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सरकार ने लगाया ₹10,000 करोड़ का दांव: भारत बनेगा स्टार्टअप सुपरपावर
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को भारत की इनोवेशन-ड्रिवन इकॉनमी की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा दांव खेला है. कैबिनेट ने शनिवार को ₹10,000 करोड़ के ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ को मंजूरी देने की घोषणा की है. इसका मकसद घरेलू वेंचर कैपिटल को मजबूत करना, डीप-टेक और टेक-आधारित मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप्स को सहारा देना और नए यूनिकॉर्न की राह आसान करना है.
₹10,000 करोड़ का नया फंड ऑफ फंड्स 2.0
प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹10,000 करोड़ के कॉर्पस के साथ Startup India के तहत फंड ऑफ फंड्स के दूसरे चरण को मंजूरी दी है. यह फंड सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करेगा, बल्कि वैकल्पिक निवेश फंड्स (AIFs) के जरिए पूंजी उपलब्ध कराएगा. इन AIFs के माध्यम से शुरुआती और ग्रोथ स्टेज के स्टार्टअप्स को फंडिंग मिलेगी.
पहले फेज की सफलता के बाद दूसरा चरण
2016 में शुरू किए गए पहले फेज (FoF 1.0) का उद्देश्य स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराना और घरेलू वेंचर कैपिटल बाजार को मजबूत करना था. उस चरण के तहत ₹10,000 करोड़ की राशि 145 AIFs को आवंटित की गई, जिन्होंने देशभर के 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया. कृषि, एआई, रोबोटिक्स, क्लीन टेक, फिनटेक, हेल्थकेयर, स्पेस टेक और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में इस निवेश का व्यापक असर देखा गया.
यूनिकॉर्न इकोसिस्टम को नई उड़ानभारत में इस समय करीब 100 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स हैं. यूनिकॉर्न का मतलब है 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक वैल्यूएशन वाली कंपनी. 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत के समय जहां लगभग 500 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स थे, वहीं अब यह संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है. सिर्फ 2025 में ही 49,400 से ज्यादा स्टार्टअप्स को मान्यता मिली, जो एक साल में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. विशेषज्ञों का मानना है कि नया फंड यूनिकॉर्न की खासकर डीप-टेक और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में, अगली लहर तैयार कर सकता है.
डीप-टेक और इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
FoF 2.0 का मुख्य जोर डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्ग-टर्म कैपिटल की जरूरत वाले सेक्टर्स पर होगा. सरकार का उद्देश्य हाई-रिस्क लेकिन हाई-इम्पैक्ट इनोवेशन को सपोर्ट देना है, ताकि फाउंडर्स को शुरुआती फंडिंग की कमी के कारण अपने आइडिया छोड़ने न पड़ें. यह स्कीम प्रारंभिक ग्रोथ फेज के स्टार्टअप्स के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगी.
मेट्रो शहरों से आगे, पूरे देश में निवेश
यह फंड महानगरों से बाहर उभरते स्टार्टअप हब्स को भी प्राथमिकता देगा. छोटे शहरों और नए इकोसिस्टम में वेंचर कैपिटल की पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. सरकार ने हाल ही में स्टार्टअप मान्यता के लिए टर्नओवर सीमा को बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दिया है, जिससे अधिक कंपनियां इस इकोसिस्टम का हिस्सा बन सकेंगी.
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