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अधिग्रहण फाइनेंसिंग पर लगी रोक हटेगी, निवेश में आएगी तेजी: RBI गवर्नर
आरबीआई के हालिया कदम यह संकेत देते हैं कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली अब अधिक उदार और विकासोन्मुख दिशा में आगे बढ़ रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधारों का ऐलान करते हुए अधिग्रहण फाइनेंसिंग पर लगी पाबंदी हटाने का निर्णय लिया है. इस कदम से देश में निवेश और कॉर्पोरेट गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि यह सुधार न केवल बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ाएंगे, बल्कि रियल इकोनॉमी को भी मजबूती प्रदान करेंगे.
कंपनियों को मिलेगा अधिग्रहण के लिए सस्ता कर्ज
पहले बैंकों को किसी कंपनी या बिजनेस के अधिग्रहण के लिए कर्ज देने पर रोक थी, लेकिन अब इस पाबंदी को हटाया जा रहा है. नई व्यवस्था के तहत कंपनियां जरूरत पड़ने पर बैंक से आसानी से ऋण लेकर दूसरे व्यवसाय खरीद या मर्ज कर सकेंगी. इससे न केवल कॉर्पोरेट निवेश में वृद्धि की संभावना है, बल्कि नए प्रोजेक्ट्स और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
70% तक लोन की सीमा और सुरक्षा प्रावधान बरकरार
भारतीय स्टेट बैंक द्वारा आयोजित बैंकिंग और अर्थशास्त्र सम्मेलन में गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि सुधारों के साथ कुछ सुरक्षा सीमाएं (safeguards) भी रखी गई हैं. बैंकों को किसी डील की कुल कीमत का 70% तक ही फाइनेंस करने की अनुमति होगी. इसके अलावा, लोन और निवेश के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए तय मानक भी लागू रहेंगे. उन्होंने कहा कि ये कदम बैंकिंग सेक्टर को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने में मदद करेंगे.
‘हर केस को अलग नजरिए से देखें बैंक’: गवर्नर मल्होत्रा
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नियामक संस्थान कंपनियों के बोर्डरूम में लिए जाने वाले फैसलों की जगह नहीं ले सकते. उन्होंने कहा, “भारत जैसे विविध देश में हर लोन, हर जमा और हर लेनदेन अलग होता है. इसलिए बैंकों को हर केस को स्वतंत्र रूप से देखकर फैसला लेना चाहिए, न कि सब पर एक जैसा नियम लागू करना चाहिए.”
जोखिम प्रबंधन पर रहेगा फोकस
आरबीआई प्रमुख ने बताया कि संस्था के पास जोखिमों को संभालने के लिए कई उन्नत नियामक उपकरण हैं — जैसे जोखिम-आधारित पूंजी प्रावधान, अतिरिक्त सुरक्षा बफर और जरूरी प्रावधान तैयार रखना. उन्होंने कहा कि इन कदमों से बैंकिंग सिस्टम अधिक मजबूत, संतुलित और लचीला बनेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा.
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