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ऑफिस स्पेस की मांग ने 2025 के पहले 9 महीनों में 50 मिलियन वर्ग फीट का आंकड़ा पार किया: Colliers
2025 के पहले 9 महीनों में भारत के ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जिसमें GCCs और टेक्नोलॉजी कंपनियों की भूमिका सबसे अहम रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारत के शीर्ष सात कार्यालय बाजारों (Office Market) में 2025 के पहले तीन तिमाहियों में लीजिंग गतिविधियों ने जबरदस्त मजबूती दिखाई है. इस अवधि में कुल कार्यालय स्थान (ऑफिस स्पेस) की मांग 50.9 मिलियन वर्ग फीट तक पहुंच गई है, जो साल-दर-साल (YoY) आधार पर 8% की वृद्धि दर्शाती है. हालांकि, तिमाही आधार पर Q3 2025 में यह संख्या थोड़ी घटकर 17.2 मिलियन वर्ग फीट रही.
बेंगलुरु में लीजिंग में बढ़त, पुणे और चेन्नई ने 2024 की वार्षिक मांग को पार किया
Q3 2025 में बेंगलुरु ने एक बार फिर देश भर में लीजिंग मांग का नेतृत्व किया. वहीं पुणे, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में भी मांग में तीव्र उछाल देखा गया, जहां ग्रेड-A ऑफिस स्पेस की मांग में YoY आधार पर 40% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई. 2025 की 9 महीनों की अवधि में बेंगलुरु ने कुल 14 मिलियन वर्ग फीट लीजिंग के साथ 27% बाजार हिस्सेदारी कायम रखी. इसके साथ ही चेन्नई, दिल्ली-NCR, हैदराबाद, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में भी 6–8 मिलियन वर्ग फीट तक की लीजिंग गतिविधि दर्ज की गई.
GCCs का योगदान 40% से अधिक, टेक्नोलॉजी सेक्टर सबसे आगे
Colliers के अनुसार, 2025 में अब तक GCCs (Global Capability Centers) ने लगभग 20 मिलियन वर्ग फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है, जो कुल मांग का 40% हिस्सा है. टेक्नोलॉजी सेक्टर अकेले 36% पारंपरिक लीजिंग में योगदान दे रहा है, जबकि BFSI कंपनियों की हिस्सेदारी 19% रही.
Colliers इंडिया के ऑफिस सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर अर्पित मेहरोत्रा ने कहा, “GCCs और घरेलू कंपनियों की सक्रियता के चलते भारत का ऑफिस बाजार 50 मिलियन वर्ग फीट का आंकड़ा पार कर चुका है. हम वर्ष के अंत तक यह मांग 70 मिलियन वर्ग फीट तक पहुंचने की संभावना देख रहे हैं.”
नई सप्लाई में 10% की वृद्धि, पुणे और बेंगलुरु का दबदबा
2025 की तीसरी तिमाही में नई ऑफिस सप्लाई 16.6 मिलियन वर्ग फीट रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15% अधिक है. 9 महीनों की अवधि में कुल नई सप्लाई 41.4 मिलियन वर्ग फीट तक पहुंच गई, जिसमें से 54% पुणे और बेंगलुरु से आई है.
पुणे में सप्लाई में 4 गुना वृद्धि देखी गई (Q3 में 4.6 मिलियन वर्ग फीट), जबकि हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में नई सप्लाई तुलनात्मक रूप से कम रही.
फ्लेक्स स्पेस की मांग में तेजी; BFSI और टेक कंपनियों का दबदबा
पारंपरिक लीजिंग 2025 के पहले 9 महीनों में 41.7 मिलियन वर्ग फीट रही, जिसमें टेक्नोलॉजी और BFSI सेक्टर प्रमुख रहे. अकेले टेक कंपनियों ने 15 मिलियन वर्ग फीट से अधिक जगह लीज पर ली, जिसमें 24% YoY वृद्धि देखी गई. फ्लेक्स स्पेस लीजिंग 9.2 मिलियन वर्ग फीट तक पहुंच गई, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक है.
Q3 2025 में फ्लेक्स स्पेस की प्रमुख मांग बेंगलुरु, पुणे और चेन्नई में केंद्रित रही, जो कुल फ्लेक्स स्पेस की दो-तिहाई मांग का प्रतिनिधित्व करते हैं.
Colliers इंडिया के रिसर्च प्रमुख, विमल नाडार ने कहा, “Q3 2025 में टेक्नोलॉजी और BFSI कंपनियों ने कुल पारंपरिक लीजिंग का लगभग 60% हिस्सा लिया. फ्लेक्स स्पेस की बढ़ती लोकप्रियता दर्शाती है कि कंपनियां अब अधिक लचीली और रणनीतिक कार्यस्थलों को प्राथमिकता दे रही हैं.”
खालीपन स्थिर, किराए में बढ़ोतरी
हालांकि मांग ने नई सप्लाई को पीछे छोड़ दिया, लेकिन रीलोकेशन और पोर्टफोलियो पुनर्संरचना के कारण खालीपन (वैकेंसी) स्तर लगभग स्थिर रहे. भारत स्तर पर वैकेंसी 16.4% पर बनी रही. पुणे और दिल्ली-NCR में नई परियोजनाओं के कारण वैकेंसी में 100 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई. इस बीच, अधिकतर शहरों में किराए बढ़े हैं. भारत का ऑफिस मार्केट अभी भी ग्लोबल कंपनियों के लिए आकर्षक बना हुआ है, जहां विभिन्न शहरों और माइक्रो-मार्केट्स में किराए का व्यापक स्पेक्ट्रम उन्हें अपने ऑपरेशंस को भारत में समेकित करने के लिए प्रेरित करता है.
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