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RBI का नया प्रस्ताव: NPA पर सख्ती, डिफॉल्ट पर बैंक ले सकेंगे प्रॉपर्टी का कब्जा

आरबीआई ने इस मसौदे पर सभी हितधारकों से 26 मई तक सुझाव आमंत्रित किए हैं. अंतिम नियम लागू होने से पहले इन सुझावों पर विचार किया जाएगा. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

कर्ज वसूली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और एनबीएफसी के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है. इस प्रस्ताव के तहत, यदि कोई कर्ज नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन जाता है और वसूली के अन्य सभी विकल्प विफल हो जाते हैं, तो बैंक गिरवी रखी गई अचल संपत्ति जैसे जमीन या मकान पर कब्जा कर सकते हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल विशेष परिस्थितियों में ही उठाया जाएगा और इसके लिए सख्त शर्तें लागू होंगी.

क्या है नया प्रस्ताव?

आरबीआई के ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, बैंक और एनबीएफसी डूबे हुए कर्ज की वसूली के लिए सिक्योरिटी के तौर पर रखी गई प्रॉपर्टी को अपने कब्जे में ले सकेंगे. यह कदम तब उठाया जाएगा जब कर्ज की रिकवरी के अन्य सभी रास्ते बंद हो चुके हों या असरदार साबित न हुए हों.

7 साल के भीतर बेचना होगा एसेट

प्रस्ताव में यह भी साफ किया गया है कि वित्तीय संस्थान ऐसी संपत्तियों को हमेशा के लिए अपने पास नहीं रख सकते. उन्हें अधिकतम सात साल के भीतर इन प्रॉपर्टीज को बेचकर अपनी राशि की वसूली करनी होगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक रियल एस्टेट कारोबार में न उलझें और केवल कर्ज वसूली तक सीमित रहें.

क्या होगा फायदा?

आरबीआई के अनुसार, इस व्यवस्था से बैंकों को डूबे हुए कर्ज की बेहतर रिकवरी में मदद मिलेगी. समयबद्ध और पारदर्शी बिक्री प्रक्रिया से संस्थान अपने नुकसान को कम कर सकेंगे और वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनी रहेगी.

किन्हें नहीं बेच पाएंगे प्रॉपर्टी?

ड्राफ्ट में गड़बड़ी या हितों के टकराव को रोकने के लिए सख्त प्रावधान भी किए गए हैं. इसके तहत बैंक या एनबीएफसी ऐसी जब्त की गई प्रॉपर्टी को उसी डिफॉल्टर या उससे जुड़े किसी व्यक्ति को दोबारा नहीं बेच सकेंगे.

SNFA क्या है?

आरबीआई ने इन संपत्तियों को “स्पेसिफाइड नॉन फाइनेंशियल एसेट्स (SNFA)” की श्रेणी में रखा है. इसका मतलब उन अचल संपत्तियों से है जिन्हें कर्ज की वसूली के लिए उधारकर्ता से लेकर संस्थान अपने कब्जे में लेते हैं. इसमें अन्य गैर-वित्तीय एसेट्स भी शामिल हो सकते हैं.

26 मई तक मांगे गए सुझाव

आरबीआई ने इस मसौदे पर सभी हितधारकों से 26 मई तक सुझाव आमंत्रित किए हैं. अंतिम नियम लागू होने से पहले इन सुझावों पर विचार किया जाएगा. 

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बैंकों के लिए NPA रिकवरी का एक मजबूत विकल्प तैयार होगा. वहीं, उधार लेने वालों के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि डिफॉल्ट की स्थिति में गिरवी रखी गई संपत्ति पर कब्जा संभव है, जिससे क्रेडिट अनुशासन को बढ़ावा मिल सकता है.
 


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