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विदेशों में भारतीय आम का जलवा, अल्फांसो से केसर तक बढ़ी डिमांड, एक्सपोर्ट ने बनाया नया रिकॉर्ड
विदेशों में बसे भारतीयों के साथ-साथ विदेशी उपभोक्ताओं के बीच भी भारतीय आमों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. कई देशों में भारतीय आमों को प्रीमियम सीजनल फ्रूट के तौर पर देखा जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय आमों की मिठास अब दुनिया भर के बाजारों में छा रही है. खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर तक भारतीय आमों की मांग तेजी से बढ़ रही है. बेहतर लॉजिस्टिक्स, मजबूत कोल्ड-चेन नेटवर्क और प्रीमियम क्वालिटी के चलते भारत का आम निर्यात नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. खासतौर पर महाराष्ट्र का अल्फांसो आम अब भी विदेशी बाजारों में सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है.
भारतीय आमों की विदेशों में बढ़ी लोकप्रियता
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत मानी जाती है. घरेलू खपत अधिक होने के बावजूद हाल के वर्षों में आम के निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. विदेशों में बसे भारतीयों के साथ-साथ विदेशी उपभोक्ताओं के बीच भी भारतीय आमों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. कई देशों में भारतीय आमों को प्रीमियम सीजनल फ्रूट के तौर पर देखा जा रहा है.
एक्सपोर्ट से हुई रिकॉर्ड कमाई
एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का निर्यात किया. इससे देश को 470 करोड़ रुपये से अधिक का एक्सपोर्ट रेवेन्यू हासिल हुआ, जो भारतीय आमों की वैश्विक मांग में बढ़ोतरी को दर्शाता है.
सिंगापुर से ओमान तक भारतीय आमों की जबरदस्त मांग
कल यानी 25 मई को भारत में सिंगापुर उच्चायोग की ओर से किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारतीय आमों की लोकप्रियता को और चर्चा में ला दिया. पोस्ट में कहा गया कि सिंगापुर के सुपरमार्केट्स में भारतीय आम आते ही तेजी से बिक रहे हैं और अलग-अलग राज्यों के आमों को ग्राहक हाथों-हाथ खरीद रहे हैं.
Guys, #indianmango fever has landed in Singapore. Mangoes from all states of India are flying off the shelves. Thanks to @protosphinx for sharing the story with us. HC Wong#mango #mangoexport @AgriGoI #fruit pic.twitter.com/vQWkjR5jN4
— Singapore in India (@SGinIndia) May 25, 2026
वहीं, ओमान में भारत के दूतावास (मस्कट) ने एक्स पर पोस्ट करके बताया कि राजदूत जी.वी. श्रीनिवास ने कल मस्कट स्थित लुलु हाइपरमार्केट में आयोजित ‘मैंगो मेनिया’ फेस्टिवल के 23वें संस्करण का उद्घाटन किया. इस साल के वार्षिक आयोजन में भारत की 50 से अधिक प्रीमियम आम किस्मों के साथ दुनिया भर के चुनिंदा आम प्रदर्शित किए गए. ताजे फलों के अलावा फेस्टिवल में आम से बने ताजे और प्रोसेस्ड उत्पादों की भी बड़ी श्रृंखला पेश की गई। यह आयोजन भारत-ओमान के मजबूत कृषि और FMCG व्यापार साझेदारी का उत्सव माना जा रहा है.
HE @AmbGVSrinivas inaugurated the 23rd edition of the Mango Mania festival at Lulu Hypermarket in Muscat yesterday. This year, the annual event showcased over 50 premium mango varieties from India, alongside selections from across the globe. In addition to fresh fruit, the… pic.twitter.com/it7ijRisan
— India in Oman (Embassy of India, Muscat) (@Indemb_Muscat) May 25, 2026
UAE बना सबसे बड़ा खरीदार
खाड़ी देशों में भारतीय आमों की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय आमों का सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा है. APEDA के मुताबिक, केवल 2024 में भारत ने UAE को 12,000 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए, जिनकी कीमत करीब 20 मिलियन डॉलर रही.
इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कतर और कुवैत जैसे देशों में भी भारतीय आमों की मांग लगातार बढ़ रही है.
अल्फांसो का जलवा बरकरार
महाराष्ट्र का अल्फांसो आम अपनी खास खुशबू, स्वाद और मखमली बनावट के कारण अब भी विदेशी बाजारों में सबसे लोकप्रिय किस्म बना हुआ है. यही वजह है कि इसे 'आमों का राजा' कहा जाता है. हालांकि अब दूसरी भारतीय किस्मों की भी मांग बढ़ने लगी है. गुजरात का केसर, दक्षिण भारत का तोतापरी और उत्तर भारत के लंगड़ा व चौसा आम भी विदेशी उपभोक्ताओं को खूब पसंद आ रहे हैं.
GI टैग वाले आमों पर बढ़ा फोकस
भारत अब GI-टैग्ड प्रीमियम आमों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग पर भी जोर दे रहा है. जुलाई 2025 में अबू धाबी में आयोजित 'इंडियन मैंगो मेनिया 2025' कार्यक्रम के जरिए भारतीय प्रीमियम आमों को वैश्विक बाजार में प्रमोट किया गया. इस तरह के आयोजनों से भारतीय आमों की ब्रांड वैल्यू और पहचान दोनों मजबूत हो रही हैं.
आधुनिक हुआ एक्सपोर्ट सिस्टम
पिछले एक दशक में भारत का आम निर्यात इकोसिस्टम काफी बदल गया है. अब निर्यातक बेहतर पैकेजिंग, आधुनिक पकाने की सुविधाएं और पश्चिमी देशों के सख्त फाइटोसैनिटरी नियमों का पालन कर रहे हैं. कोल्ड-चेन और इरेडिएशन सुविधाओं में सुधार से भी एक्सपोर्ट को बड़ी मदद मिली है.
तेजी से बढ़ती मांग के बावजूद भारतीय आम निर्यातकों के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं. आम का सीमित सीजन, हवाई माल ढुलाई की ऊंची लागत और कुछ देशों के कड़े आयात नियम कारोबार को प्रभावित करते हैं. फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय आमों की वैश्विक मांग और निर्यात दोनों में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
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