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सरकार ने 5,532 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाओं को मंजूरी दी, घरेलू विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार द्वारा दी गई इन परियोजनाओं की मंजूरी भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम साबित होगी. इससे न केवल घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सात बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका कुल निवेश 5,532 करोड़ रुपये होगा. यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साझा की है. अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इन कदमों से देश का इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स आयात बिल करीब 20,000 करोड़ रुपये तक घट सकता है और ‘मेक इन इंडिया’ को नई दिशा मिलेगी.
पीसीबी, कैमरा मॉड्यूल और कॉपर लैमिनेट का होगा घरेलू उत्पादन
मंत्री ने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) बेस, कैमरा मॉड्यूल, कॉपर लैमिनेट और पॉलीप्रोपिलीन फिल्म बनाने की इकाइयां शामिल हैं. ये सभी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे मोबाइल, लैपटॉप और टीवी में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण कलपुर्जे हैं.
केन्स और एंबर ग्रुप को मिले प्रमुख प्रोजेक्ट्स
इन सात परियोजनाओं में से चार परियोजनाएं केन्स ग्रुप की हैं, जिनमें कुल 3,280 करोड़ रुपये का निवेश होगा. इससे मल्टी-लेयर पीसीबी, कैमरा मॉड्यूल असेंबली और हाई डेंसिटी इंटरकनेक्ट पीसीबी का उत्पादन होगा. इसके अलावा एंबर ग्रुप की इकाई एसेंट सर्किट्स 991 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम करेगी, जिससे 7,800 करोड़ रुपये मूल्य के मल्टी-लेयर पीसीबी का निर्माण किया जाएगा.
वहीं, सिरमा स्ट्रैटेजिक इलेक्ट्रॉनिक्स की 765 करोड़ रुपये की परियोजना से 6,900 करोड़ रुपये के पीसीबी बनेंगे और एसआरएफ लिमिटेड की 496 करोड़ रुपये की परियोजना से 1,311 करोड़ रुपये की पॉलीप्रोपिलीन फिल्म तैयार होगी.
भारत में पहली बार बनेगा कैमरा मॉड्यूल
सबसे खास बात यह है कि अब पहली बार भारत में बिना विदेशी तकनीक के कैमरा मॉड्यूल बनाए जाएंगे. इनका उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और सीसीटीवी कैमरों में होगा.
सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से देश की पीसीबी की कुल मांग का 27 प्रतिशत और कैमरा मॉड्यूल की मांग का 15 प्रतिशत घरेलू स्तर पर पूरी हो सकेगी. कॉपर लैमिनेट और पॉलीप्रोपिलीन फिल्म जैसे कलपुर्जे पहली बार भारत में पूरी तरह स्वदेशी रूप से निर्मित होंगे.
5,000 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि इन परियोजनाओं से करीब 5,195 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अब तक 1.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं.
सरकार की यह पहल न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगी बल्कि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी. इससे देश में आयात पर निर्भरता घटेगी और उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात भी बढ़ेगा.
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