता है. हालांकि, अभी तक इस विषय में कोई आधिकारिक प्रेस रिलीज़ या गाइडलाइन जारी नहीं की गई है.
रिटेल लोन में तेजी बनी वजह
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बैंकों ने कॉरपोरेट लोन की तुलना में रिटेल लोन पर अधिक ध्यान देना शुरू किया है. पर्सनल लोन, कार लोन और छोटे व्यापारिक लोन जैसे प्रोडक्ट्स से बैंकों की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. लेकिन इसी तेज रफ्तार ने आरबीआई की चिंता भी बढ़ाई है, खासकर जब बात ग्राहक-हितों की हो.
कम आय वर्ग पर ज्यादा असर डालते हैं ये शुल्क
विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक चार्ज का सबसे अधिक प्रभाव कम आय वाले उपभोक्ताओं पर पड़ता है. आरबीआई खास तौर पर ऐसे चार्ज पर नजर बनाए हुए है जो इस वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ाते हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने अब तक इन शुल्कों की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की है और इसे बैंकों के विवेक पर छोड़ दिया गया है.
बैंकों की कमाई पर पड़ सकता है असर
बैंक Bazaar के डेटा के मुताबिक, रिटेल और स्मॉल बिजनेस लोन पर प्रोसेसिंग फीस आमतौर पर 0.5% से 2.5% के बीच होती है. कुछ बैंक होम लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस की अधिकतम सीमा ₹25,000 तक भी रखते हैं. ऐसे में यदि RBI की सिफारिशों पर अमल होता है, तो बैंकों की नॉन-इंटरेस्ट इनकम यानी गैर-ब्याज आय पर असर पड़ सकता है.
फिलहाल बैंकों को मिली छूट, लेकिन निगरानी जारी
हालांकि आरबीआई ने कोई बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं किया है, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि शुल्कों में पारदर्शिता और ग्राहकों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए. यह कदम उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है.
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