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अहितकर उत्पादों पर केंद्र को मिलेगा सीधा राजस्व अधिकार, वित्त मंत्री ने लोक सभा में पेश किए दो नए कराधान बिल
अहितकर उत्पादों पर नए कराधान बिल सरकार के राजस्व ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हैं. जहां केंद्र स्वास्थ्य और सुरक्षा को मजबूत आधार देने के लिए अतिरिक्त आय जुटाना चाहता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
केंद्र सरकार ने तंबाकू और पान मसाला जैसे अहितकर उत्पादों पर अतिरिक्त राजस्व जुटाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण टैक्सेशन बिल संसद में पेश किए हैं. इन नए प्रस्तावों से जहां स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खर्चों को मजबूती मिलेगी, वहीं राज्यों के साथ उपकर साझा करने की पुरानी व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव होगा.
तंबाकू और पान मसाला पर नए कर प्रस्ताव
सोमवार को लोक सभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ाने तथा पान मसाले पर उपकर लगाने से जुड़े दो अहम विधेयक पेश किए. सरकार के मुताबिक इसका लक्ष्य स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी व्यय के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है. केंद्र जुलाई 2017 से इन उत्पादों पर उपकर वसूल रहा था और जीएसटी लागू होने के बाद इसे राज्यों के साथ साझा किया जाता था. लेकिन अब नई व्यवस्था में केंद्र इस अतिरिक्त राजस्व को राज्यों के साथ साझा नहीं करेगा.
जीएसटी सुधार और राजस्व क्षति की भरपाई
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव का मानना है कि सरकार इस कदम के जरिए जीएसटी सुधारों से हुई राजस्व क्षति को आंशिक रूप से पूरा करना चाहती है. उनका कहना है कि नवंबर के आंकड़ों से स्पष्ट है कि जीएसटी संग्रह की रफ्तार धीमी हुई है. पहले उपकर का इस्तेमाल राज्यों को मुआवजा देने और कोविड काल के दौरान लिए गए ऋण को चुकाने में हुआ, लेकिन अब इसका उद्देश्य विस्तृत राष्ट्रीय जरूरतों की पूर्ति है.
विपक्ष का विरोध और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने लोक सभा में दोनों बिलों का विरोध किया. उनका तर्क था कि सरकार तंबाकू उत्पादों से राजस्व तो चाहती है, लेकिन विधेयकों में तंबाकू के स्वास्थ्य खतरों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. उन्होंने सरकार पर केवल उत्पाद शुल्क बढ़ाने पर ध्यान देने और स्वास्थ्य सुरक्षा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया.
वहीं, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि जीएसटी लागू होने के बाद तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में कमी इसलिए की गई थी, ताकि मुआवजा उपकर के लिए जगह बनाई जा सके.
अब जबकि मुआवजा उपकर को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, सरकार इन संशोधनों के जरिए वित्तीय गुंजाइश बढ़ाना चाहती है.
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