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तंबाकू और सिगरेट पर नए एक्साइज बिल से राज्यों को राजस्व लाभ, वित्त मंत्री ने दी जानकारी
इस कदम से केंद्र और राज्यों दोनों के राजस्व में पारदर्शिता बढ़ेगी और तंबाकू उत्पादों के सेवन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
केंद्र सरकार ने हाल ही में तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी लगाने वाला सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल लोकसभा में पेश किया और बुधवार को इसे ध्वनिमत से पारित भी कर दिया गया. इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि यह नया टैक्स नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद एक्साइज ड्यूटी को लागू किया जा रहा है, और इसके माध्यम से राज्यों को भी हिस्सेदारी मिलेगी.
एक्साइज ड्यूटी, सेस नहीं
वित्त मंत्री ने कहा कि संसद में हुई चर्चा में कुछ सांसदों ने इसे सेस बताया, लेकिन यह सेस नहीं बल्कि एक्साइज ड्यूटी है. उन्होंने कहा, "यह कोई नया कानून नहीं है और न ही केंद्र सरकार कोई अतिरिक्त टैक्स लगा रही है. एक्साइज ड्यूटी पहले भी थी और अब इसे फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के अनुसार राज्यों के साथ साझा किया जाएगा." सीतारमण ने जोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी राज्य को फाइनेंस कमीशन द्वारा तय संसाधनों से कम नहीं मिलेगा.
आरोपों का खंडन
केंद्रीय वित्त मंत्री ने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि सरकार जीएसटी कंपनसेशन सेस के पैसे का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने के लिए कर रही है. सीतारमण ने बताया कि कंपनसेशन सेस पांच साल की अवधि के लिए राज्यों को देने के लिए ही एकत्र किया गया था और महामारी के दौरान राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए इसका इस्तेमाल किया गया.
बिल में प्रस्तावित दरें
सेंट्रल एक्साइज एक्ट में संशोधन के तहत अब विभिन्न श्रेणियों की सिगरेट पर 1,000 स्टिक पर 2,700 रुपये से 11,000 रुपये तक एक्साइज ड्यूटी लगेगी. इसके अलावा तंबाकू और चबाने वाले तंबाकू पर क्रमशः 60%-70% और 100% प्रति किलोग्राम की लेवी का प्रस्ताव है. सीतारमण ने याद दिलाया कि जीएसटी लागू होने से पहले भी तंबाकू उत्पादों पर टैक्स दरों को हर साल बढ़ाया जाता था ताकि इसके उपयोग को कम किया जा सके.
सिगरेट और पान मसाले पर असर
वित्त मंत्री ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हवाले से कहा कि पिछले दशक में भारत में सिगरेट की अफोर्डिबिलिटी स्थिर रही या बढ़ी है. 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से सिगरेट पर सेस की दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ. फरवरी 2026 से पान मसाले के सभी पैकेटों पर खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) और अन्य अनिवार्य घोषणाएं डिस्प्ले करना अनिवार्य होगा.
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