होम / बिजनेस / ब्रह्मपुत्र घाटी से 65 गीगावॉट हाइड्रोपावर के लिए केंद्र का बड़ा प्लान, ₹6.4 लाख करोड़ होंगे खर्च
ब्रह्मपुत्र घाटी से 65 गीगावॉट हाइड्रोपावर के लिए केंद्र का बड़ा प्लान, ₹6.4 लाख करोड़ होंगे खर्च
यह मास्टर प्लान देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
बिजली मंत्रालय ने ब्रह्मपुत्र नदी घाटी क्षेत्र से 65 गीगावॉट पनबिजली क्षमता को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान तैयार किया है. इस योजना पर ₹6.42 लाख करोड़ के पूंजीगत खर्च का अनुमान है, जो देश की अब तक की सबसे बड़ी पारेषण परियोजनाओं में से एक होगी.
पूर्वोत्तर की जलविद्युत परियोजनाओं से होगी बिजली आपूर्ति
इस परियोजना का उद्देश्य विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली को देश के बाकी हिस्सों तक पहुंचाना है. इसके तहत ब्रह्मपुत्र घाटी की विशाल जलविद्युत क्षमता का दोहन कर देश को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की ओर ले जाने की कोशिश की जाएगी.
मास्टर प्लान की मुख्य विशेषताएं
यह विस्तृत योजना केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ परामर्श कर तैयार की गई है. इसके अंतर्गत 31,000 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें, 68 गीगावोल्ट एम्पीयर (GVA) ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता और 42 गीगावॉट HVDC (High Voltage Direct Current) संवहन क्षमता जोड़ी जाएगी. यह पूरी संरचना मौजूदा 495 गीगावॉट की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में एक बड़ा इजाफा करेगी, जिसमें फिलहाल जलविद्युत की हिस्सेदारी लगभग 50 गीगावॉट है.
2035 तक और उसके बाद के लिए दो चरणों में क्रियान्वयन
योजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा: 2035 तक ₹1.91 लाख करोड़ और 2035 के बाद ₹4.51 लाख करोड़ का खर्च किया जाएगा. यह खर्च इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) और डेडिकेटेड ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण में किया जाएगा. इसमें नए और मौजूदा सब-स्टेशनों का विस्तार भी शामिल है. इस मास्टर प्लान के निर्माण में बिजली मंत्रालय ने ग्रिड इंडिया, सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी, एनएचपीसी, एसजेवीएन, टीएचडीसी, नीपको और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ कई स्तरों पर विचार-विमर्श किया है.
ब्रह्मपुत्र घाटी का भौगोलिक दायरा और रणनीतिक महत्व
करीब 5.8 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली ब्रह्मपुत्र घाटी का 33.6% हिस्सा भारत में है, जबकि 50.5% चीन, 8.1% बांग्लादेश और 7.8% भूटान के हिस्से में आता है. इस क्षेत्र की भौगोलिक जटिलता और सामरिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यह योजना न केवल ऊर्जा के लिहाज से, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अहम मानी जा रही है.
टैग्स