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बढ़ते जोखिमों के बीच AI का सहारा ले रहे भारतीय मैन्युफैक्चरर्स, स्मार्ट फैक्ट्रियों पर फोकस: रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब सिर्फ प्रयोग के स्तर पर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाने लगी हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारत की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्ट फैक्ट्री टेक्नोलॉजी में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं. बढ़ती लागत, श्रमिकों की कमी और साइबर खतरों के बीच कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए जरूरी मान रही हैं. यह जानकारी रॉकवेल ऑटोमेशन की नई रिपोर्ट में सामने आई है.

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अब मजबूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब सिर्फ प्रयोग के स्तर पर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाने लगी हैं. सर्वे में शामिल 90 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी के दौर में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जरूरी हो गया है. रिपोर्ट 17 बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों के 1,560 निर्णय लेने वाले अधिकारियों के जवाबों पर आधारित है, जिसमें भारत भी शामिल है.

बढ़ती लागत और साइबर खतरे बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 12 महीनों में ऊर्जा लागत, साइबर सुरक्षा जोखिम और कुशल कर्मचारियों की कमी कंपनियों की ग्रोथ के सामने सबसे बड़ी बाधा बन सकती है. इन चुनौतियों का जिक्र 34 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किया. वहीं 33 प्रतिशत कंपनियों ने महंगाई और आर्थिक अस्थिरता को बड़ा खतरा बताया. इसके अलावा सप्लाई चेन में रुकावट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी चिंता का विषय बने हुए हैं.

भारत में स्मार्ट फैक्ट्री मॉडल को बढ़ावा

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, केमिकल और इंडस्ट्रियल गुड्स जैसे सेक्टर्स में उत्पादन बढ़ाने की कोशिश हो रही है. ऐसे में कंपनियां उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए स्मार्ट फैक्ट्री मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां अब केवल पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं हैं. लगातार दूसरे साल ऑपरेटिंग बजट का करीब एक-तिहाई हिस्सा इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी अपनाने पर खर्च किया जा रहा है. सिर्फ 18 प्रतिशत कंपनियां अभी शुरुआती परीक्षण चरण में हैं, जबकि 59 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी पहले से उनके ऑपरेशन में सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रही है.

AI बना सबसे बड़ा गेमचेंजर

रिपोर्ट में AI और मशीन लर्निंग को सबसे प्रभावी टेक्नोलॉजी बताया गया है. करीब 48 प्रतिशत प्रतिभागियों ने AI और मशीन लर्निंग को बिजनेस रिजल्ट सुधारने वाला सबसे बड़ा कारक माना. रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल 34 प्रतिशत औद्योगिक ऑपरेशन AI आधारित सिस्टम से जुड़े हुए हैं और 2030 तक यह आंकड़ा बढ़कर 54 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

कंपनियों का कहना है कि AI का इस्तेमाल क्वालिटी सुधारने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में तेजी से बढ़ रहा है.

क्वालिटी और लागत पर सबसे ज्यादा फोकस

भारतीय कंपनियां घरेलू और निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए डिजिटल निवेश को सीधे बिजनेस लक्ष्यों से जोड़ रही हैं. सर्वे में 46 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य उत्पाद की गुणवत्ता सुधारना है. वहीं 40 प्रतिशत कंपनियां लागत कम करने और 36 प्रतिशत जोखिम घटाने पर फोकस कर रही हैं.

डेटा का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहीं कंपनियां

हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कंपनियां डिजिटल निवेश का पूरा फायदा नहीं उठा पा रही हैं. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जुटाए गए डेटा का सिर्फ 43 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावी तरीके से इस्तेमाल हो रहा है. कई कंपनियों को अलग-अलग सिस्टम से आने वाले डेटा को जोड़ने और उसका सही विश्लेषण करने में दिक्कत हो रही है.

साइबर हमलों का खतरा बढ़ा

डिजिटल फैक्ट्रियों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा भी बड़ी चिंता बनती जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में 46 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां किसी न किसी साइबर हमले का शिकार हुईं. सबसे ज्यादा खतरा IT सिस्टम, एंटरप्राइज नेटवर्क और IT तथा ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी के इंटीग्रेशन पॉइंट्स पर देखा गया.

कर्मचारियों के कौशल में बदलाव

ऑटोमेशन और AI बढ़ने के साथ कंपनियां कर्मचारियों के कौशल को भी नया रूप दे रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि 40 प्रतिशत कंपनियों ने पिछले एक साल में कर्मचारियों को नई तकनीक के अनुसार ट्रेनिंग दी या री-स्किल किया. वहीं, 93 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग आने वाले वर्षों में वर्कफोर्स स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल देगी.
 


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